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कोरोना वायरस को रोकने वाली नयी दवा को मिली मंज़ूरी।

2-DG कोरोना वायरस को रोकने में मदद करती है। इसके आधार पर DCGI ने मई 2020 में फेज-II ट्रायल्स करने की मंजूरी दी थी। इस्तेमाल से मरीजों की कोरोना रिपोर्ट बाकी मरीजों की तुलना में जल्दी निगेटिव हो रही है।

एस. के. राणा
May 09 2021 Updated: May 09 2021 15:25
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कोरोना वायरस को रोकने वाली नयी दवा को मिली मंज़ूरी। प्रतीकात्मक

नयी दिल्ली। कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच शनिवार को एक राहत भरी खबर आई। 2-deoxy-D-glucose (2-DG) नाम की दवा को ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने कोरोना के इलाज के लिए इस दवा के इमरजेंसी यूज को मंजूरी दे दी है। ये दवा डीआरडीओ के इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड अलायड साइंसेस (INMAS) और हैदराबाद सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्युलर बायोलॉजी (CCMB) के साथ मिलकर तैयार की है। इसकी मैनुफैक्चरिंग की जिम्मेदार हैदराबाद स्थित डॉ. रेड्डी लैबोरेट्रीज को दी गई है।  

दवा के क्लीनिकल ट्रायल्स सफल साबित हुए हैं। दावा है कि जिन मरीजों पर इसका ट्रायल किया गया, उनमें तेजी से रिकवरी देखी गई। साथ ही मरीजों की ऑक्सीजन पर निर्भरता भी कम हो गई। ये भी दावा है कि दवा के इस्तेमाल से मरीजों की कोरोना रिपोर्ट बाकी मरीजों की तुलना में जल्दी निगेटिव हो रही है। यानी, वो जल्दी ठीक भी हो रहे हैं।

डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने अप्रैल 2020 में लैब में इस दवा पर एक्सपेरिमेंट किए थे। एक्सपेरिमेंट में पता चला था कि ये दवा कोरोना वायरस को रोकने में मदद करती है। इसके आधार पर DCGI ने मई 2020 में फेज-II ट्रायल्स करने की मंजूरी दी थी। 

कैसे ली जाती है यह दवा?
यह दवा न तो टैबलेट के रूप में है और नहीं इंजेक्शन के रूप में। यह पाउडर के रूप में आती है। पाउडर को पानी में घोलकर लिया जाता है। दवा लेने के बाद जब ये शरीर में पहुंचता है तो कोरोना संक्रमित कोशिकाओं में जमा हो जाती है और वायरस को बढ़ने से रोकती है। डीआरडीओर की माने तो यह दवा कोरोना संक्रमित कोशिकाओं की पहचान करती है फिर अपना काम शुरू करती है। दवा को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि यह दवा कोरोना मरीजों के लिए रामबाढ़ साबित हो सकती है। खासकर ऐसे समय में जब मरीजों को ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है।
क्या है दवा का बेसिक प्रिंसिपल?
दवा बनाने वाले डीआरडीओ के वैज्ञानिक डॉ. एके मिश्रा ने एबीपी न्यूज से बात करते हुए बताया कि किसी भी वायरस की ग्रोथ होने के लिए ग्लूकोज का होना बहुत जरूरी है। जब वायरस को ग्लूकोज नहीं मिलेगा, तब उसके मरने की चांसेस काफी बढ़ जाते हैं। इस वजह से वैज्ञानिकों ने लैब ने ग्लूकोज का एनालॉग बनाया, जिसे 2डीआरसी ग्लूकोज कहते हैं। इसे वायरस ग्लूकोज खाने की कोशिश करेगा, लेकिन यह ग्लूकोज होगा नहीं। इस वजह से उसकी तुरंत ही वहीं मौत हो जाती है। यही दवा का बेसिक प्रिंसिपल है।

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