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उत्तर प्रदेश

दिव्यांग बच्चों की पहचान और विकास हेतु लखनऊ में खुला शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र।

दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत सभी प्रकार की अक्षमताओं को कवर करते दिव्यांग बच्चों (0-6 वर्ष) के लिए चिकित्सीय, स्वास्थ्यलाभ देखभाल सेवाओं और प्री-स्कूल प्रशिक्षण के लिए सभी सुविधाएं प्रदान करेंगे।

हुज़ैफ़ा अबरार
June 18 2021 Updated: June 18 2021 02:31
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दिव्यांग बच्चों की पहचान और विकास हेतु लखनऊ में खुला शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र। प्रतीकात्मक

लखनऊ। दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के द्वारा दिनांक 17-6-21 को जन्म से 6 वर्ष तक की आयु वाले बच्चों में दिव्यांगता के लक्षणों की शीघ्र पहचान एवं शीघ्र हस्तक्षेपण हेतु भारत में 14 शीघ्र अर्ली इंटरवेंशन का वर्चुअल उदघाटन केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ० थावर चन्द गहलोत के कर कमलों द्वारा किया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री रतन लाल कटारिया, रामदास आठवले, कृष्णपाल गुर्जर एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग श्रीमती अंजली भावरा तथा संयुक्त सचिव श्रीमती तारिका रॉय की गरिमामयी उपस्थिति रही।   

इन 14 शीघ्र हस्तक्षेप केंद्रों में से एक शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र उत्तर प्रदेश के लखनऊ जनपद में स्थित समेकित क्षेत्रीय कौशल विकास, पुनर्वास एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण केंद्र में स्थापित किया गया है, जिसके वर्चुअल उद्घाटन के उपरान्त डॉ० एस० के ० श्रीवास्तव, राज्य आयुक्त दिव्यांगजन, उत्तर प्रदेश ने वास्तविक निरीक्षण कर केंद्र में प्रदान की जाने वाले सुविधाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की।  इस अवसर पर श्री रमेश पांडेय, निदेशक, समेकित क्षेत्रीय कौशल विकास, पुनर्वास एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण केंद्र, लखनऊ ने कहा कि शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र में प्रदान की जाने वाली सुविधाओं को उत्तर प्रदेश के सुदूर ग्रामीणांचल से सम्बंधित लाभाग्रहियों से जोड़ा जायेगा, जिससे प्राथमिक स्तर पर दिव्यांगता की रोकथाम की जा सके। 

उन्होंने बतया, “कुछ बच्चों में पाया जाता है उम्र बढ़ने के साथ उनमें चलने, बोलने या सुनने समेत मानसिक विकास नहीं हो पाता है। ऐसे विशेष बच्चों के लिए केंद्र सरकार ने सात राष्ट्रीय संस्थानों और सात समग्र क्षेत्रीय केंद्रों में अर्ली इंटरवेंशन सेंटर खोले ये सभी 14 क्रॉस डिसेबिलिटी अर्ली इंटरवेंशन सेंटर दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत सभी प्रकार की अक्षमताओं को कवर करते दिव्यांग बच्चों (0-6 वर्ष) के लिए चिकित्सीय, स्वास्थ्यलाभ देखभाल सेवाओं और प्री-स्कूल प्रशिक्षण के लिए सभी सुविधाएं प्रदान करेंगे। ये सभी सेवाएं सुलभ एवं सौंदर्य की दृष्टि से डिजाइन किए गए वातावरण में एक ही जगह प्रदान की जाएंगी।

डॉ रमेश पाण्डेय ने आगे बताया कि शोध अध्ययनों से पता चलता है कि प्रारंभिक बचपन (0-6 वर्ष) उल्लेखनीय मस्तिष्क विकास का समय है। यह महत्वपूर्ण अवधि है जो किसी व्यक्ति की आजीवन स्वास्थ्य, सामाजिक और आर्थिक क्षमता तक पहुंचने की क्षमता को निर्धारित करती है। अपने जीवन के शुरुआती दिनों में गुणवत्तापूर्ण बचपन हस्तक्षेप प्रदान करने से एक स्वतंत्र और सम्मानजनक जीवन जीने में सक्षम होने के लिए आवश्यक कौशल विकसित करने में मदद मिलती है। प्रारंभिक हस्तक्षेप शिशुओं और छोटे बच्चों को जोखिम में या विकलांगता और/या विकासात्मक देरी के साथ और उनके परिवारों के लिए उनके समग्र विकास, कल्याण और पारिवारिक और सामुदायिक जीवन में भागीदारी में मदद करने के लिए विशेष सहायता और सेवाएं प्रदान कर सकता है।

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