












































बीमारियों का विवरण
महिलाएं समाज की रीढ़ हैं। परिवार और समाज की जिम्मेदारियों का निर्वहन करते समय वे अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता नहीं देती है। इस कारण वे रोगग्रस्त हो जाती हैं। डा बत्राज क्लिनिक द्वारा उनकी बीमारियों पर मुफ्त परामर्श और जागरूकता का कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। प्रस्तुत है डा बत्राज कंपनी समूह के संस्थापक, पद्मश्री डॉ मुकेश बत्रा द्नारा महिलाओं से सम्बंधित कुछ बीमारियों का विवरण।
थायराइड विकार
लगभग एक तिहाई भारत थायराइड विकार से पीड़ित है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में थायरॉयड विकार विकसित होने की संभावना आठ गुना अधिक होती है। थायराइड हार्मोन आपके शरीर में ऊर्जा, बढत और मेटाबाॅलिज्म के समन्वय के लिए जिम्मेदार है। महिलाओं में, यह प्रजनन प्रणाली में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, खासकर अगर थायरॉयड ओवरएक्टिव है या अन्डरएक्टिव है। हार्मोनल स्तर में यह असंतुलन असामान्य मासिक धर्म का कारण बन सकता है, अंडोत्सर्जन (ओवुलेशन) प्रक्रिया को प्रभावित करता है, गर्भावस्था में जटिलताएं पैदा कर सकता है और रजोनिवृत्ति की शुरुआत अपेक्षाकृत जल्दी भी हो सकती है।
होमियोपैथी से चिकित्सा
हाइपोथायरायडिज्म के उपचार में पारंपरिक दवा के साथ होम्योपैथिक दवा थायराइडिनम 3एक्स पर एक अध्ययन ने निष्कर्ष निकाला कि होम्योपैथिक दवा थायराइडिनम 3 एक्स और लेवोथॉराॅक्सिन की संयुक्त चिकित्सा ने वजन घटाने पर उल्लेखनीय प्रभाव डाला और अन्य लक्षणों से भी राहत दी। थायराइडिनम प्राथमिक हाइपोथायरायडिज्म के मामलों में जल्दी राहत देता है।
डा बत्राज में, थायराइड की समस्या वाली लगभग 70,000 महिला रोगियों में से 96.6 प्रतिशत में होम्योपैथिक उपचार से सकारात्मक परिणाम देखे गये हैं।
पॉलीसिस्टिक अंडाशय सिंड्रोम (पीसीओएस)
प्रसव उम्र की 10 में से 1 महिला इस बीमारी से प्रभावित होती हैं और उनमें से कम से कम आधी बिना जांच के रह जाती हैं। पीसीओएस एक हार्मोनल विकार है, जो प्रजनन उम्र की महिलाओं में आम है। यदि एक महिला को पीसीओएस का पता चला है, तो उसकी बहन में भी इस विकार की संभावना 40 प्रतिशत तक हो सकती है। तनाव पीसीओएस का लक्षण और संभावित कारण हो सकता है। यदि पीसीओएस का इलाज ना किया जाये तो इससे बांझपन, अवरोधक स्लीप एपनिया, मधुमेह, उच्च कोलेस्ट्रॉल, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और गर्भाशय के लाइनिंग का मोटा होना जैसी समस्याएं हो सकती है, और यदि आपका मासिक धर्म नियमित नहीं है तो यह अंततः कैंसर का कारण बन सकता है ।
होम्योपैथी प्रभावी रूप से पीसीओएस का इलाज करती है
पीसीओएस के लिए पारंपरिक उपचार इसके दिखाई देने वाले और सबसे अधिक परेशानी वाले लक्षणों का इलाज करता है। जबकि होम्योपैथी इस मूल कारण पर केंद्रित होती है। यह हार्मोनल असंतुलन को ठीक करने, ओवुलेशन प्रक्रिया को नियमित करने और मासिक धर्म को बहाल करने पर काम करती है। यह बिना किसी साइड-इफेक्ट के भी पीसीओएस से जुड़े लक्षणों का प्रभावी ढंग से इलाज करने में मदद करती है।
पारंपरिक और वैकल्पिक चिकित्सा पर हुए दूसरे अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन और प्रदर्शनी में प्रस्तुत एक अध्ययन ने साबित किया कि कि पारंपरिक चिकित्सा द्वारा अनुपचारित रहे पीसीओएस रोगियों के सैम्पल साइज में से 69 प्रतिशत मामलों का होम्योपैथी के उपयोग से सफलतापूर्वक इलाज किया गया।
डा बत्राज में, पीसीओ से ग्रसित लगभग 6,360 महिला रोगियों ने अपने होम्योपैथिक उपचार से सकारात्मक परिणाम देखे हैं।
रजोनिवृत्ति
बेटर इंडिया के अनुसार, वर्तमान में 45 वर्ष से अधिक उम्र की 65 मिलियन भारतीय महिलाएं हैं। जबकि भारत में रजोनिवृत्ति की औसत आयु लगभग 46 वर्ष है, यह अक्सर महिलाओं को बहुत पहले से प्रभावित करती है - यहां तक कि 30-35 वर्ष की उम्र में भी। यह माना जाता है कि 2025 मे रजोनिवृत्ति से गुजरने वाली महिलाओं की संख्या लगभग 73 मिलियन होगी।
रजोनिवृत्ति से गुजरने वाली महिलाएं अक्सर त्वचा और बालों में बदलाव जैसे लक्षणों का अनुभव करती हैं। रजोनिवृत्ति के दौरान एस्ट्रोजन का स्तर कम होने के कारण अक्सर सेक्स की इच्छा कम हो जाती है। मूत्र मार्ग में संक्रमण रजोनिवृत्ति का एक और आम लक्षण है। अन्य लक्षणों में अनिद्रा, योनि का सूखापन, गर्म फ्लश और मासिक धर्म में परिवर्तन शामिल हैं।
होम्योपैथी और रजोनिवृत्ति
यूएस नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के एक अध्ययन के अनुसार, रजोनिवृत्त गर्म फ्लश के 438 रोगियों में से 90 प्रतिशत महिलाओं ने इस समस्या के गायब होने या उनके लक्षणों के कम होने की जानकारी दी।
डा बत्राज में, रजोनिवृत्ति से गुजरने वाली लगभग 6,313 महिला रोगियों ने अपने होम्योपैथिक उपचार से सकारात्मक परिणाम देखे हैं।







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