













































प्रतीकात्मक
नई दिल्ली। देश में कोरोना की दूसरी लहर चल रही है वहीं तीसरी लहर (Covid Third Wave) का भी खतरा अभी टला नहीं है। हालांकि कोविड के मामलों में आई कमी के कारण दिल्ली सहित कई राज्यों में बड़े बच्चों के लिए स्कूलों को खोला गया है। कोरोना (Covid-19) के डर के चलते अभी भी अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने से कतरा रहे हैं साथ ही बच्चों के वैक्सीन (Vaccine for Children) लगने का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि कोरोना की एक-एक गतिविधि पर नजर रख रहे देश के जाने-माने विशेषज्ञ बच्चों के विकास के लिए स्कूल भेजना जरूरी बता रहे हैं।
हाल ही में जब आईसीएमआर (ICMR) के टास्क फोर्स ऑपरेशन ग्रुप फॉर कोविड-19 के चेयरमैन डॉ. एन के अरोड़ा से पूछा गया कि कुछ अभिभावक कोविड की तीसरी लहर की शंका के चलते बच्चों को अभी स्कूल भेजने के लिए सहमत नहीं हैं। क्या वास्तव में तीसरी लहर का आना निश्चित है? इस सवाल पर उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत रूप से उन्हें लगता है वायरस की वर्तमान स्थिति, एपिडेमियोलॉजी, सीरो पॉजिटिविटी दर और सबसे अहम अभी देखे जा रहे 90 प्रतिशत कोविड मरीज डेल्टा वेरिएंट (Delta Variant) के हैं। अभी कोई नया वेरिएंट पिछले चार हफ्तों में नहीं देखा गया है।
उन्होंने कहा कि ऐसा कहा जा सकता है कि हम दूसरी लहर (Covid Second Wave) की अंतिम अवस्था में है। तीसरी लहर की आशंका उस स्थिति में ही मजबूत होगी जबकि हम कोविड अनुरूप व्यवहार का पालन करना छोड़ देगें, विशेष रूप से आने वाले त्यौहार के मौसम में भी हमें कोविड अनुरूप व्यवहार (CAB) का पालन करना होगा। उत्सव मानने के लिए लोगों का एक जगह पर इकट्टा होना हानिकारक हो सकता है।
स्कूलों को लेकर डॉ. अरोड़ा ने कहा कि कोविड अनुरूप व्यवहार का पालन स्कूलों में भी करना जरूरी है। क्लास में भीड़ जमा नहीं होने देनी है। स्कूल अध्यापिकाओं और बच्चों के लिए मास्क (Mask) अनिवार्य रूप से प्रयोग किया जाए। मास्क का प्रयोग करने के लिए स्कूल स्टॉफ को बच्चों को प्रोत्साहित करना होगा। बच्चे डेढ साल से भी अधिक लंबे समय से घरों में कैद हैं, उन्होंने कोविड काल में अपने जीवन में कई तरह की घटनाएं देखी हैं। किसी भी तरह का अहम निर्णय लेने से पहले अभिभावक भी मानसिक रोग विशेषज्ञ, शिक्षाविद् या फिर मनोचिकित्सक से सलाह ले सकते हैं।
बच्चों के लिए भी कोविड की वैक्सीन आने और कुछ अभिभावकों के टीकाकरण के बाद ही बच्चों को स्कूल भेजने की बात कहने पर उन्होंने कहा कि बच्चों के टीकाकरण के लिए इंतजार किया जा सकता है। भारत और वैश्विक आंकड़ों के आधार पर यह देखा गया है कि बच्चों में कोविड के गंभीर संक्रमण और मृत्यु की संभावना बड़ों की अपेक्षा कम है। हालांकि बच्चों द्वारा संक्रमण फैल सकता है।
18 साल से कम उम्र के बच्चों की अपेक्षा बड़ों में कोविड संक्रमण से मृत्यु और कोविड की गंभीर स्थिति का खतरा 15 गुना अधिक होता है। इसलिए बच्चों के आसपास रहने वाले व्यस्क स्कूल हों या घर पर अगर सभी को कोविड का वैक्सीन लगा होगा तो हम बच्चों के लिए कोविड संक्रमण सुरक्षा का घेरा तैयार कर सकेगें। इस स्थिति में वायरस के फैलाव और संचरण की संभावना को काफी हद तक कम किया जा सकता है या रोका जा सकता है।
डॉ. अरोड़ा कहते हैं कि उन्हें मुझे यह लगता है कि अभिभावकों को बच्चों को स्कूल जरूर भेजना चाहिए और इसके लिए कोविड टीकाकरण का इंतजार करना सही नहीं है, इसकी दो प्रमुख वजह हैं। पहला बच्चों में कोविड संक्रमण का गंभीर खतरा होने की संभावना कम होती है या न के बराबर है दूसरा बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए उनका स्कूल जाना बहुत जरूरी है।







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