











































प्रतीकात्मक
वाशिंगटन। एंटीबायोटिक्स का दुरुपयोग रोकने के लिए सभी प्रमुख चिकित्सक कई वर्षों से चेता रहे हैं, लेकिन दुरुपयोग जारी है, नतीजतन 2019 में 12.7 लाख लोगों की मौत प्रत्यक्ष तौर पर एंटी-माइक्रोबियल रजिस्टेंस (एएमआर) की वजह से हुई। करीब 49.5 लाख लोग भी एएमआर से जुड़ी किसी न किसी वजह से मारे गए। यह खुलासे लैंसेट जर्नल में प्रकाशित नई रिपोर्ट में बृहस्पतिवार को किए गए।
विशेषज्ञों के अनुसार इन दवाओं के बिना सोचे समझे और अत्याधिक उपयोग की वजह से बैक्टीरिया अब ‘सुपर-बग’ में बदल रहे हैं। यह 12.70 मौतें एचआईवी/एड्स या मलेरिया से हो रही मौतों से कहीं अधिक हैं। अध्ययन में शामिल वाशिंगटन विश्वविद्यालय के प्रो. क्रिस मरे के अनुसार माना जा रहा था कि साल 2050 तक एएमआर की वजह से मरने वालों की संख्या एक करोड़ पहुंच जाएगी।
तैयार हो रहीं 43 एंटीबायोटिक भी बेकार : डब्ल्यूएचओ
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पिछले साल ही चेताया था कि इस समय विकसित हो रहीं या हाल में प्रमाणित 43 एंटीबायोटिक्स में इतना दम नहीं रह गया है कि वे एएमआर के मामलों से लड़ सकें। पिट्सबर्ग विवि में प्रोफेसर कॉर्नेलियस क्लेंसी के अनुसार समय आ चुका है कि हम बैक्टीरिया के संक्रमण से लड़ने के नए तरीके तलाशें।
निमोनिया से मौतें भी नहीं रोक पा रहे
रिपोर्ट के अनुसार अब हम निमोनिया जैसे संक्रमणों में भी मौतें नहीं रोक पा रहे हैं। सबसे ज्यादा एएमआर मौतें इसी से हुईं। रक्त और उदर संबंधी संक्रमण भी जानलेवा बन रहे हैं। कोरोना महामारी के दौरान इससे लोगों का ध्यान हटा है, लेकिन हमें एएमआर को लंबे समय तक सहने के लिए तैयार रहना होगा।







हुज़ैफ़ा अबरार June 07 2026 0 1526
हुज़ैफ़ा अबरार June 01 2026 0 1204
हुज़ैफ़ा अबरार June 04 2026 0 987
हुज़ैफ़ा अबरार June 10 2026 0 833
हुज़ैफ़ा अबरार June 12 2026 0 784
हुज़ैफ़ा अबरार January 25 2026 0 4438
एस. के. राणा January 20 2026 0 4312
हुज़ैफ़ा अबरार February 07 2026 0 4284
एस. के. राणा January 13 2026 0 4193
हुज़ैफ़ा अबरार February 05 2026 0 3962
एस. के. राणा February 01 2026 0 3612
एस. के. राणा February 04 2026 0 3521
सौंदर्या राय April 11 2022 0 86623
सौंदर्या राय April 08 2022 0 34441
सौंदर्या राय April 07 2022 0 37642
सौंदर्या राय April 05 2022 0 35217
लेख विभाग March 19 2022 0 34720
सौंदर्या राय March 16 2022 0 72098
मेडिकल सुविधाओं के क्षेत्र में यूपी को देश में नंबर वन बनाना है। वहीं इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रमुख
उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में गड़बड़ियां और लापरवाही के नित नए मामले सामने आ रहे हैं। मृतक डॉक
गुरुवार को अस्पताल की ओपीडी में आधा दर्जन गंभीर मरीज आये। जो व्हील चेयर या चलने में असमर्थ थे। इन्हे
एसीएमओ डा. आरएन सिंह का कहना है कि डेंगू के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। डेंगू मरीजों की संख
इस केंद्र को आयुष मंत्रालय के अंतर्गत स्थापित किया जाएगा। इसके जरिये परंपरागत चिकित्सा पद्धति को वैश
शिविर में डॉक्टर धनंजय वशिष्ठ और डॉ. अनुभव उपाध्याय सहित उनकी टीम ने 175 मरीजों की आंखों की जांच कर
आईएमए-एकेडमी ऑफ मेडिकल स्पेशलिटीज के नेशनल वायस चेयरमैन डॉ सूर्यकान्त ने बताया कि पहली गोल्ड गाईडल
सभी मेडिकल कॉलेजों में अब ओपीडी और आइपीडी सेवाएं पूरी तरीके से संचालित की जाएगी। मरीजों को पहले की त
देश में कोरोना के मामलों में गिरावट अभी भी जारी है। लगातार दूसरे दिन कोरोना के नए मामले 15 हजार से क
केंद्र सरकार ने आज से सभी वयस्कों को मुफ्त एहतियाती खुराक लगाने का फैसला किया है। 15 जुलाई से 'आजादी

COMMENTS