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मेडिकल डायरेक्ट डॉ. राकेश कपूर ने मेदांता लखनऊ को इस ट्रांसप्लांट प्रोग्राम को जल्द शुरू होने को लेकर कहा कि लिवर ट्रांसप्लांट शुरू होने उत्तर प्रदेश से कई मरीजों को दिल्ली, मुंबई और एनसीआर के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। उन्हें एक ही छत के नीचे सारी सुविधा मिल जाएगी।
मेदांता लखनऊ के डॉयरेक्टर व हेपेटोलॉजिस्ट डॉ अभय वर्मा ने लिवर के मरीजों की ओपीडी के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि लिवर के मरीजों की प्रत्येक माह ओपीडी होगी, जिसमें मरीज परामर्श ले सकेंगे। हालांकि ओपीडी मरीजों को पहले से अपॉइंटमेंट लेना होगा।
लिवर ट्रांसप्लांट को लेकर हेल्थ जागरण ने मेदांता इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर ट्रांसप्लांट एंड रीजनरेटिव के चेयरमैन डॉ. ए.एस.सोइन से बातचीत की।
हेल्थ जागरण - लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत कब पड़ती है?
डॉ. ए.एस.सोइन - जब लिवर फेल हो जाता है या लिवर में कैंसर होता है तब लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है।
हेल्थ जागरण - लिवर ट्रांसप्लांट में क्या तैयारी और सावधानियां बरतनी पड़ती है?
क्या लिवर ट्रांसप्लांट के बाद डोनर और मरीज दोनों स्वस्थ रहते हैं?
डॉ. ए.एस.सोइन - वयस्कों में लिवर फेल होने के चार कारण होते हैं जिनसे बचना जरूरी होता है। नॉन अल्कोहलिक फैटी डिसीस, अल्कोहलिक फैटी डिसीस, हेपेटाइटिस बी और सी। ये प्रमुख कारण हैं जिनसे लिवर फेल होता है।
लिवर ट्रांसप्लांट के दो सोर्स होते है पहला ब्रेन डेड बॉडी से दूसरा लाइव डोनर ट्रांसप्लांट विधि से लिवर ट्रांसप्लांट करना। लाइव डोनर ट्रांसप्लांट विधि में परिवार का सदस्य जिसका ब्लड ग्रुप मैचिंग हो, उम्र 15 से 55 के बीच हो उसका आधा लिवर लेते है और मरीज का ख़राब लिवर पूरा निकल कर उसमे आधा लिवर ट्रांसप्लांट कर देते है। बाद में डोनर और मरीज दोनों के आधे लिवर अपने आप पूरे साइज के हो जाते हैं। इसीलिए 95 फीसदी मरीज ठीक हो जाते हैं और डोनर तथा मरीज दोनों स्वस्थ रहते हैं।
हेल्थ जागरण - हमारे देश में अंगदान को लेकर बहुत भ्रांतियां हैं, ऐसे लोगों से क्या कहना चाहेंगे?
डॉ. ए.एस.सोइन - अंगदान दो तरीकों से होता हैं जैसा मैंने बताया है। ब्रेन डेड डोनेशन की जागरूकता होनी बहुत जरूरी है। ब्रेन डेथ कोमा नहीं है। ब्रेन डेड डोनेशन से 9 जिंदगियां बच सकती हैं।
डॉ. ए.एस.सोइन ने कहा कि लखनऊ व आप-पास के जिले से आने वाले मरीजों के लिए काफी अच्छी खबर है। पहले इन मरीजों के लिवर संबंधी कोई भी समस्या आती थी तो वे अपना इलाज तो लखनऊ में करवा लेते थे, उन्हें लिवर की गंभीर बीमारी होने पर लिवर ट्रांसप्लांट के लिए उत्तर प्रदेश के बाहर दिल्ली व अन्य राज्यों में जाना पड़ता था। मेदांता लखनऊ में अब लिवर ट्रांसप्लांट प्रोग्राम शुरू होने से इन मरीजों का काफी हद तक फायदा होगा। इससे न केवल मरीजों का खर्च कम होगा बल्कि उन्हें बाहर जाकर जिन समस्याओं का सामना करना पड़ता था वह भी नहीं होगा। उन्होंने जानकारी दी कि लखनऊ में लिवर ट्रांसप्लांट करवाने में मरीजों का लगभग 20 से 23 लाख रुपये का खर्च आएगा।
डॉ. सोइन ने बताया कि लिवर ट्रांसप्लांट प्रोग्राम की शुरूआत करने के लिए ओपीडी से शुरू की गई है, जिसमें पहले दिन 125 मरीजों की ओपीडी हुई और मरीजों की स्क्रीनिंग की प्रक्रिया भी शुरू की गई। जिसमें उनको लिवर के इलाज व आगामी जांच की जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया के बाद जिन मरीजों की रिपोर्ट में जरूरत पड़ेगी तो उनकी स्क्रीनिगं व जांचों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनका दो माह बाद लिवर ट्रांसप्लांट किया जाएगा। साथ ही उन्होंने ये भी जानकारी दी कि मेदांता लखनऊ में लिवर ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया लिविंग डोनर विधि द्वारा की जाएगी।







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