











































लखनऊ। मौजूदा जीवनशैली तनाव से भरपूर है और इससे तमाम तरीके के रोग हो रहे हैं जो हमारे काम हमारी क्षमता को प्रभावित करते हैं। एक हद तक तो तनाव हमारी तरक्की में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है लेकिन एक स्थिति के बाद यह घातक सिद्ध हो सकता है। स्ट्रैस से हर व्यक्ति भलीभांति परिचित है और योग इत्यादि से तनाव से बचा जा सकता है ये भी सब जानते हैं लेकिन भागदौड़ भरी जिंदगी में इसका ठीक से अनुपालन नहीं हो पाता है।
एलडीए कालोनी कानपुर रोड स्थित लोकबंधु अस्पताल में डॉक्टर्स के लिए गुस्सा (anger) एवं तनाव मुक्ति कार्यशाला का आयोजन किया गया। चिकित्सा अधीक्षक डॉ अजय शंकर त्रिपाठी ने बताया कि समय समय पर अस्पताल द्वारा मरीजों और परिजनों से फीडबैक लिया जाता है जिसमें यह बात निकल कर सामने आई कि डॉक्टर्स में काम को लेकर कुछ चिड़चिड़ापन आ रहा है। अस्पताल में तनाव रहित वातावरण बनाए रखने के लिए डॉ आदर्श त्रिपाठी, एडीशनल प्रोफेसर, मानसिक रोग विभाग, केजीएमयू द्वारा कार्यशाला में गुस्से और तनाव को लेकर विस्तार से जानकारी दी गई।

इस अवसर पर हेल्थ जागरण ने डॉक्टर अजय शंकर त्रिपाठी से खास बातचीत करते हुए तनाव को लेकर महत्वपूर्ण जानकारियां एकत्र की।
हेल्थ जागरण - डॉ साहब तनाव (stress) क्या है ?
डॉ अजय शंकर त्रिपाठी - तनाव हर व्यक्ति में अलग अलग तरह का होता है जिसके कारण हार्मोनल बदलाव होता है और कुछ मल्टीपल बीमारियां हो सकती है। एक ही समस्या एक व्यक्ति के तनाव भरी हो सकती है तो दूसरे के लिए नहीं भी हो सकती है। हमें तनाव मुक्ति के लिए योग, व्यायाम और आयुर्वेद को अपनाना चाहिए।
हेल्थ जागरण - तनाव शरीर को कैसे नुकसान पहुंचाता है ?
डॉ अजय शंकर त्रिपाठी - ब्लडप्रेशर (Blood pressure), शुगर (sugar), हाइपरटेंशन (hypertension), हार्ट फेलियर और विभिन्न बीमारियां हो सकती है।
हेल्थ जागरण - स्ट्रैस मैनेजमेंट के लिए शुरू की दवा का व्यक्ति आदी हो जाता है, क्या जीवनशैली में बदलाव कर बाद में इन दवाओं से मुक्ति पाई जा सकती है?
डॉ अजय शंकर त्रिपाठी - बिल्कुल पाई जा सकती है। हमें अपनी जीवनशैली और दिनचर्या दोनों में आवश्यकता अनुसार बदलाव करके तनाव मुक्त रहना चाहिए। ऐसा करने से धीरे धीरे दवाओं की जरूरत समाप्त हो सकती है।
हेल्थ जागरण - क्या स्ट्रैस के पेशेंट को आईबीएस (IBS) डिसआर्डर (चिड़चिड़ापन का शिकार) हो सकता है, यदि हां तो इसका क्या इलाज है?
डॉ अजय शंकर त्रिपाठी - बिल्कुल हो सकता है। तनावग्रस्त व्यक्ति में निश्चित ही चिड़चिड़ापन आ जाता है और वह गुस्से में रहने लगता है। पेंट खराब रहना, बार बार लैट्रिन होना हो सकता है।
हेल्थ जागरण - तनाव मुक्ति के लिए जीवनशैली (lifestyle) में क्या बदलाव करने चाहिए?
डॉ अजय शंकर त्रिपाठी - सबसे पहले तो प्रकृति के समीप रहना शुरू कीजिए। सुबह जल्दी उठकर टहलना, योग (yoga), व्यायाम करना और संतुलित आहार लेना बहुत जरूरी है। समस्याओं के लिए कार्य योजना बनाए और तनाव मुक्ति की ओर आगे बढ़ें।







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