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लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर से बचाने के लिए चलाएगा व्यापक टीकाकरण अभियान

बेटियां भविष्य की जननी होती हैं। उन्हें सामाजिक कुरीतियों के साथ-साथ सर्वाइकल कैंसर जैसी प्राणघातक जानलेवा बीमारियों से भी बचाना समाज की प्राथमिकता होनी चाहिए। इस दिशा में सरकार प्रतिबद्ध है। लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान इस चुनौती का सामना चिकित्सकीय संसाधनों से करेगा ।

रंजीव ठाकुर
May 10 2022 Updated: May 10 2022 16:30
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लखनऊ। राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में सर्वाइकल कैंसर और एच.पी.वी. टीकाकरण पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में स्त्रियों में होने वाले प्राणघातक सर्वाइकल कैंसर से बचाव व रोकथाम हेतु एवं एच०पी०वी० (Human Papilloma) वैक्सीन टीकाकरण पर बल दिया गया।

ह्यूमन पैपिलोमा वायरस के खिलाफ टीकाकरण कार्यक्रम में प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और उपमुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश बृजेश पाठक उपस्थित रहें। अतिथियों ने सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम हेतु टीकाकरण कार्यक्रम के इस अभियान को पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की। संस्थान की निदेशक प्रोफेसर (डॉ) सोनिया नित्यानंद ने जानलेवा सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम हेतु टीकाकरण के इस कार्यक्रम को मील का पत्थर बताया ।

बेटियां भविष्य की जननी होती हैं। उन्हें सामाजिक कुरीतियों के साथ-साथ सर्वाइकल कैंसर जैसी प्राणघातक जानलेवा बीमारियों से भी बचाना समाज की प्राथमिकता होनी चाहिए। इस दिशा में सरकार प्रतिबद्ध है। लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान इस चुनौती का सामना चिकित्सकीय संसाधनों से करेगा ।

आज विज्ञान और मेडिकल टेक्नोलॉजी इतनी विकसित हो गई है कि कई जगह के कैंसर पर भी चिकित्सा विज्ञान से नियंत्रण किया जा रहा है। सर्वाइकल कैंसर (Cervical cancer) जो कि स्त्रियों में स्तन कैंसर (breast cancer) के बाद दूसरी सबसे प्राणघातक बीमारी है और जिससे कई स्त्रियां मृत्यु को प्राप्त हो जाती थी, उसके मुख्य कारणों में आज विकसित मेडिकल विज्ञान टेक्नोलॉजी से यह पता चल गया है की इस कैंसर का मुख्य कारण ह्यूमन पैपिलोमा वायरस  HUMAN PAPILLOMA VIRUS (HPV) नामक एक विषाणु के संक्रमण से होता है। यह टीका (वैक्सीन) बच्चियों और युवतियों में इसी विषाणु के विरुद्ध प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करता है। किशोरावस्था में लगाया गया यह टीका आगे जाकर सर्वाइकल कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से मुक्त रख सकता है।

कार्यक्रम की संयोजक एवं स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की वरिष्ठ संकाय सदस्य डॉक्टर नीतू सिंह ने चौका देने वाले कुछ जीवंत आंकड़े प्रस्तुत किये:-   

