











































लखनऊ। भारत सरकार द्वारा चलाई जा रही आयुष्मान योजना का लाभ मरीजों को मिल रहा है लेकिन इसके लिए पैसे आने का इंतजार करना पड़ता है जो कभी कभी बहुत महंगा भी साबित हो जाता है। राजधानी के एसजीपीजीआई में वर्चुअल ट्रांसफर से इस इंतजार को समाप्त कर दिया गया है।
संजय गांधी परास्नातक आयुर्विज्ञान संस्थान (Sanjay Gandhi Postgraduate Institute of Medical Sciences) में आयुष्मान भारत योजना (Ayushman Bharat Scheme) के प्रभारी प्रोफेसर राजेश हर्षवर्धन ने वर्चुअल मनी ट्रांसफर माडल विकसित किया है जिसके लिए लगातार दूसरी बार उन्हें आयुष्मान योजना की तरफ से सम्मानित किया गया है। उनके इस माडल से एसजीपीजीआई (SGPGI) ने 6400 मरीजों को आयुष्मान योजना का लाभ दिलवाया है।
प्रो. राजेश हर्षवर्धन (Professor Rajesh Harsh Vardhan) बताते हैं कि आयुष्मान भारत योजना में गोल्डन कार्डधारकों के भर्ती होने पर सम्बन्धित डॉक्टर से इलाज का एस्टीमेट मिलने पर लगभग 24 घंटे के अंदर पैसे मरीज के एकाउंट में वर्चुअली ट्रांसफर (virtual money transfer model) कर दिए जाते हैं। एसजीपीजीआई के प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना ब्लाक में आयुष्मान सेवा केन्द्र 24 घंटे संचालित किया जाता है।
प्रोफेसर राजेश हर्षवर्धन को आयुष्मान भारत की सीईओ संगीत सिंह (Sangeet Singh, CEO, Ayushman Bharat) ने सम्मानित किया। प्रो राजेश के अनुसार आयुष्मान योजना का लाभ बिना रुकावट मरीजों को दिलाने के लिए इस माडल को अपनाया गया है। इसके लिए भर्ती होने से पहले आयुष्मान सेवा केन्द्र पर अपना गोल्डन कार्ड (Ayushman Bharat Golden Card) दिखाएं और फिर मिले हुए फार्म को ठीक से भर कर जमा करवा दें, जिसमें डॉक्टर का एस्टीमेट, बीमारी, इलाज का पूरा ब्यौरा इत्यादि दर्ज किया जाता है।
आयुष्मान सेवा केन्द्र (Ayushman Bharat Scheme office) फार्म मिलते ही इसे आयुष्मान भारत योजना कार्यालय को भेज देता है जहां से संस्तुति मिलते ही पैसा मरीज के एकाउंट में ट्रांसफर हो जाता है। इस प्रक्रिया में लगभग 24 घंटे ही लगते हैं।







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