












































प्रतीकात्मक
वाशिंगटन। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने Covid-19 के इलाज के लिए बहुराष्ट्रीय दवा कंपनी फाइजर की दवा 'पैक्सलोविड' (Paxlovid) गोली के प्रयोग की मंजूरी दिया है। विदित है कि इसके पहले रेमेडिसिविर (Remdesivir) और मोलनुपिरविर (Molanupiravir) को मंजूरी दी जा चुकी है।
डब्ल्यूएचओ ने शुक्रवार को बताया कि वह फाइजर की एंटी वायरल गोली पैक्सलोविड (Anti-Viral Pill Paxlovid) के इस्तेमाल की अनुशंसा करता है। इसे अस्पताल में भर्ती किए जाने की जोखिम वाले हल्के व मध्यम श्रेणी के कोरोना रोगियों को दिया जा सकता है।
डब्ल्यूएचओ (WHO) ने कोरोनारोधी दवाओं की उपलब्धता और कीमतों में पारदर्शिता का अभाव को बड़ी चुनौती बताया है। संगठन का मानना है कि निम्न व मध्यम आय वर्ग के देशों के लोगों को इलाज के लिए फिर कतारों में खड़े होने के लिए विवश होना पड़ सकता है।
पैक्सलोविड (PaxLovid) के अध्ययन में पाया गया है कि इस गोली के सेवन से कोरोना संक्रमित रोगियों की अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम 85 फीसद तक कम हो सकता है।
डब्ल्यूएचओ (WHO) ने यह भी कहा कि फाइजर की ब्रांड नाम वाली दवाएं संगठन की पूर्व योग्यता सूची में शामिल की जाएंगी, लेकिन गुणवत्तापूर्ण स्रोतों से इनकी जेनेरिक दवाएं अब भी उपलब्ध नहीं हैं।
जेनेरिक दवाएं (Generic Drugs) ब्रांड नाम वाली दवाओं का मूल संस्करण होती हैं या यूँ समझिए कि दवा के केमिकल नाम से बिकने वाली दवाएं जेनेरिक कहलातीं हैं। ब्रांड नाम से बिकने वाली दवाओं की अपेक्षा जेनेरिक दवाएँ बहुत कम दामों पर बाजार में मिल जातीं हैं। इससे कम व मध्यम आय वाले देशों को इलाज में सुविधा होती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि फाइजर व दवाओं के पेटेंट पूल के बीच बहुत सीमित लाइसेंस समझौता है। इसके कारण अनेक देश जेनेरिक दवाओं से लाभ नहीं उठा पाते हैं। इसलिए डब्ल्यूएचओ ने फाइजर (Pfizer's) से मजबूती के साथ सिफारिश कर रहा है कि वह अपनी मूल्य व लाइसेंस नीति को आसान व पारदर्शी बनाए ताकि जेनेरिक दवा निर्माता भी इन दवाओं का उत्पादन कर सकें तथा सस्ती दरों पर लोगों को मुहैया करा सकें।







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