  • वर्ष 2020 में विश्व में अभिलेखित सर्वाइकल कैंसर ग्रसित रोगियों की कुल संख्या: 1,23,907; अनुमानित मृत्यु संख्या- 77, 348
  • सर्वाइकल कैंसर की कुल वैश्विक संख्या में भारत का योगदान 20% यानी ⅕; भारतीय स्त्रियां अन्य देशों के मुकाबले अधिक जोखिम में।
  • भारत में सर्वाइकल कैंसर की प्रसार दर 18 प्रति एक लाख महिलाएं। 5 year survival rate 5 सालों तक जीवन आयु की अनुमानित दर मात्र 46 परसेंट जोकि अन्य एशियाई देशों की तुलना में सबसे कम है।
  • 80% से अधिक सर्वाइकल कैंसर रोग से पीड़ित भारतीय महिलाएं एडवांस स्टेज यानी अंतिम चरण में बीमारी के निदान की स्थिति और उपचार तक की अवस्था में पहुंच पाती हैं जब तक कि बहुत देर हो चुकी होती है। इसी कारणवश इसका मृत्यु दर भारतीय स्त्रियों में काफी अधिक है। इसका मुख्य कारण हैं प्राथमिक स्तर पर टेस्टिंग और स्क्रीनिंग ना हो पाना।
  • सरकार एवं स्वयंसेवी संस्थानों द्वारा इस कैंसर की रोकथाम के प्रयास कई वर्षों से चल रहे हैं परंतु अभी तक इतने प्रभावशाली नहीं रहे हैं।
  • इस प्राणघातक कैंसर के प्रमुख कारण ह्यूमन पेपिलोमा वायरस के विरुद्ध सुरक्षा कवच के रूप में इसका टीका एक आशा की किरण और इसके विरुद्ध लड़ाई में एक अचूक अस्त्र साबित हुआ है। और यही इस जानलेवा बीमारी से जननी स्त्रियों को निजात दिलाने का इकलौता विकल्प भी है।

भारतीय स्त्रियों को ह्यूमन पैपिलोमा वायरस संक्रमण के प्रति अधिक खतरे में डालने वाले कुछ कारण:

कम उम्र में विवाह, कई बच्चों को जन्म देना, मासिक धर्म में अनियमितता, अनेक यौन संबंध, धूम्रपान, क्षीण रोग प्रतिरोधक क्षमता, इत्यादि।

सर्वाइकल कैंसर के रोकथाम के उपाय:

  • सर्वोत्तम और सबसे अचूक वर्तमान में उपलब्ध विकल्प, ह्यूमन पेपिलोमा वायरस के  किशोरावस्था में टीकाकरण द्वारा सुरक्षा कवच, HPV vaccination.
  • समय-समय पर पैप स्मीयर इत्यादि के माध्यम से स्क्रीनिंग कराना।
  • स्वस्थ जीवन शैली का अनुपालन, ऊपर उल्लेखित अधिक जोखिम खतरे में डालने वाले कारणों से परहेज।

एचपीवी वैक्सीन टीकाकरण से संबंधित कुछ तथ्य:-  

  • कोई विशेष साइड इफेक्ट नहीं है।
  • किशोरियों की 9 से 18 वर्ष की उम्र में टीकाकरण का विशेष महत्व, तीन गुना अधिक प्रभावशाली।
  • 9 से 14 वर्ष की आयु में, वैक्सीन की दो डोज खुराक, 6 महीने के अंतराल पर (0, 6)
  • 15 से 18 वर्ष की आयु में तीन डोज़, 2 माह और 6 माह के अंतराल पर (0, 2, 6)

जनसाधारण पर लोहिया संस्थान द्वारा चलाए हुए इस अग्रणी ऐतिहासिक टीकाकरण अभियान व जागरूकता का क्या प्रभाव होगा, यह कल्पना करते हुए ही एक ऊर्जा का अनुभव होता है। क्योंकि स्त्री सब की जननी होती हैं और स्त्रियों की प्रमुख प्राणघातक कैंसर बीमारी के विरुद्ध बचपन और किशोरावस्था में ही एक सुरक्षा कवच प्रदान करना मानव जाति और समाज के हित में कितना बड़ा कदम है यह स्वयं अंदाजा लगाया जा सकता है।

राज्यपाल की ओजस्वी प्रेरणा से परिपूर्ण एवं उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक के नेतृत्व में इस टीकाकरण के साथ-साथ उसकी जनचेतना कार्यक्रम को सामुदायिक बड़े पैमाने पर करवा कर प्रोफेसर (डॉ) सोनिया नित्यानंद ने लोहिया संस्थान को अग्रणी बनाकर अन्य चिकित्सकीय संस्थानों के लिए एक अनुसरणीय एवं समाज के लिए एक अनुकरणीय कार्य किया है।

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