












































प्रतीकात्मक चित्र
जेनेवा। विकलांगता की अवस्था में जीवन गुज़ार रहे लोगों के लिये उनकी समय से पूर्व मृत्यु होने या फिर उनके बीमार पड़ने का जोखिम, समाज के अन्य वर्गों की तुलना में अधिक होता है। अन्तरराष्ट्रीय विकलांगजन दिवस पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा जारी एक नई रिपोर्ट में उक्त चिंता व्यक्त किया गया है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने शुक्रवार को प्रकाशित ‘Global report on health equity for persons with disabilities’ रिपोर्ट में चिंता जताई है कि व्यवस्थागत और निरन्तर व्याप्त स्वास्थ्य विषमताओं के कारण, अनेक विकलांगजन की समय से पहले ही मौत हो जाती है। विकलांगता के बिना जीवन गुज़ारने वाले लोगों की तुलना में, विकलांगजन की 20 वर्ष पहले तक मौत हो सकती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि विकलांगजन के अनेक ऐसी बीमारियों से पीड़ित होने का भी जोखिम अधिक होता है, जो कि लम्बे समय तक उनको परेशान करती हैं। इनमें दमा (asthma), मानसिक अवसाद (mental depression), मधुमेह (diabetes), मोटापा (obesity), मौखिक बीमारियाँ (oral diseases) समेत अन्य रोग हैं।
यूएन एजेंसी के अनुसार स्वास्थ्य में मौजूदा भिन्नताओं को स्वास्थ्य अवस्था या फिर असमर्थता से नहीं, केवल उन अनुचित, अन्यायपूर्ण कारकों से ही समझाया जा सकता है, जिनकी रोकथाम सम्भव है। ‘अन्तरराष्ट्रीय विकलांगजन दिवस’ (International Day of Persons with Disabilities) से पहले जारी की गई यह रिपोर्ट बताती है कि विश्व भर में, अक्षमताओं के साथ रहने वाले लोगों की संख्या बढ़कर एक अरब 30 करोड़ तक पहुँच गई है।
विकलांगजन का यह विशाल आँकड़ा, उनके लिये समाज के सभी आयामों में पूर्ण व कारगर भागेदारी की अहमियत को रेखांकित करता है। इस क्रम में, स्वास्थ्य सैक्टर में समावेशन, सुलभता और ग़ैर-भेदभाव के सिद्धान्तों का ध्यान रखा जाना होगा.
स्वास्थ्य क्षेत्र में विषमताएँ - Disparities in the health sector
रिपोर्ट में स्वास्थ्य प्रणालियों में अनुचित, अन्यायपूर्ण और विषमता को बढ़ावा देने वाली परिस्थितियों से निपटने के लिये तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक डॉक्टर टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने क्षोभ प्रकट करते हुए कहा, “स्वास्थ्य प्रणालियाँ, विकलांगता का सामना करने वाले लोगों की चुनौतियों को दूर करने के लिये होनी चाहिएँ, उन्हें बढ़ाने के लिये नहीं।” स्वास्थ्य प्रणालियों में विकलांगजन को निम्न प्रकार के रवैयों व बर्ताव का सामना करना पड़ सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार 80 फ़ीसदी विकलांगजन निम्न- और मध्यम-आय वाले देशों में रहते हैं, जहाँ स्वास्थ्य सेवाएँ सीमित हैं, और इस वजह से स्वास्थ्य विषमताओं को दूर कर पाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने ज़ोर देकर कहा है कि स्वास्थ्य सैक्टर में विकलांगजन के समावेशन को बढ़ावा देना किफ़ायती साबित होता है।
संगठन के अनुसार विकलांगता-समावेशी, ग़ैर-संचारी रोग (non-communicable disease) रोकथाम व देखभाल प्रयासों में हर एक डॉलर के निवेश से क़रीब 10 डॉलर तक का लाभ हो सकता है। विकलांगजन को अपने जीवन के लगभग हर पहलू में अक्सर चुनौतियों व मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
लक्षित व व्यापक कार्रवाई - Targeted and comprehensive action
रिपोर्ट में सरकारों के लिये ऐसे 40 उपाय सुझाए गए हैं, जिन्हें स्वास्थ्य सैक्टर (health sector) में बेहतरी लाने के इरादे से लागू किया जा सकता है। यूएन विशेषज्ञों का मानना है कि विकलांगजन के लिये स्वास्थ्य समता (health equity) को सुनिश्चित करने के वृहद लाभ होंगे, और वैश्विक स्वास्थ्य प्राथमिकताओं को तीन तरीक़ों से आगे बढ़ाया जा सकता है।
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार वृद्धजन, ग़ैर-संचारी रोगों के पीड़ितों, प्रवासियों व शरणार्थियों समेत आबादी के वे हिस्से स्वास्थ्य सैक्टर में विकलांगजन के लिए समावेशन उपायों से लाभान्वित हो सकते हैं।







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