












































प्रतीकात्मक
लखनऊ। औषधियां जीवन देती है। फार्मेसिस्ट औषधियों को जीवन देते है। फार्मेसी जनस्वास्थ्य के लिए विश्वसनीय है। भारत मे फार्मेसी विधा को सम्मान दिए जाने, मजबूत किये जाने की महती आवश्यकता है। इससे मरीजो को सही सलाह मिलेगी और सही औषधियों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी।
फार्मेसिस्ट दिवस की पूर्व संध्या पर आज फार्मेसिस्टों और आम जनता के नाम संदेश प्रसारित करते हुए स्टेट फार्मेसी कॉउंसिल उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व चेयरमैन और फार्मेसिस्ट फेडरेशन उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष सुनील यादव ने बताया कि चिकित्सा क्षेत्र में औषधियों की विश्वसनीयता, गुणवत्ता एवं सही सलाह अनिवार्य है। फार्मेसिस्ट औषधियों का विशेषज्ञ होने के साथ ड्रग काउंसेलर भी है, वर्तमान परिदृश्य में औषधियों की खोज के बाद , सही भंडारण, सही वितरण और सही सलाह (सही कॉउंसिलिंग) से मानव जीवन को बचाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि कोविड संक्रमण काल मे फार्मेसिस्टों ने 'मास्टर की' के रूप में अपने आप को प्रस्तुत किया है। अंतरराष्ट्रीय फार्मास्यूटिकल फेडरेशन ने गत वर्ष विश्व फार्मेसिस्ट दिवस की थीम "Transforming global health” निर्धारित की थी।
फार्मेसिस्टों ने बदलते ग्लोबल परिवेश में खुद को बदला है। ग्रामीण क्षेत्र जो पूरे भारतवर्ष का लगभग 60% है, के साथ ही शहरी क्षेत्रों में टीमें बनाकर फार्मेसिस्ट मरीजों की ट्रेसिंग, और टेस्टिंग कर धनात्मक मरीजों की पहचान किया। सभी सर्वे टीम और टेस्टिंग टीम में फार्मेसिस्ट प्रमुख रूप से कार्य किया । इसके साथ ही लेवल वन से लेकर लेवल 5 तक के सभी कोविड-चिकित्सालयों तथा नान कोविड-चिकित्सालयों में औषधियों की आपूर्ति तथा मरीजों को औषधि देना व उनकी काउंसलिंग करने में फार्मेसिस्ट की प्रमुख भूमिका रही है।
सरकार द्वारा जारी प्रोटोकॉल के अनुसार होम आइसोलेट मरीजों को औषधियां वितरित करने के साथ लगातार उनके संपर्क में बने रहने और उन्हें आवश्यक सलाह देने हेतु आर आर टी टीमों के प्रमुख के रूप में फार्मेसिस्ट ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
वैश्विक बदलाव के दौर में फार्मेसिस्ट ने खुद को बहुउद्देश्यीय बनाते हुए बखूबी अपनी क्षमता, तकनीकी ज्ञान का प्रयोग जनहित में किया है।
भारत वर्ष में लगभग कुल तेरह लाख डिप्लोमा, बैचलर, मास्टर, पीएचडी फार्मेसी के साथ फार्म डी की शिक्षा प्राप्त फार्मेसिस्ट हैं। फार्मेसी चिकित्सा व्यवस्था की रीढ़ होती है , औषधि की खोज से लेकर , निर्माण, भंडारण करने, वितरित करने की पूरी व्यवस्था एक तकनीकी व्यवस्था है, जो फार्मेसिस्ट द्वारा ही की जाती है । चिकित्सालयों में अभी तक भर्ती मरीजों के लिए व्यवहारिक रूप से फार्मेसिस्ट के पद सृजित नही हो रहे हैं जबकि यह अत्यंत आवश्यक है।
ओपीडी में भी मानकों का पूरा पालन नही हो रहा, फार्मास्यूटिकल लैब नाम मात्र के हैं, औषधियों के निर्माणशालाओं में भी फार्मेसी प्रोफेशनल के स्थान पर अप्रशिक्षित लोगो से काम लिया जाता है। ड्रग की रेगुलेटरी बॉडी बहुत कमजोर है, मानव संसाधन कम हैं। जिसे मजबूत करने की आवश्यकता है। 'फार्मेसी' लोगो के जिंदगी से जुड़ी है, इसलिए इसे मजबूत किया जाना आवश्यक है।
फार्मेसिस्टों को क्रूड ड्रग का अध्ययन भी कराया जाता है, शरीर क्रिया विज्ञान, फार्माकोलॉजी, विष विज्ञान, ड्रग स्टोर मैनेजमेंट, माइक्रोबायोलॉजी सहित फार्मास्युटिक्स, फार्मक्यूटिकल केमिस्ट्री सहित विभिन्न विषयों का विस्तृत अध्ययन फार्मेसिस्ट को कराया जाता है। औषधि की खोज से लेकर, उसके निर्माण,भंडारण, प्रयोग , कुप्रभाव, दवा को ग्रहण करने, उसके पाचन, प्रभाव और उत्सर्जन (ADME) की पूरी जानकारी फार्मेसिस्ट को होती है , इसलिए औषधियों के विशेषज्ञ के रूप में आज फार्मेसिस्ट, जनता को सेवा दे रहा है। आम जनता को औषधि की जानकारी फार्मेसिस्ट से ही लेनी चाहिए।







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