











































प्रतीकात्मक
मौसम बदलते ही अक्सर लोगों की नाक से पानी आना, आंखों में खुजली होना, थकान रहने जैसी कई तरह की शिकायतें होती हैं, लेकिन क्या कभी आपने गौर किया कि ऐसा क्यों होता है। ऐसा इसलिए होता है कि धूल में कुछ हानिकारक कण मौजूद होते हैं, जो एलर्जी का कारण बनते हैं। इसे डस्ट एलर्जी भी कहते हैं।
यह सिर्फ धूल से ही नहीं, बल्कि धुएं, मौसम में बदलाव, माइक्रो पार्टिकल्स के हवाओं में ज्यादा होने और प्रदूषण के बढ़ते स्तर के कारण भी होती है। साथ ही साथ सांस लेने में भी परेशानी होती है। कई बार तो सीने में जकड़न और जुकाम जैसी समस्या भी होती है। ऐसा नहीं कि यह सिर्फ घर के बाहर जाने पर होती है, बल्कि घर में रहने वाले व्यक्ति इससे ज्यादा पीड़ित होते हैं।
इस एलर्जी का जोखिम वैक्यूम करने, झाडू-पोछा करते समय और झाडू लगाने के दौरान भी हो सकता है, क्योंकि सफाई के दौरान धूल के कण हवा में उड़ने लगते हैं और सांस के अंदर चले जाते हैं। ऐसा नहीं कि इस परेशानी का कोई इलाज नहीं। घर में मौजूद प्राकृतिक चीजें डस्ट एलर्जी की समस्या को कम करने में सहायक हो सकती हैं। आइए जानते हैं, एलर्जी के कारण, लक्षण और उपायों के बारे में। कुछ ऐसी घरेलू प्राकृतिक चीजों के बारे में जानते हैं, जो डस्ट एलर्जी को कम करने में मदद करती हैं।
डस्ट एलर्जी के कारण
धूल में मौजूद कई तरह के डस्ट माइट्स यानी कि सूक्ष्मजीव (माइक्रोऑर्गनिज्म) ही डस्ट एलर्जी का कारण बनते हैं। जिसे आंखों से देख पाना संभव नहीं होता, लेकिन इनका भोजन त्वचा में मौजूद मृत कोशिकाएं होती है और ये नमी वाले वातावरण में पनपते हैं।
· कॉकरोच द्वारा छोड़े जाने वाले हानिकारक बैकटीरिया से भी होती है। ये बैक्टीरिया सांस लेते वक्त शरीर में जाते हैं और एलर्जी होने लगती है।
· मोल्ड पर्यावरण में मौजूद एक तरह का फंगस है। चाहे घर के अंदर होया बाहर, हमेशा सभी जगह कोई न कोई मोल्ड मौजूद रहते हैं। पृथ्वी पर लाखों वर्षों से हैं। यह हवा या कई सतहों पर पाए जाते हैं। जिस जगह नमी होती है, वहां ये पनपते हैं। एलर्जी का ये भी कारण हो सकते हैं।
· घर में पालतू जानवर जैसे कि कुत्ते और बिल्ली पालते हैं तो उसके शरीर से गिरने वाले बाल और रूसी के कारण भी डस्ट एलर्जी हो सकती है।
· हर साल वसंत, ग्रीष्म और पतझड़ के समय पेड़ों से पराग निकलते हैं, जो हवा में मिल जाते हैं। ये पराग नाक और गले में पहुंचकर एलर्जी पैदा करते हैं।
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डस्ट एलर्जी के लक्षण
नीचे दिए गए लक्षणों से जानिए डस्ट एलर्जी के बारे में
· छींक आना
· अक्सर नाक का बहना और नाक का भरा होना
· थकान और कमजोरी
· आंखों में सूजन
· खांसी
· आंख, नाक और गले में खुजली होना
· लाल और पानी से भरी आंखें
· आंखों के नीचे काले घेरे
· अस्थमा जैसे लक्षण
· कान बंद होना और सूंघने की क्षमता में कमी
· गले में खराश
· थकान और चिड़चिड़ापन
· सिरदर्द
· त्वचा पर लाल चकत्ते
चलिए जानते हैं डस्ट एलर्जी के लिए घरेलू उपाय के बारे में
1.सेब का सिरकाः
एक गिलास गर्म पानी में सेब का सिरका डालकर अच्छी तरह मिला लें और स्वाद के लिए इसमें थोड़ा सा शहद मिलाएं। इस घोल रोज एक से दो गिलास सेवन करने से एलर्जी में आराम मिलता है।
2. एसेंशियल ऑयलः
यूकिलिप्टस या लैवेंडर की ऑयल की 3 या 4 बूंदे भाप लेने वाले डिफ्यूजर में डालें और भाप लें। इस प्रक्रिया को दिन में 1 से 2 बार करें। इसका इस्तेमाल करने से श्वास संबंधी विकारों जैसे कि अस्थमा में सहायक हो सकता है।
3. शहदः
एक कप पानी में दो चम्मच कच्चे शहद का सेवन कीजिए। इसे रोजाना दिन में दो बार दोहराइए। शहद में एंट-इंफ्लैमेंटरी और एंटी-माइक्रोबियल गुण होने के कारण यह सूजन और मोल्ड्स को खत्म करने का काम करता है और आपको इससे होने वाली एलर्जी से राहत दिलाता है।
4. डीह्यूमिडिफायरः
यह एक ऐसी तकनीक है, जिसमें ऐसे उपकरण का उपयोग किया जाता है। यह उपकरण हवा में मौजूद नमी को कम करता है। डस्ट माइट्स नमी वाली जगह पर ज्यादा पाए जाते हैं। इस तकनीक की मदद से भी डस्ट एलर्जी से निजात पा सकते हैं।
5. हल्दीः
किचन में मौजूद हल्दी में एंटी इंफ्लैमेंटरी और एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं। ये एलर्जी को फैलने से रोकने का काम करते हैं। हल्दी में पाया जाने वाला करक्यूमिन एक बहुत ही अच्छा एंटीएलर्जिक का काम करता है। एक कप दूध में हल्दी डालकर उबाल लें और ठंडा होने पर इसमें शहद मिलाकर पी लें। इसके सेवन से भी एलर्जी में राहत मिल सकती है।







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