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दिल्ली की पच्चीस फीसदी महिलाएं और तैंतीस फीसदी पुरुष हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित

जिन लोगों का सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर 140 से अधिक या डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर 90 से अधिक होता है, वे हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित माना जाता है। लगभग पांच से दस फीसदी लोगों में सेकेंडरी हाइपरटेंशन होता है।

एस. के. राणा
May 17 2022 Updated: May 18 2022 00:33
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दिल्ली की पच्चीस फीसदी महिलाएं और तैंतीस फीसदी पुरुष हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित प्रतीकात्मक चित्र

नयी दिल्ली। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के मुताबिक राजधानी दिल्ली में पच्चीस फीसदी महिलाएं और लगभग तैंतीस फीसदी पुरुष हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) से पीड़ित हैं। जिन लोगों का सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर (systolic blood pressure) 140 से अधिक या डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर (diastolic blood pressure) 90 से अधिक होता है, वे हाई ब्लड प्रेशर (high blood pressure) से पीड़ित माना जाता है।

एम्स के ह्रदय रोग विभाग के पूर्व प्रोफेसर और वर्तमान में राजस्थान की निम्स विश्विद्यालय के कुलपति डॉक्टर संदीप मिश्रा का कहना है कि बहुत से लोगों को यह नहीं पता होता कि उन्हें ब्लड प्रेशर (blood pressure) की समस्या है। एक अन्य अध्ययन के हवाले से उन्होंने बताया कि देश में ब्लड प्रेशर के कुल मरीज़ों में से मात्र 9 फीसदी मरीजों का ही ब्लड प्रेशर नियंत्रण में रहता है। 

एम्स के प्रोफेसर डॉक्टर राजेश खड़गावत का कहना है कि लगभग पांच से दस फीसदी लोगों में ब्लड प्रेशर की बीमारी सेकेंडरी हाइपरटेंशन (secondary hypertension) की होती है। सेकेंडरी हाइपरटेंशन ब्लड प्रेशर बढ़ने की वह स्थिति है जो किसी अन्य बीमारी या उसके इलाज के तहत लेने वाली दवाओं से होती है। यह कम उम्र में भी हो सकता है।

40 से कम उम्र के लोग, किडनी (kidney) या दिल की बीमारी (heart disease) से पीड़ित लोग, ऐसे मरीज जिनका ब्लड प्रेशर दो या इससे ज्यादा दवाएं लेने के बाद ही नियंत्रण में आता है या नियंत्रण में नहीं आ पाता है तो ऐसे लोगों में सेकेंडरी हाइपरटेंशन हो सकता है। डॉक्टरों के अनुसार, जिस वजह से ब्लड प्रेशर बढ़ा है जब तक उसे ठीक नहीं किया जाएगा, तब तक दवाओं का इस पर ज्यादा असर नहीं होगा।

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