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ट्विन टावर ध्वस्त किये जाने के बाद डॉक्टरों ने श्वास संबंधित बीमारी से पीड़ित लोगों को दी ये सलाह

चिकित्सकों का कहना है कि अधिकतर धूल कण का आकार पांच माइक्रोन या इससे कम है जो अनुकूल मौसमी परिस्थतियों जैसे तेज हवाएं और बारिश की अनुपस्थिति में कुछ दिन वातावरण में ही रह सकते हैं।

विशेष संवाददाता
August 28 2022 Updated: August 29 2022 00:52
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ट्विन टावर ध्वस्त किये जाने के बाद डॉक्टरों ने श्वास संबंधित बीमारी से पीड़ित लोगों को दी ये सलाह प्रतीकात्मक चित्र

नोएडा। नोएडा के सेक्टर-93ए में भ्रष्टाचार की बुनियाद पर खड़े सुपरटेक के ट्विन टावर्स (एपेक्स और सियान) को आज रविवार दोपहर ढाई बजे ध्वस्त कर दिया गया। इस  बीच चिकित्सकों ने उसके आसपास रह रहे और सांस की बीमारी से जूझ रहे लोगों को अधिक सतर्क रहने और संभव हो तो कुछ दिन इलाके से दूर रहने की सलाह दी है।

 

ट्विन टावर को ध्वस्त करने से अनुमानित 80 हजार टन मलबा निकला है और विस्फोट के दौरान हवा में धूल (dust) का विशाल गुबार देखने को मिला। चिकित्सकों का कहना है कि अधिकतर धूल कण का आकार पांच माइक्रोन या इससे कम है जो अनुकूल मौसमी परिस्थतियों जैसे तेज हवाएं और बारिश की अनुपस्थिति में कुछ दिन वातावरण (atmosphere) में ही रह सकते हैं।

 

वहीं जो लोग पहले से अस्‍थमा या सांस की किसी अन्‍य बीमारी से ग्रसित हैं,  उनके लिए स्थिति गंभीर भी हो सकती है। इसके अलावा छोटे बच्‍चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और हार्ट के रोगियों के लिए भी समस्‍या काफी बढ़ सकती है। चिकित्सकों ने कहा कि धूलकण से हुए भारी प्रदूषण की वजह से आंखों, नाक और त्वचा में खुजली, खांसी, छींक, सांस लेने में परेशानी (breathing problem), फेफड़ों में संक्रमण, नाक बंद होने, दमा और दिल की बीमारी की शिकायत हो सकती है। इसके अलावा ये धूल एलर्जी की समस्‍या, स्किन से जुड़ी दिक्‍कत, आंखों में जलन, लालिमा जैसी परेशानियों की वजह बन सकती है।

 

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली के ‘क्रिटिकल केयर’ के सहायक प्रोफेसर डॉ.युद्धवीर सिंह ने कहा, ‘‘वातावरण (atmosphere) में मौजूद 2.5 माइक्रोन से कम आकार के मौजूद कण समस्या हैं। इससे खांसी, छींक, दमा की शिकायत, फेफड़ों में संक्रमण, नाक बंद होना, सांस लेने में समस्या के मामले बढ़ सकते हैं। वायरस के प्रसार में भी ये सूक्ष्म कण सहायक होते हैं और इससे संक्रमण दर बढ सकती है।’’

 

Edited by Shweta Singh

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