











































लखनऊ। राजधानी लखनऊ के मानस गार्डन में लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में राजधानी के चार बड़े डॉक्टरों ने लोगों का हेल्थ चेकअप किया।
मेडिकल कैम्प में आए लखनऊ के मशहूर डायबिटीज़ (diabetes) विशेषज्ञ केएल मिश्र ने कहा कि हमने अपनी जीवनचर्या (lifestyle) बिगाड़ ली है। ख़ुद को समय देना बंद कर दिया है। कुछ भी, कभी भी खाते-पीते हैं और योग-व्यायाम के नाम पर शून्य हो चुके हैं। ऊपर से बीमारी देखकर गूगल करते हैं और दवा व डाइट उसी के अनुसार कर लिए हैं। इसलिए यदि आप गूगल (Google) देखकर अपने सेहत का ख़्याल रख रहे हैं तो सावधान, नहीं तो आपको आने वाले दिनों में बड़ी बीमारी (Disease) का सामना करना पड़ सकता है।
जाने-माने बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. नृपेंद्र सिंह ने कहा कि बच्चों (children) को छह माह के बाद ही अन्न खिलाना चाहिए। साथ ही यह ख़्याल रखना होगा कि उन्हें किसी भी हालत में नमक न दिया जाए। डॉ. सिंह के अनुसार बच्चों के शरीर में छह माह के बाद ही टेस्ट सेल बनने शुरू होते हैं, वो भी मीठे वाला। इसलिए बच्चों को एक साल के बाद ही नमकीन भोजन दिया जाता है। साथ ही उन्होंने कहा कि बच्चों का ग्रोथ (growth) चूँकि छह माह में दोगुना हो जाता है, इसलिए हर माह माता-पिता को किसी अच्छे जानकार चिकित्सक (doctor) को दिखा लेना चाहिए।
अच्छा डॉक्टर केवल वजन मापकर बच्चे के विकास की रफ़्तार जान लेगा। इसके अलावा उन्होंने बच्चों में होने वाले बुख़ार को लेकर भी फैली भ्रांतियों को ख़त्म किया। उन्होंने कहा कि यदि बच्चे को 100 डिग्री से ज़्यादा बुख़ार (fever) है तो तत्काल उसके सभी कपड़े उतार दिए जाएँ और उसे नार्मल पानी से पोंछ दिया जाए। यदि बच्चे का बुख़ार 15 मिनट में नहीं उतरा तो उसे झटके की बीमारी हो सकती है, जो बच्चे में पाँच साल से लेकर 19 साल तक दिखाई पड़ सकता है।
कैम्प में आए दिग्गज आर्थोपेडिक (orthopaedic) सर्जन डॉ. सौरभ सिंह ने गठिया और जोड़ रोग पर अपने विचार रखें। उन्होंने कहा कि अब लोग घुटने का प्रत्यारोपण कराकर इस बीमारी से निजात पा सकते हैं। लेकिन लोग सही बात बताते नहीं है और बीमारी के साथ रहने लगते हैं। उन्होंने कहा कि क्वालिटी लाइफ़ स्टाइल के लिए नी-रीप्लेसमेंट (घुटना प्रत्यारोपण) उचित सलाह है। साथ ही उन्होंने बताया कि साथ ही हमें अपने खान-पान पर उचित ध्यान देना पड़ेगा। आजकल हमारा क्लाइमेट (climate) ऐसा है कि आठ महीने धूप होती है, उसके बाद भी लोगों में विटामिन-डी की कमी देखने को मिल रही है। इसलिए यदि शरीर में कहीं भी ज़्यादा दर्द हो तो ज़रूर किसी चिकित्सक की सलाह लें।
वहीं न्यूरो (neuro) साइक्रेटिस्ट डॉ. विजित जायसवाल ने बढ़ते डिप्रेशन पर अपने विचार रखें। उन्होंने कहा कि स्वस्थ मनुष्य को छह से सात घंटे की स्वस्थ नींद ज़रूर लेनी चाहिए। इसके लिए ज़रूरी है कि सोने से आधे घंटे पहले टीवी, मोबाइल जैसे इलेक्ट्रॉनिक (electronic) डिवाइस से ख़ुद को दूर कर लें। साथ ही उन्होंने सामान्य स्थितियों में चिंता और तनाव जिंदगी के आम हिस्से के रूप में जाना जाता है लेकिन अगर यह बार-बार और लंबे समय तक रहता है तो इससे दिनचर्या की सामान्य गतिविधियां प्रभावित होती हैं।
इस मौक़े पर मानस गार्डन सोसायटी के अध्यक्ष एवं न्यायमूर्ति चंद्रमोहन चौबे, सचिव एवं कर विशेषज्ञ दिनेश शुक्ला, कोषाध्यक्ष रविंद्र प्रजापति, संरक्षक एवं न्यायमूर्ति अमरजीत त्रिपाठी के साथ-साथ अवनीश तिवारी, चंचल सिंह, प्रगति सिंह, टीएन चौबे, अभिषेक सिंह, अजय सिंह, गोविंद पांडेय, अशोक पांडेय, भौमेन्द्र शुक्ला समेत कार्यकारिणी के सभी सदस्य उपस्थित थे।







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