












































स्वंय सहायता समूहों की महिलाओं को सम्मानित करतीं, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल
गोरखपुर। वर्ष 2025 तक पूरे देश को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य भारत के प्रधानमंत्री द्वारा निर्धारित किया गया है। टीबी ग्रसित मरीजों को चिन्हित कर उनका इलाज किया जा रहा है। उक्त बातें राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहीं। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी कम से कम एक-एक टीबी ग्रसित बच्चों को गोद लें और इस कार्य से स्वंय सेवी संस्थाएं भी जुड़े। यूनिवर्सिटी एवं कालेज भी ऐसे बच्चों को गोद लेंगे।
राज्यपाल ने कहा कि स्वंय सहायता समूह से महिलाओं को मान, सम्मान, गौरव प्राप्त हुआ है। देश के विकास में महिलाओं की शक्ति को जोड़ना होगा। उन्होंने कहा कि महिलाएं अपने स्वास्थ्य पर ध्यान दें। किशाोरियों, बेटियों, युवाओं के हित में अनेक योजनाएं शासन द्वारा संचालित की गयी है, इसके व्यापक प्रचार प्रसार के साथ ही इसका लाभ पात्र लाभार्थी को मिले। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने आज गोरखपुर के सर्किट हाउस में स्वंय सहायता समूहों, क्षय रोग ग्रसित बच्चों एवं किसान उत्पादक संगठन, प्रगतिशील किसानों के साथ बैठक की तथा स्वंय सहायता समूह की 11 समूहों से वार्ता की। समूह की महिलाओं द्वारा बताया गया कि समूह से जुड़कर उनका आर्थिक उन्नयन हुआ तथा परिवार में खुशहाली का माहौल है।
इस मौके पर राज्यपाल ने स्वंय सहायता समूहों को 7 करोड़ 33 लाख 10 हजार रूपये का डेमो चेक, जिसमें 1074 समूहों का रिवॉल्विंग फन्ड तथा 520 समूहों को एक लाख 10 हजार सम्मिलित है तथा सामुदायिक शौचालय के तहत 2 महिलाओं को चाभी एवं सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत कोटे की एक दुकान चयन का नियुक्ति पत्र प्रदान किया। इस मौके पर 11 स्वंय सेवी संस्थाओं द्वारा स्टाल लगाये गये थे, जिसका राज्यपाल ने विधिवत अवलोकन किया।
उन्होंने ने कहा कि स्वंय सहायता समूहों की महिलाओं की बातों को सुनकर अपार खुशी हुई है, 10 साल पहले महिलाओं की स्थिति और आज की स्थिति में बेहतर सुधार हुआ है। स्वंय सहायता के अन्दर महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है और आज वे इससे जुड़कर उनका आर्थिक उन्नयन हुआ है। उन्होंने कहा कि समूह की महिलाओं को आगे आकर टीबी ग्रसित बच्चों एवं मरीजों के परिवार को प्रेरित करें कि, अच्छे खान पान से मरीज ठीक हो जायेगा, गांव में ऐसे मरीजों की जानकारी समूह को करनी चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा जीवन उत्थान का बड़ा माध्यम होता है, समूह की महिलाओं से कहा कि वे संकल्प लें कि बेटा-बेटी में कोई भेद भाव नही है, दोनो एक समान है, ऐसे भाव के साथ अपने बच्चों को खूब पढ़ायें। उन्होंने कहा कि बच्चियों का सशक्त होना जरूरी है तथा उनका ब्लड टैस्ट कराया जाये और यह सुनिश्चित हो कि हीमोग्लोबीन 13 से 16 प्रतिशत से कम नही होना चाहिए, कुपोषण से बच्चियों के जीवन को बचाने के लिए बाल विवाह कदापि न करें, 18 साल से कम उम्र की बच्चियों की शादी करने पर सजा का भी प्राविधान है। उन्होंने यह संकल्प लिया जाये कि बाल विवाह एवं दहेज प्रथा की परिपाटी को पनपने नहीं दिया जायेगा, महिलाएं जब तक चुप रहेगी तब तक यह कुप्रथा दूर नही हो सकती है। समाज में कुप्रथा को दूर करने के लिए महिलाओं को आगे आना होगा। स्वच्छ, स्वस्थ्य एवं शांत समाज की स्थापना की जाये।







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