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कैंसर के इलाज में जुटे वैज्ञानिकों को बड़ी सफलता मिली है। वहीं अब जापानी शोधकर्ताओं ने कैंसर जैसी घातक बीमारी का इलाज ढूंढ लिया है और इसे लेकर बड़ा दावा किया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने एक ऐसा आर्टिफिशियल डीएनए तैयार किया है जो गर्भाशय और स्तन कैंसर के इलाज में कारगर होगा। इसके लिए कृत्रिम डीएनए का उपयोग करके कैंसर कोशिकाओं को मारने का नया तरीका निकाला है जो भविष्य में इस गंभीर बीमारी के इलाज का रास्ता साफ करेंगे।
नए शोध के मुताबिक कैंसर (cancer) के दौरान कोशिकाओं का निर्माण तेजी से होता है। कोशिकाओं की इस वृद्धि को रोकने के लिए शोधकर्ताओं की टीम ने कृत्रिम डीएनए (artificial DNA) ओंकोलिटिक का निर्माण किया। इसे कैंसर कोशिकाओं में इंजेक्ट किया गया। कैंसर की कोशिकाओं में तेजी से बढ़ोतरी का जिम्मेदार माइक्रोआरएनए एमआइआर-21 का मुकाबला डीएनओ ओंकोलिटिक से होता है। प्रतिक्रिया स्वरूप ओंकोलिटिक एक प्रतिरक्षा का निर्माण करता है। इस दौरान ओंकोलिटिक की ओर से बनाई लंबी श्रृंखलाएं कैंसर कोशिकाओं (cancer cells) को तेजी से खत्म करती हैं और कैंसर के ऊतकों के निर्माण को भी रोक देती है। इससे कैंसर कोशिकाएं खत्म हो जाती हैं। कैंसर के उपचार की दिशा में इस शोध को बड़ी सफलता माना जा रहा है।
अमेरिकन केमिकल सोसाइटी (American Chemical Society) के जर्नल में इस शोध को प्रकाशित किया गया। विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने गर्भाशय के कैंसर (uterine cancer) और स्तन कैंसर को खत्म करने के लिए कृत्रिम डीएनए का उपयोग किया। परिणाम काफी अच्छे रहे और इससे सेल्स को मारने में मदद मिली। प्रोफेसर कुनिहिको मोरिहिरो और प्रोफेसर अकिमित्सु ओकामोटो के नेतृत्व में टोक्यो यूनिवर्सिटी (University of Tokyo) के शोधकर्ताओं की एक टीम ने मिलकर डीएनए तैयार किया।







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