











































प्रतीकात्मक
नई दिल्ली। देश में कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इस खतरे को भांपते हुए सरकार ने 18-59 साल के लोगों को कोविडरोधी टीकों की मुफ्त एहतियाती खुराक (free precaution doses) देने का फैसला किया है।
15 जुलाई से इस विशेष अभियान की शुरूआत होगी। टीकाकरण का यह अभियान 75 दिनों तक चलेगा। इसके तहत सरकारी टीकाकरण केंद्रों पर कोविड वैक्सीन (covid vaccine) की मुफ्त अतिरिक्त खुराक दी जाएगी।
आँकड़े बताते हैं कि देश में 18-59 साल की उम्र के 77 करोड़ लोगों को एहतियाती खुराक दी जाना है। इसमें से अब तक 1 फीसदी से भी कम को एहतियाती खुराक दी गई है। एक आधिकारिक सूत्र ने कहा कि हालांकि, 60 वर्ष और उससे अधिक आयु की अनुमानित 16 करोड़ पात्र आबादी के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवा और अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं में से लगभग 26 फीसदी को बूस्टर खुराक लग चुकी है।
एक अधिकारी ने बताया कि देश के अधिकांश लोगों को करीब नौ महीने पहले कोविड टीकों की दूसरी खुराक लगी है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) और अन्य अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थानों के अध्ययनों में सुझाव दिया गया है कि दोनों खुराक लगने के लगभग छह महीने बाद व्यक्ति के शरीर में एंटीबॉडी का स्तर कम हो जाता है। ऐसे में बूस्टर या एहतियाती खुराक देने से प्रतिरक्षा तंत्र (immunity) मजबूत होता है। इसलिए सरकार ने 75 दिन तक एक विशेष अभियान शुरू करने का फैसला किया है। इसके तहत सरकारी केंद्रों पर 18 से 59 साल के लोगों को निशुल्क एहतियाती खुराक दी जाएगी।
बता दें, पिछले सप्ताह ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोविड टीकों की दूसरी एहतियाती खुराक के बीच के अंतर को 9 माह से घटाकर 6 माह कर दिया है। यानी दूसरी लगवाने के छह माह बाद बूस्टर खुराक ली जा सकती है। यह फैसला टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी परामर्श समूह (NTAGI) की सिफारिश के आधार पर किया गया।
टीकाकरण (vaccination) तेज करने और बूस्टर खुराक को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र सरकार ने 1 जून से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 'हर घर दस्तक अभियान 2.0' के दूसरे दौर की शुरुआत की थी। दो महीने का यह अभियान अभी चल रहा है।सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत की 96 फीसदी आबादी को कोविड वैक्सीन की पहली खुराक दी जा चुकी है जबकि 87 फीसदी लोगों ने दोनों खुराक ले ली है।







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