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हमीरपुर। पित्ताशय या गॉलब्लाडर की पथरी छोटे-छोटे पत्थर होते हैं जो पित्ताशय की थैली में बनते हैं। पित्त की पथरी लीवर के नीचे रहती है जो बहुत दर्दनाक हो सकती है। जब पित्ताशय में कोलेस्ट्रोल जमने लगता है या सख्त होने लगता है तब पथरी की शिकायत होती है। वहीं उत्तरी भारत में दक्षिण भारत के मुकाबले पित्त की पथरी के ज्यादा मरीज मिल रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इसका कारण लोगों में बढ़ता मोटापा, काम न करना और आरामदायक जीवन व्यतीत करना है। लोग शारीरिक व्यायाम से दूर होते जाते हैं।
डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज (Medical college) हमीरपुर में भी सप्ताह में 4 से 5 ऑपरेशन पित्त की पथरी के किए जा रहे हैं। पित्त की पथरी से पीड़ित लोगों की संख्या इतनी बढ़ती जा रही है कि छह माह बाद ऑपरेशन (surgery) की तारीख मिल रही है। 10 माह में ही 2,000 के करीब पित्त की पथरी के ऑपरेशन (stone surgery) हमीरपुर अस्पताल के विशेषज्ञों (hospital specialists) ने कर दिए हैं। यही हाल प्रदेश के अन्य अस्पतालों में भी है।
बता दें कि वहीं हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में भी पित्त की पथरी के मरीजों में लगातार इजाफा होता जा रहा है। मैदानी क्षेत्रों के लोगों में पित्त की पथरी ज्यादा पाई जा रही है। यहां के लोग व्यायाम (exercise) और अन्य शारीरिक कामों को ज्यादा नहीं करते। वहीं, जंक फूड भी पित्त की पथरी का कारण बन रहा है। 40 से 50 वर्ष की आयु वर्ग में सबसे ज्यादा पित्त की पथरी पाई जा रही है।







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