











































प्रतीकात्मक
नई दिल्ली। टीकाकरण से कोरोना का जोखिम पहले से बीमार लोगों तक सिमट गया है। टीकाकरण ने कोरोना का खतरा और गंभीरता दोनों को कम किया है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ने पाया कि पहले से स्वस्थ्य व्यक्ति संक्रमण की चपेट में आने के बाद कुछ दिन में ठीक भी हो रहे हैं। हालांकि पहले से बीमार अधिक उम्र के रोगियों में जोखिम बना हुआ, इन्हें बहुत अधिक सतर्कता के साथ रहना है।
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव ने बृहस्पतिवार को बताया कि पिछले साल देश में घर बैठे कोविड जांच करने वाली किट्स को अनुमति दी गई थी। इस लहर के आने से पहले तक देश में करीब तीन हजार लोगों ने इन किट्स के जरिए अपने घरों में ही कोविड की जांच की गई लेकिन बीते दिसंबर माह में संक्रमण के मामले बढ़ने से लेकर अब तक दो लाख से भी अधिक लोगों ने बीते 28 दिन में घर में रहकर कोरोना की जांच की है।
नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने कहा कि देश में काफी तेजी से तीसरी लहर आगे बढ़ रही है। इसमें मृत्युदर काफी कम हुई है, लेकिन अति जोखिम वाले वर्ग के लिए अभी भी संक्रमण खतरा बना हुआ है। जिन लोगों को पहले से बीमारियां हैं उन्हें काफी सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
अभी तक यह पता चला है कि टीकाकरण के जरिए कोरोना की इस लहर को काफी हद तक हल्का रखने में कामयाबी मिली है लेकिन जिन लोगों का टीकाकरण नहीं हुआ है उनमें संक्रमण का जोखिम है। इसलिए लोगों से अपील की जा रही है कि वे आगे आकर अपना टीकाकरण पूरा कराएं।
पिछली लहर की तुलना में असर कम
पिछले साल कोरोना की दूसरी लहर में.. 30 अप्रैल 2021 को देश में 3.86 लाख संक्रमित मिले थे। 3059 लोगों की मौत साप्ताहिक हो रही थीं। सक्रिय मरीजों की संख्या भी देश में 31.70 लाख से अधिक थी। वर्तमान लहर में...20 जनवरी 2022 को देश में 3.17 लाख लोग संक्रमित मिले हैं लेकिन साप्ताहिक मृत्यु 380 दर्ज की गई हैं। वहीं सक्रिय मरीजों की संख्या 19.24 लाख है जोकि पिछली लहर की तुलना में कम है।
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कहा कि दिल्ली में 99 फीसदी कोरोना संक्रमित मरीजों में बुखार, कफ और गले में दर्द जैसे लक्षण मिल रहे हैं। अधिकतर रोगी अपने घरों में रहकर औसतन पांचवें दिन ठीक हो रहे हैं। 11 से 18 वर्ष तक की आयु के संक्रमित रोगियों में बुखार सबसे अधिक देखने को मिल रहा है। साथ ही इस आयु वर्ग में कोरोना का वायरस ऊपरी श्वसन तंत्र से नीचे नहीं आ रहा है।







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