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शहीद पथ स्थित लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के स्त्री रोग विभाग में अत्याधुनिक चिकित्सिकीय सुविधाएं शुरू

प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की विभागाध्यक्ष, डॉ स्मृति अग्रवाल ने कहा कि अब से डॉ राम मनोहर लोहिया अस्पताल में आने वाली गर्भवती महिलाओं को प्रीनेटल जांचो, आनुवंशिक परामर्श और भ्रूण परीक्षण जैसी सुविधाओं के लिए अन्य केंद्रों पर नहीं जाना होगा।

रंजीव ठाकुर
May 07 2022 Updated: May 07 2022 16:05
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शहीद पथ स्थित लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के स्त्री रोग विभाग में अत्याधुनिक चिकित्सिकीय सुविधाएं शुरू प्रतीकात्मक चित्र

लखनऊ। डॉ राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के राम प्रकाश गुप्ता मेमोररयल मदर एंड चाइल्ड स्टेट रेफरल हॉस्पिटल, शहीद पथ में प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में प्रसव-पूर्व परीक्षण की सुविधा शुरू हो गई है। विभाग ने गर्भवती माताओं के लिए प्रीनेटल जांचे शुरू कर दी है, जिसमें गर्भस्थ महिलाओ का अल्ट्रासाउंड, कोरियोनिक विलस सैंपलिंग और एमनियोसेंटेसिस आते हैं। 

एमनियोसेंटेसिस एक अल्ट्रासाउंड-निर्देशित प्रक्रिया है जिसमें सुई की मदद से भ्रण के चारों ओर से कुछ एमनियोटिक द्रव निकाला जाता है और उसमे गुणसूत्रों की एवं आणविक जांच की जाती है। इस जांच में डाउन सिंड्रोम के अलावा अन्य गुणसूत्रों की खराबी और आणविक आनुवंशिक कारणों का भी पता चल सकता है।

प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग ने आनुवंशिक परामर्श और भ्रूण की ऑटोप्सी की सुविधा भी शुरू कर दी है। अगर गर्भवती महिला की उम्र 35 वर्ष से अधिक है, अथवा गर्भावस्था में डबल या क्वाड्रपल मार्कर अथवा कुछ जांचे पॉजिटिव आयी हो तो ये जांचे करानी चाहिए। 

यदि गर्भस्थ शिशु में अल्ट्रासाउंड के दौरान कोई विकृति पाई गयी है अथवा परिवार में कोई अन्य अनुवांशिक बीमारी है (जैसे की थैलसीमिआ, हिमोफिलिआ, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी) अथवा परिवार में किसी बच्चे में जन्मजात विकृति पायी गयी है अथवा पति-पत्नी में से एक या दोनों किसी अनुवांशिक बीमारी से ग्रसित है या वाहक है, तो यह जांचे कराई जा सकती है एवं गर्भस्थ शिशु में बीमारी का पता लगाया जा सकता है। इन जांचो के माध्यम से परिवार में शारीरिक और मानसिक विकलांग बच्चे के जन्म को रोका जा सकता है। साथ ही परिवार में आगे होने वाले बच्चो में इस प्रकार की बीमारी की पुनरावृति दर का भी पता लगया जा सकता है। 

विभाग उन दंपत्तियों को अनुवांशिक परामर्श भी प्रदान करता है जिन्हें पिछले गर्भावस्था में प्रतिकूल परिणाम मिला है। विभाग में भ्रूण के ऑटोप्सी की सुविधा भी शुरू कर दी गई है। फीटल ऑटोप्सी उन सभी भ्रूणों में की जानी चाहिए जो या तो जन्मजात विकारो के साथ पैदा हुए है या बिना किसी स्पष्ट कारण के गर्भ में या प्रसव के समय ख़त्म हो गए है।

डॉ नेहा अग्रवाल (सहायक आचार्या, रिप्रोडस्टिव मेडिसिन) ने बुधवार को गर्भवती महिला का एमनियोसेंटेसिस सफलतापूर्वक किया। प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की विभागाध्यक्ष, डॉ स्मृति अग्रवाल ने कहा कि अब से डॉ राम मनोहर लोहिया अस्पताल में आने वाली गर्भवती महिलाओं को प्रीनेटल जांचो, आनुवंशिक परामर्श और भ्रूण परीक्षण जैसी सुविधाओं के लिए अन्य केंद्रों पर नहीं जाना होगा।

इससे पहले इन सुविधाओं का लाभ केवल संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में ही प्राप्त किया जा सकता था। इन परीक्षणों के संबंध में अतिरिक्त जानकारी और परामर्श, सोमवार से शनिवार, राम प्रकाश गुप्ता मेमोरियल मदर एंड चाइल्ड स्टेट रेफरल अस्पताल में रिप्रोडस्पिव मेडिसिन, ओपीडी कक्ष संख्या 11 से प्राप्त किया जा सकता है।

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