











































प्रतीकात्मक चित्र, एकेटीयू
लखनऊ। बरेली में मलेरिया के सबसे खतरनाक पैरासाइट से पहली मौत हो गई है। पूरे प्रदेश में इस समय बारिश के कारण बुखार और मच्छरजनित बीमारियों का भयंकर प्रकोप है। इसी बीच डॉ एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय से मलेरिया की जाँच को लेकर अच्छी खबर आई है।
एकेटीयू (AKTU) के साइंटिस्ट्स (Scientists) ने मशीन लर्निंग और आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस (artificial intelligence) के इस्तेमाल से मलेरिया की जांच को आसान बना दिया है और अब बिना डॉक्टर या पैथालाजिस्ट के यह जाँच हो सकेगी वो भी केवल दो से तीन सेकंड में साथ ही लागत भी कम आएगी। एकेटीयू के सेंटर फार एडवांस रिसर्च के साइंटिस्ट प्रो एम के दत्ता और उनकी टीम ने यह शोध किया है।
डॉ एमके दत्ता ने बताया कि एआई फ्रेमवर्क में थिन ब्लड स्मीयर माइक्रोस्कोपिक इमेज और वाइवेक्स लाइफ साइकिल (vivax life cycle) के जरिए मलेरिया (malaria diagnosis) की पुष्टि किए जाने में सफलता हासिल हुई है।
एकेटीयू के कुलपति प्रो पीके मिश्र (Prof PK Mishra) ने शोध पर बधाई देते हुए कहा कि हम लोग शोध और नवाचार पर फोकस कर रहे है। सेंटर फार एडवांस स्टडीज (Center for Advanced Studies) को इस दिशा में बेहतर काम करने के लिए कहा गया था और इसी का परिणाम है यह शोध। यह शोध हर लिहाज से परिवर्तन कारी और क्रांतिकारी साबित होगा।
डॉ दत्ता ने बताया कि मलेरिया के लिए होने वाली सामान्य जांच के लिए मरीज के ब्लड सैंपल (blood sample) से स्लाइड तैयार किया जाता है। स्लाइड तैयार होने के बाद उसे माइक्रो स्कोप पर रखा जाता है। पैथालाजिस्ट (pathologist) स्लाइड को रंगते हैं। इसके बाद पैथालाजिस्ट विश्लेषण करके देखता है कि स्लाइड में मलेरिया के कीटाणु (malaria germs) हैं या नहीं। इसके बाद स्लाइड की इमेज तैयार की जाती है। इस प्रक्रिया में काफी समय लगता है। अब यही काम मशीन द्वारा किया जाएगा।
डॉ दत्ता ने कहा कि शोध (health research) के दौरान इस आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस माडल (artificial intelligence model) के परीक्षण के लिए 2329 लोगों का सैंपल लिया गया था। अभी मलेरिया की जांच में लगभग 250 से 300 रुपये खर्च आता है, मगर इस प्रयोग के बाद कीमत बेहद कम होगी और करीब 100 रुपये से भी कम में मलेरिया की जाँच हो जाएगी।







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