











































प्रतीकात्मक चित्र
नोएडा। नोएडा के सेक्टर-93ए में भ्रष्टाचार की बुनियाद पर खड़े सुपरटेक के ट्विन टावर्स (एपेक्स और सियान) को आज रविवार दोपहर ढाई बजे ध्वस्त कर दिया गया। इस बीच चिकित्सकों ने उसके आसपास रह रहे और सांस की बीमारी से जूझ रहे लोगों को अधिक सतर्क रहने और संभव हो तो कुछ दिन इलाके से दूर रहने की सलाह दी है।
ट्विन टावर को ध्वस्त करने से अनुमानित 80 हजार टन मलबा निकला है और विस्फोट के दौरान हवा में धूल (dust) का विशाल गुबार देखने को मिला। चिकित्सकों का कहना है कि अधिकतर धूल कण का आकार पांच माइक्रोन या इससे कम है जो अनुकूल मौसमी परिस्थतियों जैसे तेज हवाएं और बारिश की अनुपस्थिति में कुछ दिन वातावरण (atmosphere) में ही रह सकते हैं।
वहीं जो लोग पहले से अस्थमा या सांस की किसी अन्य बीमारी से ग्रसित हैं, उनके लिए स्थिति गंभीर भी हो सकती है। इसके अलावा छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और हार्ट के रोगियों के लिए भी समस्या काफी बढ़ सकती है। चिकित्सकों ने कहा कि धूलकण से हुए भारी प्रदूषण की वजह से आंखों, नाक और त्वचा में खुजली, खांसी, छींक, सांस लेने में परेशानी (breathing problem), फेफड़ों में संक्रमण, नाक बंद होने, दमा और दिल की बीमारी की शिकायत हो सकती है। इसके अलावा ये धूल एलर्जी की समस्या, स्किन से जुड़ी दिक्कत, आंखों में जलन, लालिमा जैसी परेशानियों की वजह बन सकती है।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली के ‘क्रिटिकल केयर’ के सहायक प्रोफेसर डॉ.युद्धवीर सिंह ने कहा, ‘‘वातावरण (atmosphere) में मौजूद 2.5 माइक्रोन से कम आकार के मौजूद कण समस्या हैं। इससे खांसी, छींक, दमा की शिकायत, फेफड़ों में संक्रमण, नाक बंद होना, सांस लेने में समस्या के मामले बढ़ सकते हैं। वायरस के प्रसार में भी ये सूक्ष्म कण सहायक होते हैं और इससे संक्रमण दर बढ सकती है।’’
Edited by Shweta Singh







हुज़ैफ़ा अबरार August 25 2026 0 168
हुज़ैफ़ा अबरार August 25 2026 0 112
हुज़ैफ़ा अबरार August 24 2026 0 91
हुज़ैफ़ा अबरार August 14 2026 0 8141
हुज़ैफ़ा अबरार August 04 2026 0 1974
हुज़ैफ़ा अबरार August 01 2026 0 1715
हुज़ैफ़ा अबरार August 08 2026 0 1596
हुज़ैफ़ा अबरार August 14 2026 0 8141
एस. के. राणा January 20 2026 0 5306
हुज़ैफ़ा अबरार January 25 2026 0 5180
हुज़ैफ़ा अबरार February 07 2026 0 5082
एस. के. राणा February 01 2026 0 4921
एस. के. राणा January 13 2026 0 4788
हुज़ैफ़ा अबरार February 05 2026 0 4753
सौंदर्या राय April 11 2022 0 87204
सौंदर्या राय April 08 2022 0 35169
सौंदर्या राय April 07 2022 0 38279
सौंदर्या राय April 05 2022 0 35777
लेख विभाग March 19 2022 0 35406
सौंदर्या राय March 16 2022 0 73022
अपने करिश्माई चिकित्सकीय परिणामों के कारण होम्योपैथी प्रमुख चिकित्सा पद्धति के रूप में स्थापित हो चु
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार देश में अब कुल 1,24,868 सक्रिय मरीज बचे हैं। वहीं स्वास्थ्य मंत्रालय द्
वैक्सीन को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी ओर से भारत की नीति को लेकर भी साफ कर दिया है कि भ
हालांकि जीएलपी-1 थेरेपी मोटापे से ग्रस्त वयस्कों के लिए पहला प्रभावी उपचार विकल्प है, लेकिन विश्व स्
आयला बशीर के परिवार में ऐसा आनुवांशिक रोग है, जिसकी वजह से शरीर में कुछ या सभी प्रोटीन नहीं बनते और
वन विभाग के रेंजर अहमद कमाल सिददीकी का कहना है कि चमगादड़ शेडयूल प्राणी है। इसलिए इस पर नजर रखी जा रह
बलरामपुर चिकित्सालय स्थित संयुक्त राज्य कर्मचारी संघ कार्यालय में डिप्लोमा फार्मेसी एसोसिएशन उत्तर
लम्बे समय तक एंटीबायोटिक्स, दर्द निवारक दवाइयाँ, स्टेरॉयड की दवाइयाँ और सिगरेट-शराब के सेवन से भी अल
यह स्टिक 4 महीने में बनकर तैयार हुई है। जिससे दृष्टिहीन दिव्यांग सड़क पर बेधड़क होकर चल सकेंगे। उन्ह
चिकित्सकों के मुताबिक, मानसून के दस्तक देने से पानी भरने और मच्छरजनित रोगों का खतरा मंडराने लगेगा। ओ

COMMENTS