











































लखनऊ। 9 साल का तेजस सिंह हेपेटाइटिस ए वायरस के कारण एक्यूट लिवर फेलियर से पीड़ित था। उसे मेदांता अस्पताल में रेफर कर दिया गया। मेदांता में आने के 12 घंटे के अंदर डोनर और मरीज की जांचें की गईं और उसके बाद प्रत्यारोपण का कार्य शुरू किया गया और डोनर का 40 प्रतिशत बायां लिवर लोब लिया गया। जिसके 2 सप्ताह बाद बच्चे हालत में सुधार होने पर उसे छुट्टी दे दी गई। आज दो महीने बाद वो बिल्कुल स्वस्थ है और एक सामान्य लड़के की तरह जीवन जी रहा है।
डॉ. ए.एस. सोइन (Dr. A.S. Soin) ने कहा पीडियाट्रिक लिवर ट्रांसप्लांट (pediatric liver transplant) बहुत चुनौतीपूर्ण है। बच्चों के धमनी, पोर्टल वेन और पित्त नलिकाओं के छोटे होने के कारण यह तकनीकी रूप से कठिन है। 450 से अधिक पीडियाट्रिक लिवर ट्रांसप्लांट के हमारे अनुभव और भारत की सबसे बड़ी श्रृंखला में से एक मेदांता अस्पताल लखनऊ (Medanta Superspeciality Hospital) में यह सुविधा प्रदान करके खुश हैं।
इस केस में तेजस की मां डोनर थीं और उन्होंने अपने लिवर का बायां हिस्सा दान कर दिया जो लगभग 40 प्रतिशत था। सर्जरी के दौरान तेजस के रोगग्रस्त लीवर को हटा दिया गया और उसकी मां के लीवर का एक हिस्सा उसमें प्रत्यारोपित कर दिया गया।

कंसल्टेंट हेपेटोबिलरी और लिवर ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. रोहन चौधरी ने कहा, तेजस का केस बेहद जटिल था क्योंकि लिवर ट्रांसप्लांट का समय बहुत महत्वपूर्ण था और सर्जरी में किसी भी तरह की देरी होने से उसके परिणाम काफी बुरे हो सकते थे।
26 अप्रैल 2022 को बच्चे को पीलिया (jaundice), हेपेटिक एन्सेफैलोपैथी (hepatic encephalopathy) और हाई आईएनआर (high INR) के साथ अस्पताल में लाया गया था। एक्यूट लिवर फेलियर होने की वजह से मरीज में सेरेब्रल एडिमा (swelling in the brain) भी बढ़ रही थी। उसकी हालत बिगड़ती जा रही थी और अगर ट्रांसप्लांट नहीं किया गया होता तो वह कोमा में चला जाता।
बच्चों में एचएवी संक्रमण आम बात है लेकिन उनमें से लगभग 2 प्रतिशत एक्यूट लिवर फेलियर (acute liver failure) केस में प्रोग्रेस होती है। हालांकि कुछ एक्यूट लिवर फेलियर ठीक हो जाते हैं, जबकि अन्य को लिवर प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती है अन्यथा मरीज की मृत्यु हो जाती है। इस केस में तेजस को एएलएफ हुआ था और वह एएलएफ के किंग कॉलेज के मानदंडों को पूरा करता था, जिससे कारण उसे तत्काल लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत थी।’
डॉ. रोहन चौधरी ने आगे कहा, 'ऑपरेशन के बाद तेजस के इम्यूनिटी सिस्टम को कमजोर करने के लिए इम्यूनोसप्रेसेन्ट दवाएं दी गईं ताकि उसका शरीर उसके अंदर अपनी मां के लिवर को रिजेक्ट न करे। हालांकि इम्युनिटी सिस्टम कमजोर होने के कारण संक्रमण का खतरा हमेशा बना रहता है। इसलिए कुछ सावधानियां बरतना जरूरी है जैसे कि उसे 1 साल तक कच्ची सब्जियां या बाहर का खाना खाने की अनुमति नहीं है, धूल में नहीं खेलना है और भीड़ भाड़ वाली जगहों से दूर रहना है व हमेशा मास्क पहनना है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि सब कुछ ठीक है, हम नियमित रूप से तेजस के लिवर फंक्शन टेस्ट की भी समीक्षा कर रहे हैं।'







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