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कानपुर (लखनऊ ब्यूरो)। कानपुर के जीएसवीएम में स्पीच थेरेपी सेंटर बंद हो गया। इसे डॉ. एके पुरवार चला रहे थे लेकिन दो महीने पहले वह रिटायर हो गए। जिससे सेंटर बंद करना पड़ा। उनकी जगह अब तक किसी की नियुक्ति तक नहीं हुई। इस कारण हकलाने वाले बच्चों को बिना इलाज के ही लौटना पड़ रहा है।
जीएसवीएएम (GSVM) मेडिकल कॉलेज में 1982 में स्पीच थेरेपी सेंटर खोला गया था। 40 साल से ये संस्था हकलाने वाले बच्चों का इलाज (treatment) करता आ रहा था। इसे डॉ. एके पुरवार चलाते थे लेकिन दो महीने वो रिटायर (retire) हो गए। डॉ. पुरवार ने 40 साल में करीब 50 हजार बच्चों की हकलाहट को दूर किया।
डॉ. पुरवार के मुताबिक बच्चों काी हकलाहट माता-पिता के लिए तनाव (stress) देती है। क्योंकि माता-पिता (parents) को बच्चों की भविष्य की चिंता सताती है। लेकिन स्पीच थेरेपी (therapy) के जरिए इसे ठीक किया जा सकता है। डॉ. पुरवार के मुताबिक हकलाहट को लेकर कई मिथ हैं लेकिन सच्चाई यह है किन जीभ-जुड़ना, कड़वा या मीठा खिलाने से नहीं बल्कि स्पीच (speech) थेरेपी के जरिए ही हकलाहट को दूर किया जा सकता है।
डॉ. मनीष सिंह के मुताबिक बाएं हाथ से काम करने वालों के दिमाग का दायां हिस्सा और दाएं हाथ से काम करने वालों का बायां (left) हिस्सा अधिक सक्रिय होता है। संयोजिका तंत्र मस्तिष्क के दाएं और बाएं सेरेब्रल को जोड़ने का काम करता है और जो लोग हकलाते हैं उनमें संयोजिका तंत्र कमजोर होता है। समय से इलाज कराने पर इसे बिमारी (disease) को ठीक किया जा सकता है।







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