











































प्रतीकात्मक चित्र
लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के ट्रामा सेंटर में कंप्रिहेंसिव लेक्टेशन मैनेजमेंट सेंटर से जरूरतमंद नवजात शिशुओं को माताओं द्वारा दान किया गया दूध मिल रहा है।
केजीएमयू (kgmu) में वर्ष 2019 में ट्रामा सेंटर (Trauma Center) की बिल्डिंग में कंप्रिहेंसिव लेक्टेशन मैनेजमेंट सेंटर (Comprehensive Lactation Management Center) की स्थापना की गई थी। इस सेंटर से जरूरतमंद नवजात शिशुओं को माँ का दूध (milk donated by mothers) मिल रहा है।
केजीएमयू में जन्में या रेफर होकर आये भर्ती बच्चों को यह सुविधा मिल रही है। यहाँ इस बात का खास ध्यान में रखा जाता है कि दूध दान करने वाली धात्री महिला (lactating woman donating milk) और डोनर मिल्क (donor milk) लेने वाले बच्चे के परिवार की सहमति हो।

इसे धात्री अमृत कलश (Dhatri Amrit Kalash) का नाम दिया गया है। यहां पर प्रसूता अपने स्तन का एक्स्ट्रा दूध दान (extra breast milk) कर सकती हैं। एनआईसीयू में भर्ती गंभीर और कम वजन वाले बच्चों को यह दूध दिया जा सकता है।
नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (NICU) में भर्ती नवजात बच्चों को इस सेंटर से निशुल्क डोनर मिल्क दिया जा रहा है। इस सुविधा से वे नवजात लाभान्वित हो रहे हैं जिनकी माँ कहीं और भर्ती है या अन्य किसी कारण से उनको माँ का दूध नहीं मिल पा रहा है।
लेक्टेशन काउंसलर (Lactation counselors), केजीएमयू में भर्ती हर नवजात को पैदा होने के एक घंटे के अंदर मां का दूध पिलाने का प्रयास करते हैं, कंगारू मदर केयर (Kangaroo Mother Care) (KMC) का प्रशिक्षण और स्तनपान (breastfeeding) के सही तरीके पर मां की काउंसिल करते हैं। माँ का दूध मिलने पर नवजात की मृत्यु होने की आशंका 22 प्रतिशत तक घट जाती है।
कंप्रिहेंसिव लेक्टेशन मैनेजमेंट सेंटर में दान किए गए दूध को पाश्चराइज (pasteurized) करके माइनस 20 डिग्री पर तीन से छह माह तक सहेजा जाता है।
दान किए गए दूध की होती है पूरी जाँच
दूध को जमा करने से पहले मां की वीडीआरएल (VDRL), एचआइवी (HIV) और हेपेटाइटिस बी (Hepatitis B) की जांच की जाती है। यह भी जांचा जाता है कि महिला एंटीकैंसर दवाएं (anticancer medicines) आदि न खा रही हो। धूमपान या शराब का सेवन करने वाली महिलाओं द्वारा दूधदान नहीं लिया जाता है। इसके अलावा दूध को भी नवजात को देने से पहले माइक्रोबियल कल्चर (microbial culture) भी किया जाता है। बैक्टीरियल काउंट (bacterial count) शून्य पाए जाने पर ही नवजात को डोनर मिल्क दिया जाता है।







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