











































लखनऊ। डॉ ए के सिंह, निर्देशक और विभागाध्यक्ष पल्मोनरी मेडिसिन, चंदन अस्पताल लखनऊ ने कहा अस्थमा के मरीजों को सही इलाज कराना चाहिए। अगर आपको एलर्जी है, इलाज नहीं मिलता सांस की नली मेें सूजन है, या सांस लेने की नली इंफेक्श्न से सिकुड गयी तो खास ख्याल रखना चाहिए। सीओपीडी का सबसे सही इलाज इन्हेलर है इससे दवा सिर्फ आपके फेफडों में जाती है और मुहं में जो दवा का इफेक्ट होता है उसे आप कुल्लाकर के कम कर सकते है। इन्हेलर का इफेक्ट सही होता है, इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है।

डा. एके सिंह ने बताया भारत विकासशील देश है यहां पर निर्माण कार्य होने और धूल, धुए आदि से फेफडे (lungs) प्रभावित होते है। इसके लिये यह जरुरी है कि आप ऐसे स्थानों पर न जाये जहां प्रदूषण का स्तर अधिक हो ऐसे मरीज जिन्हें फेफडे की बीमारी या सांस फूलना एजली आदि हो तो ऐसे लोग घर में एयर प्यूरीफायर (air purifiers) लगा सकते है मास्क पहन ले धूए-धूल और ध्रुमपान से बचे। योग (yoga) करें खान पान का ख्याल रखें और ऐसे मरीज इस समय जब वातावरण में प्रदूषण अधिक है तो सुबह की सैर करने से बचे।
डा. एके सिंह ने कहा लंग इन्फेक्शन टेस्ट (lung infection test) खासकर स्पाईरोमीट्री टेस्ट (spirometry test) करने से सीओपीडी (COPD) के निदान में होने वाले विलंब से बचा जा सकता है, बीमारी का समय पर प्रबंधन कर इसे गंभीर बनने से रोका जा सकता है। इसलिए जिन क्षेत्रों और आबादी में सांस की बीमारियां जैसे सीओपीडी होने की ज्यादा संभावना हो और जो लगातार सांस की समस्याओं का अनुभव कर रहे हों, उन्हें स्पाईरोमीट्री टेस्ट से काफी मदद मिल सकती है। सांस की बीमारियों (respiratory diseases) के लक्षण किसी के भी नियंत्रण में नहीं होते, लेकिन सतर्क व जागरुक बने रहकर समय पर निदान व पहचान किया जाना जरूरी है।
इनोवेशन द्वारा ऐसी डिवाईसेज़ प्रस्तुत करने की दिशा में काफी प्रगति हुई है, जो पोर्टेबिलिटी और वायरलेस फंक्शन डिजीज़ के साथ स्पाईरोमीटर (spirometer) को देश के हर व्यक्ति के लिए किफायती बना सकें। स्पाईरोमीटर डिवाईसेज़ में इनोवेशन और इसकी उपलब्धता के बारे में डॉ जयदीप गोगटे ग्लोबल चीफ मेडिकल ऑफिसर सिप्ला (Global Chief Medical Officer, Cipla) ने कहा स्पाईरोमीटर सीओपीडी के शुरुआती और सटीक निदान में उपयोगी साबित हुए हैं। स्पाईरोमीटर्स की उपलब्धता में होने वाली कमी को पूरा करने के लिए सिप्ला ने भारत का पहला न्यूमोटैक आधारित पोर्टेबल वायरलेस स्पाईरोमीटर । स्पाईरोफाई प्रस्तुत किया है, जिसने पूरे देश में सटीक स्पाईरोमीट्री की उपलब्धता काफी अधिक बढ़ा दी है। स्पाईरोफाई (Spirofy) का परीक्षण मरीजों में किया गया है, और यह 97 प्रतिशत सेंसिटिविटी3 के साथ सीओपीडी के निदान में गोल्ड स्टैंडर्ड स्पाईरोमीटर के बराबर सटीक पाया गया है।







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