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बीजिंग। कुछ प्राचीन जीवों के लिए तिब्बत के ग्लेशियरों ने ‘कोल्ड स्टोरेज’ का काम किया है, जिससे वे अब तक जीवित हैं और दुनिया के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं। कई विशेषज्ञ पहले ही चेता चुके हैं कि ग्लेशियरों के पिघलने से अगली महामारी आ सकती है। हाल ही में प्रकाशित एक शोध में खुलासा किया गया है कि तिब्बती पठार के गुलिया आइस कैप से कई खतरनाक वायरस और बैक्टीरिया मिले हैं। धीरे-धीरे बने इन ग्लेशियरों में प्राचीन काल में धूल के साथ-साथ वायरस भी दब गए थे।
माइक्रोबायोम (Microbiome) में प्रकाशित शोध में, शोधकर्ताओं (researchers) ने तिब्बती पठार के गुलिया आइस कैप से दर्जनों अनोखे वायरसों की पहचान की है। यह वायरस (virus) करीब 15,000 साल पुराने बताए जा रहे हैं। शोध के मुख्य लेखक और ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी के माइक्रोबायोलॉजिस्ट (microbiologist) ज़ी पिंग जॉन्ग (Zhi-Ping Zhong) का कहना है कि ये ग्लेशियर धीरे-धीरे बने थे। धूल और गैसों के साथ-साथ कई वायरस भी उस बर्फ में जमा हो गए।
पिछले अध्ययनों से पता चला है कि सूक्ष्मजीव समुदायों का संबंध, वातावरण में धूल और आयन सांद्रता में परिवर्तन से जुड़ा होता है। यह उस समय की जलवायु और पर्यावरणीय परिस्थितियों (environmental conditions) का भी संकेत देता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि प्राचीन काल के इन जमे ग्लेशियरों में, चीन में समुद्र तल से 6.7 किलोमीटर ऊपर, 33 में से 28 वायरस पहले कभी नहीं देखे गए थे।







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