












































डॉ. रेखा पाल, दंत चिकित्सक, बलरामपुर अस्पताल, लखनऊ ने हेल्थ जागरण से बातचीत में दाँत से जुडी समस्याओं पर चर्चा की। प्रस्तुत है बातचीत का विवरण।
रंजीव ठाकुर- क्या कारण है कि दातुन करने वाली जनसंख्या में टूथपेस्ट करने वाली जनसंख्या की अपेक्षा दांतों के सड़न के मामले कम होते हैं?
डॉ रेखा पाल- ऐसा नहीं है। दातुन और टूथपेस्ट करने वाले दोनों तरह के लोगों में दाँतों की समस्याएँ हैं। गांव के लोग जल्दी इलाज के लिए आ नहीं पातें है और शहर के लोग समय से दाँतों की समस्याओं का इलाज करा लेते है। गांव के लोग भी अगर सही समय पर क्लिनिक में पहुँच जातें हैं तो इलाज सही मिलेगा। जहाँ तक बात है टूथपेस्ट का यह डेंटल अब्रेजन को रोकता है जिससे दाँत काम घिसटें हैं। शहर के लोगों में गाँव की अपेक्षा दांतों को लेकर ज्यादा जागरूकता है।
रंजीव ठाकुर- ब्राजील और बोलीविया जैसे देशों में डेंटल चिकित्सकों की बहुत प्रतिष्ठा है लेकिन भारत में वो मुकाम नहीं मिल पाया है क्या वजह हो सकती है ?
डॉ रेखा पाल- हमारे देश की आबादी बहुत ज़्यादा है। रोग के हिसाब से इनकम कम होती है। हर व्यक्ति बेसिक ट्रीटमेंट तो ले सकता है लेकिन दांतों के सम्बन्ध में सौंदर्यबोध की कमी है और उस प्रकार के क्लिनिक भी कम हैं। बड़े शहरों जैसे दिल्ली और मुंबई में दांतों के सम्बन्ध में सौंदर्यबोध है, ट्रीटमेंटअच्छे होते हैं। छोटे शहरों में ऐसा नहीं है।
रंजीव ठाकुर- सौंदर्य में निखार लाने और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में इसका बहुत बड़ा योगदान हो सकता है। भारत में शुरू तो हुआ है लेकिन अभी रफ़्तार नहीं पकड़ पा रहा है?
डॉ रेखा पाल- देखिये फिल्म इंडस्ट्री और ब्यूटी इंडस्ट्री में डेंटल और कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट हो रहे हैं लेकिन ये अभी आम आदमी तक नहीं पहुंचे हैं, क्योकि लोग अभी इसकी ज़रुरत महसूस नहीं करतें हैं। उनकी बेसिक ज़रूरतें अभी दूसरी हैं। दांतों की सुंदरता के लिए वो अभी इतना नहीं खर्च कर सकतें है जितना और जगह कर लेतें है।
रंजीव ठाकुर- दातों को स्वास्थ्य रखने के लिए आम आदमी को क्या क्या करना चाहिए ?
डॉ रेखा पाल- दाँतों की स्वच्छता बनाये रखना चाहिए। दोनों टाइम ब्रश करना चाहिए और उसके बाद गुनगुने पानी से कुल्ला करने से दांतों की समस्या नहीं होगी।







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