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लखनऊ। टीबी आन्दोलन को मजबूत करने के लिए जनपद के एक निजी होटल में चार दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिला क्षयरोग अधिकारी डॉ. कैलाश बाबू की अध्यक्षता में स्वास्थ्य विभाग व वर्ड विज़न के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में टीबी को वर्ष 2025 तक खत्म करने के लिए क्या कदम उठाने चाहिए इस पर विस्तार से चर्चा हुई। कार्यशाला का संचालन वर्ड विज़न संस्था के मुक्ता शर्मा ने किया।

जिला क्षय रोग अधिकारी ने बताया कि ट्यूबरक्लोसिस संक्रमित व्यक्ति के खाँसने छींकने से निकलने वाली बूंदों के संपर्क में आकर जाने-अनजाने अन्य लोग भी संक्रमित होते हैं। इसका उपचार हो सकता है अगर इसकी जांच और इलाज जल्दी शुरू किया जाए। टीबी की दवा का नियमित सेवन बहुत जरूरी है क्योंकि दवा बीच में ही छोड़ देने से टीबी गंभीर रूप ले सकता है और यह एमडीआर और एक्सडीआर टीबी में परिवर्तित हो सकता है, इसलिए इसका पूरा इलाज जरूर करें । उन्होंने बताया कि ऐसे तो 40 प्रतिशत आबादी में टीबी के वैक्टीरिया होते हैं, लेकिन सही खान पान और पोषण से वह बीमारी के रूप में परिवर्तित नहीं हो पाते।
कार्यक्रम का संचालन कर रही मुक्ता शर्मा ने बताया कि कार्यशाला के माध्यम से टीबी उन्मूलन में कार्य कर रहे कर्मियों को व्यवस्थित ढंग से कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया गया साथ ही प्राइवेट संस्थानों को टीबी उन्मूलन में भाग बनाने के लिए उनकी अभिमुखिकारण किया गया। उन्होंने बताया कि जो लोग टीबी से सही हो चुके हैं उनको टीबी चैंपियन के रूप में आगे लाकर उनके माध्यम से अन्य टीबी ग्रसित को इलाज के प्रति प्रोत्साहित किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इस तरह का प्रयास वर्ड विज़न के द्वारा राज्य के 15 जनपदों में किया जा रहा है।

कार्यशाला में प्रतिभाग लेने वाली टीबी चैंपियन शिल्पा सिंह ने बताया कि वह पिछले साल ही टीबी से ग्रसित हुई थी। पिता की मृत्यु के बाद खुद पर ध्यान न देकर वह इस हालत में आ गई थी। लेकिन उन्हें पता था कि टीबी का पूरा इलाज लेना बहुत जरूरी हैं। टीबी का पूरा कोर्स करके वह आज पूरी तरह सही हैं साथ ही वह अन्य लोगों को इलाज न छोड़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
कार्यशाला में सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर ए के मित्रा, प्राइवेट पार्टनर मिक्स मैनेजर राम वर्मा, शौमित मिश्रा, डॉ. राघिनी रंगनाथन, संजय कुमार, रोकी कुमार, विपिन कुमार, शशांक, सतीश, तीर्थ नंदी आदि विशेषज्ञों ने संबोधित किया।







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