











































प्रतीकात्मक
लखनऊ। कोरोना काल में इम्यूनिटी यानि रोग प्रतिरोधक क्षमता की महत्ता हर किसी को बखूबी समझ में आ गयी है । यह क्षमता कोरोना से ही नहीं बल्कि कई अन्य संक्रामक बीमारियों से भी रक्षा करती है, लेकिन इसे बाजार से पैसे के बल पर नहीं ख़रीदा जा सकता है बल्कि इसे व्यक्ति को खुद से बनाना पड़ता है । चाहे वह अपना आहार-विहार सही रखकर किया जाए या शारीरिक श्रम के बल पर बढ़ाया जाए । यह बातें वरिष्ठ होम्योपैथी चिकित्सक डॉ. त्रिदिवेश त्रिपाठी ने एक खास मुलाक़ात के दौरान कहीं । डॉ. त्रिपाठी के कम्युनिटी मेडिसिन पर कई शोध भी मौजूद हैं । उन्होंने होम्योपैथी में कोरोना जैसी तमाम बीमारियों को जड़ से ख़त्म करने के सरल, सुरक्षित और सबसे सस्ते इलाज के बारे में भी विस्तार से बताया । प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंश –

डॉ. त्रिदिवेश त्रिपाठी
सवाल : होम्योपैथी में क्या कोरोना का इलाज मौजूद है ?
जवाब : बीमारी से तत्काल मुक्ति पाने के चक्कर में आज लोग बड़ी तेजी के साथ एलोपैथ की तरफ भागते हैं और कई तरह के साइड इफेक्ट का शिकार हो जाते हैं, कोरोना के इलाज में ही देख लीजिये जल्दबाजी में स्टेरायड का सहारा लेने वाले ब्लैक फंगस जैसी बीमारी को गले लगा रहे हैं । दूसरी ओर होम्योपैथी और आयुर्वेद जैसी पद्धतियों में कोरोना को जड़ से ख़त्म करने की पूरी ताकत मौजूद है और कोई प्रतिकूल प्रभाव भी शरीर पर नहीं पड़ता है । यही कारण है कि आयुष मंत्रालय तक ने होम आइसोलेशन में उपचाराधीनों के इलाज में होम्योपैथी को कारगर बताया है । मुंबई में तो आईसीयू में भी होम्योपैथी के इलाज का प्रयोग चल रहा है और सकारात्मक परिणाम आने की बात कही जा रही है । वायरस के इलाज में होम्योपैथी को पहले से ही महारत है और कोरोना भी एक तरह का वायरस ही है, इसलिए भरोसा करें ।
सवाल : कोरोना के प्रचलित इलाज से होम्योपैथी में कुछ अलग इलाज मौजूद है क्या ?
जवाब : हर विधा में इलाज का अपना एक तरीका होता है, उसी तरह से होम्योपैथी में बीमारी का नहीं बल्कि व्यक्ति का इलाज किया जाता है । व्यक्ति को फोकस करके उसकी जरूरत के मुताबिक़ इलाज किया जाता है और उसी के आधार पर दवाओं का चयन किया जाता है । यही कारण है कि कोरोना की दूसरी लहर में होम्योपैथी ने अपने आप अपना एक सम्मानजनक स्थान बना लिया है और बड़ी संख्या में लोग भारत की प्राचीनतम पद्धति आयुर्वेद और होम्योपैथ की तरफ लौट रहे हैं ।
सवाल : बीमारी नहीं बल्कि व्यक्ति के इलाज से क्या मतलब है ?
जवाब : इसका मतलब यह है कि सबसे पहले बीमार व्यक्ति की पूरी मनोदशा समझी जाती है और क्या दिक्कत है उस पर विस्तार से बात की जाती है , जैसे- बुखार आता है तो किस समय पर आता है, कितनी देर में उतर जाता है, बुखार के दौरान कंपकंपी होती है कि नहीं, पानी पीने का मन करता है कि नहीं । इन सवाल-जवाब के आधार पर दवाओं का निर्धारण किया जाता है क्योंकि बुखार की ही होम्योपैथी में करीब 50 दवाएं मौजूद होंगीं लेकिन उस व्यक्ति को वास्तव में किस दवा की जरूरत है वह उससे बातचीत के आधार और बताये लक्षण के आधार पर तय की जाती है । इसी तरह खांसी और बदन दर्द की दवा भी बातचीत के आधार पर तय होती है ।
सवाल : कोरोना की दूसरी लहर में सांस लेने में दिक्कत और आक्सीजन लेवल गिरने के ज्यादा मामले सामने आये हैं, उसका कारण क्या है ?
जवाब : पहली लहर में बुखार, खांसी, जुकाम जैसे लक्षण 6-7 दिन रहते थे उसके बाद वायरस फेफड़े की तरफ बढ़ता था और तब आक्सीजन सेचुरेशन की दिक्कत सामने आती थी किन्तु इस बार वायरस ने इतना समय ही नहीं दिया । आक्सीजन की दिक्कत की जनक शरीर में सूजन है, वायरस गले में पहुंचा और सूजन पैदा किया और उतरकर फेफड़े की तरफ बढ़ गया जिसका असर यह हुआ कि सांस लेने में दिक्कत महसूस होने लगी । होम्योपैथी की दवा यदि लक्षण आने के पहले दिन ही शुरू कर दी जाए तो वायरस गले के नीचे पहुँच ही नहीं पायेगा और ऐसी दिक्कत का सामना ही नहीं करना पडेगा ।
सवाल : डायबिटिक मरीज जो कोरोना प्रभवित हैं और आईसीयू में हैं उन्हें होम्योपैथी दवा दी जा सकती है ?
जवाब : कोरोना काल में आईसीयू में भर्ती करीब 15-20 मरीजों के परिजन संपर्क में आये और अपनी समस्या बताई कि आईसीयू में मरीज रिकवर नहीं हो रहा है, ऐसे में उनकी सहमति पर पीने के पानी के बोतल में दवा मिलाकर दी और यह भी सलाह दी कि एलोपैथ की जो दवाएं जैसे चल रहीं हैं, उन्हें वैसे ही चलने दें और इस पानी को पीने को दें । ऐसे मरीज अन्य मरीजों की तुलना में जल्दी ठीक हुए और कोई साइड इफेक्ट भी नहीं नजर आया । इसके अलावा होम आइसोलेशन के मरीज भी अन्य की तुलना में जल्दी स्वस्थ हो रहे हैं । इसके अलावा डायबिटिक मरीज की इम्युनिटी मजबूत होगी तो वह ब्लैक फंगस जैसे साइड इफेक्ट से भी प्रभावित नहीं होगा ।
सवाल : कोविड मरीजों में निमोनिया की दिक्कत सामने क्यों आ रही है ?
जवाब : वायरस जब सांस की नली से होते हुए फेफड़ों में उतर जाता है तो निमोनिया जैसी दिक्कत सामने आती है और विषाणुजनित निमोनिया को घर पर रहकर ही ठीक किया जा सकता है ।
सवाल : होम्योपैथिक दवा कैम्फोरा-1एम और आर्सेनिक अल्बम-30 में से कोरोना से सुरक्षित रखने में कौन से ज्यादा प्रभावी है ?
उत्तर : आयुष मंत्रालय द्वारा जनवरी 2020 में ही आर्सेनिक अल्बम-30 को लेने की संस्तुति मिली थी और उसकी डोज भी उसी समय तय कर दी गयी थी जबकि कैम्फोरा-1एम मुंबई के एक ग्रुप द्वारा प्रचारित की गयी है । इसके अलावा यही सलाह है कि वायरस ने अपना स्वरूप बदल लिया है, ऐसे में आर्सेनिक अल्बम की डोज डाक्टर को दिखाकर ही लें ।







