











































लखनऊ। आयुर्वेद में सभी बीमारियों का इलाज संभव है, बस लोग अपनी बीमारियों में जब हर पैथी से इलाज कराकर हार जाते और निराश हो जाते तब वह अपनी पुरानी चिकित्सा पद्घति आयुर्वेद की ओर रुख करते है। यह अफसोस जताते हुए हिम्स लखनऊ के आयुर्वेद और ध्यान गुरु आचार्य मनीष ने कहा कि आयुर्वेद गुर्दे की विफलता, लीवर की विफलता और कैंसर रोगियों को ठीक करने के लिए रामबाण है।
आयुर्वेद के माध्यम से हमारा इलाज उन लोगों के लिए प्रकाश की किरण बन गया है जो सारी उम्मीद खो चुके है। आचार्य मनीष अस्पताल और एकीकृत चिकित्सा शिक्षा संस्थान हिम्स और शुद्धि आयुर्वेद के संस्थापक हैं। आचार्य ने बताया कि हमारे यहां किसी भी बीमारी की जड़ को पकड़ कर उसका इलाज खान-पान और दिनचर्या को दुरुस्त करके किया जाता है।
आर्चाय मनीष ने बताया कि एचआईआईएमएस पहला एकीकृत अस्पताल है जो अपने मरीजों के इलाज के लिए आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, होम्योपैथी और आहार चिकित्सा का उपयोग करता है। एचआईआईएमएस के डॉक्टरों ने किडनी फेलियर, लिवर फेलियर कैंसर और थैलेसीमिया जैसी पुरानी बीमारियों के मरीजों का इलाज किया है।
मनीष ने एक सवाल के जवाब में बताया कि सरकार आयुर्वेद के विस्तार में उतना सहयोग नहीं कर रही जितना एलोपैथी पद्घति को करती है। सरकार यदि पूरा सहयोग करें तो देश का पैसा जो दवाओं के माध्यम से विदेशों में चला जाता वह बच सकता और लोग भी इन नयी बीमारियों से बच सकते है।
मनीष ने बताया कि एचआईआईएमएस में हम शरीर की आंतरिक शक्ति को बढ़ाकर किडनी, कैंसर, लिवर, शुगर, बीपी, थैलेसीमिया और हृदय रोगों को उलट देते हैं। हमारे पास देशभर में सौ से अधिक शुद्धि क्लीनिक संचालित हैं। हमारे पास दिल्ली में 12 आयुर्वेदिक क्लीनिक हैं जो सीजीएचएस और डीजीएचएस स्वीकृत हैं।
एचआईआईएमएस का मुख्य उददेश्य लोगों को उनके स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए पारंपरिक उपचार प्राप्त करने में मदद करना है। डॉ अमर सिंह आजाद, डॉ खादर वल्ली, डॉ पांडे जैसे विशेषज्ञों की देखरेख और नेतृत्व में एचआईआईएमएस में पुरानी बीमारियों का इलाज किया जाता है। डॉ बीआरसी एचआईआईएमएस को भारत का पहला एनएबीएच मान्यता प्राप्त आयुर्वेद पंचकर्म अस्पताल होने का गौरव प्राप्त है।
गुजरात और कर्नाटक में वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाजेशन द्वारा स्थापित आयुर्वेद रिसर्च सेंटर पर आचार्य मनीष ने कहा कि जब यूएनओ की संस्था ऐसा भारत में आकर कर सकती है तो देश की सरकारों और संस्थाओं को भी ऐसा करना चाहिए। उन्होने डब्ल्यूएचओ की इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि इसके भविष्य में बेहतर परिणाम देखने को मिलेगें।







हुज़ैफ़ा अबरार October 04 2026 0 147
हुज़ैफ़ा अबरार October 01 2026 0 560
हुज़ैफ़ा अबरार October 01 2026 0 420
हुज़ैफ़ा अबरार October 04 2026 0 147
हुज़ैफ़ा अबरार August 14 2026 0 9772
एस. के. राणा January 20 2026 0 5978
एस. के. राणा February 01 2026 0 5957
हुज़ैफ़ा अबरार January 25 2026 0 5572
हुज़ैफ़ा अबरार February 07 2026 0 5551
एस. के. राणा January 13 2026 0 5117
हुज़ैफ़ा अबरार February 05 2026 0 5061
सौंदर्या राय April 11 2022 0 87456
सौंदर्या राय April 08 2022 0 35638
सौंदर्या राय April 07 2022 0 38608
सौंदर्या राय April 05 2022 0 36120
लेख विभाग March 19 2022 0 35679
सौंदर्या राय March 16 2022 0 73526
क़रीब 70 देशों में संक्रमण के मामलों में वृद्धि हो रही है और यह ऐसे समय में हो रहा है जब परीक्षण दरो
लगातार शिकायतों के चलते उन्होंने कड़े कदम उठाए हैं। सहारनपुर के बेहट में रिश्वत लेने के एक प्रकरण मे
हमारा एजेंडा कैंसर की रोकथाम के बारे में जागरूकता पैदा करना है। भारत में कैंसर के मामले तेजी से बढ़
जब किसी कारणवश यह मीडियन नर्व इस कार्पल टनल में दबने लगती है तो हाथ में दर्द, झुनझुनी या कमजोरी (खास
इस मॉर्डन अस्पताल में 500 से ज्यादा पक्षियों के इलाज लिए वार्डों में पिंजरे लगाए गए हैं। साथ ही 300
आंकड़े बताते हैं कि कई महिलाएं शर्म और सामाजिक कारणों से पेड लीव नहीं लेती। एक सर्वेक्षण के अनुसार ज
आप एडवांस में रजिस्ट्रेशन नहीं करवाना चाहते हैं तो फिर आपको दोपहर तीन बजे के बाद अपने नजदीकी अस्पताल
राज्य में इस वायरस से मरने वालों की संख्या बढ़कर 22,704 हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार पिछले 24 घंटों क
इरफान अंसारी ने फेसबुक पर लिखा:पिछले 20 वर्षों तक राज्य की जनता को केवल आश्वासन देकर आँखों में धूल झ

COMMENTS