











































प्रतीकात्मक चित्र
सृष्टि में आदि काल से सम्भोग का मुख्य काम वंश को आगे चलाना व बच्चे पैदा करना है। सम्भोग इंसानों में चरम सुख प्राप्ति और प्यार या जज्बात दिखाने का भी एक रूप हैं। सम्भोग स्त्री और पुरुष दोनों का शारीरिक मिलन है। सम्भोग को सेक्सुअल इन्टरकोर्स, सहवास, मैथुन या सेक्स भी कहा। सहवास के द्वारा स्त्री और पुरुष दोनों को बराबर सुख की प्राप्ति होती है इसलिए इसे शास्त्रों में सम्भोग कहा गया है। यह बिलकुल प्राकृतिक क्रिया है। स्त्री और पुरुष के शारीरिक मिलन और चरम सुख तक पहुंचने में मानसिक स्थिति एक बहुत बड़ा कारक है। आईये इस प्रक्रिया को समझतें हैं।
यौन इच्छा, कामोत्तेजना और चरम सुख की प्राप्ति एक जटिल प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया में पूरा सेंट्रल नर्वस सिस्टम काम करता है। सेक्स को आनंददायक महसूस करने के लिए, मस्तिष्क को यौन संवेदनाओं के संकेतों कोसमझना पड़ता है। शरीर के यौन क्षेत्रों की नसें मस्तिष्क को विशिष्ट संकेत भेजती हैं, और मस्तिष्क उन संकेतों का उपयोग, विभिन्न यौन संवेदनाओं को पैदा करने के लिए करता है।
यौन सुख में कई न्यूरोट्रांसमीटर की भूमिका होती है। न्यूरोट्रांसमीटर रासायनिक संदेशवाहक होते हैं जो मस्तिष्क को शरीर के अन्य क्षेत्रों के साथ संवाद करने में मदद करते हैं।
1. प्रोलैक्टिन - Prolactin
संभोग के तुरंत बाद प्रोलैक्टिन का स्तर बढ़ जाता है। इस कारण से थोड़े देर के लिए संभोगरत स्त्री और पुरुष की इच्छा सेक्स से हट जाती है।
2. डोपामाइन - Dopamine
यह एक हार्मोन है जो यौन क्रिया, इरेक्शन और स्खलन की प्रक्रिया से से जुड़ा होता है। यह कामोत्तेजना को बढ़ाता है। उत्तेजित अवस्था में यह शरीर के अंदर स्रावित होता है। सेक्स के दौरान डोपामाइन का बढ़ना जारी रहता है,
3. सेरोटोनिन - Serotonin
शरीर में सेरोटोनिन के कम स्तर के कारण इरेक्शन होता है और स्खलन में देरी होती है। स्त्री और पुरुष दोनों अधिक खुश महसूस करतें है। इसके सामान्य स्तर चिंताएं कम होती हैं और भावनात्मक स्थिरता आती है। जिसके कारण यौन सुख में वृद्धि होती है।
4. नोरएपिनिफ्रीन - Norepinephrine
यह रक्त वाहिकाओं को पतला और संकुचित करता है, जिससे जननांग अधिक संवेदनशील हो जाते हैं। शरीर इसको यौन उत्तेजना के दौरान रिलीज करता है। सेक्स के दौरान एपिनेफ्रिन (एड्रेनालाईन हार्मोन) का बढ़ना जारी रहता है,
5. नाइट्रिक ऑक्साइड - Nitric oxide
सेक्स के दौरान शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड की मात्रा बढ़ जाती है। इसके कारण रक्त प्रवाह में वृद्धि होती है। यही कारण है कि शरीर के कुछ हिस्सों को फ्लश कर सकते हैं। नाइट्रिक ऑक्साइड के बढे हुए स्तर के कारण स्त्रियों के निपल्स अधिक संवेदनशील और खड़े हो जाते हैं।
6. ऑक्सीटोसिन - Oxytocin
इसे लव या बॉन्डिंग हार्मोन के रूप में भी जाना जाता है। यह अंतरंगता और निकटता की भावनाओं को बढ़ावा देता है। ऑक्सीटोसिन हॉर्मोन के कारण यौन गतिविधि, इरेक्शन, स्खलन, आदि की क्रिया होती है। ऑक्सीटोसिन के स्राव से ही योनि की दीवारें में संकुचन होता है।
यूरोलॉजिस्ट और यौन स्वास्थ्य विशेषज्ञ, डॉ जैमिन ब्रह्मभट्ट कहते हैं, "सेक्स अच्छा है।'' मस्तिष्क सेक्स से पहले, सेक्स के दौरान और सेक्स के बाद शरीर को अद्भुत बनाने की क्षमता रखता है।
सेक्स आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली के साथ-साथ आत्मविश्वास और रचनात्मकता को भी बढ़ाता है। विल्क्स यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन से पता चला है कि सप्ताह में एक या दो बार सेक्स करने वाले लोगों में इम्युनोग्लोबुलिन ए में 30% की वृद्धि हुई, जो प्रतिरक्षा को मजबूत करता है।







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