हुज़ैफ़ा अबरार August 02 2026 0 231
हुज़ैफ़ा अबरार August 02 2026 0 168
हुज़ैफ़ा अबरार August 04 2026 0 168
हुज़ैफ़ा अबरार August 04 2026 0 161
हुज़ैफ़ा अबरार August 04 2026 0 126
हुज़ैफ़ा अबरार August 04 2026 0 21
हुज़ैफ़ा अबरार August 01 2026 0 1211
हुज़ैफ़ा अबरार August 01 2026 0 385
हुज़ैफ़ा अबरार August 01 2026 0 252
हुज़ैफ़ा अबरार August 02 2026 0 231
हुज़ैफ़ा अबरार August 01 2026 0 203
हुज़ैफ़ा अबरार August 02 2026 0 168
हुज़ैफ़ा अबरार January 25 2026 0 4998
एस. के. राणा January 20 2026 0 4949
हुज़ैफ़ा अबरार February 07 2026 0 4851
एस. के. राणा January 13 2026 0 4627
हुज़ैफ़ा अबरार February 05 2026 0 4529
एस. के. राणा February 01 2026 0 4305
एस. के. राणा February 04 2026 0 3983
सौंदर्या राय April 11 2022 0 87043
सौंदर्या राय April 08 2022 0 34938
सौंदर्या राय April 07 2022 0 38104
सौंदर्या राय April 05 2022 0 35609
लेख विभाग March 19 2022 0 35217
सौंदर्या राय March 16 2022 0 72777
UTI एक सामान्य संक्रमण है लेकिन सही इलाज के अभाव में यह गंभीर रूप भी ले सकता है। ऐसे में मरीज को चाह
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में पिछले साल सुपर स्पेशियलिटी सेवा की शुरुआत की गई थी। सुपर स्पेशियलिटी में हृद
मुख्यमंत्री के कहा कि यदि आपका शरीर स्वस्थ है तो धर्म के सभी साधन स्वयं क्रमवार सफल होते जाएंगे लेकि
सरकार ने IDPL और RDPL के सभी कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लाभ देने की पेशकश की है।
ओमिक्रॉन का सब वैरिएंट बीए.2 वायरस अभी बड़ा खतरा बना हुआ है। ताजा अध्ययनों में भी सामने आया है कि फ
आईएमए लखनऊ अध्यक्ष डॉ मनीष टण्डन ने कहा कि मरीजों और तीमारदारों के सबसे ज्यादा पास नर्सेज रहते हैं इ
फेफड़े का कैंसर का सबसे बड़ा कारण धूम्रपान है। इसके अलावा यह दूसरे कारणों से भी होता है। जिनमें तंबा
दुनिया के लगभग 50% लोग नींद की कमी से होने वाली परेशानियों से पीड़ित हैं। नींद की कमी से देश की लगभग
गुर्दे की पथरी बनने से वजन कम होने, बुखार, मतली, रक्तमेह और पेट के निचले हिस्से में गंभीर दर्द के सा
डाक्टर से सुनिए” कार्यक्रम 22 अप्रैल को दोपहर तीन बजे से शाम छह बजे तक http://webcast.gov.in/up/heal

COMMENTS