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लखनऊ। हिंसा के खिलाफ देशभर के चिकित्सकों ने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत आज देश भर में सांकेतिक रूप से विरोध प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन को नेशनल प्रोटेस्ट डे के रूप में मनाया गया। आईएमए लखनऊ ने डाॅक्टर और उनके प्रतिष्ठानों पर हो रहे हमले की कडी निंदा किया।

जनता के सरोकार को प्राथमिकता देते हुए डॉक्टरों ने आज काले मास्क, और काली पट्टी पहनकर इमरजेंसी, आईपीडी एवं ओपीडी सेवाओं में कार्य किया।
आईएमए के पदाधिकारियों ने बताया कि कोविड काल के दौरान डाॅक्टरों ने पूरे मनोयोग से, बिना अपनी और अपने परिवार की चिंता हुए मानवता की सेवा किया। कोविड-19 के चपेट में आकर मरीज़ों को सेवा दे रहे 725 डाॅक्टर और दो हज़ार स्वास्थ्यकर्मी काल कलवित हो गए। अभी भी तमाम डाॅक्टर और स्वास्थ्यकर्मी कोविड-19 के संक्रमण के जूझ रहे हैं।
इस विपत्ति के समय में भी कुछ अराजकतत्वों ने जानबूझकर डाॅक्टरों के साथ अभद्र व्यवहार किया, स्वास्थ्यकर्मियों से मारपीट किया और अस्पतालों को नुकसान पहुँचाया। हाल में असम में हुई एक हिंसा की घटना में डाक्टर के शरीर में अनेक फैक्चर हो गये।

आईएमए ने डाॅक्टरों एवं उनके प्रतिष्ठानों पर हो रहे हमले की कडी निंदा किया और जन मानस से अपील किया कि मानव सेवा में जुटे चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मियों पर हमला करने वालों को हतोत्साहित करें।
अगली रणनीति के तहत आईएमए जिलाधिकारियों के माध्यम से ज्ञापन सौपकर प्रधानमन्त्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री तक अपनी पीड़ा को पहुचाएंगें। ज्ञापन के माध्यम से ही वे केंद्रीय अस्पताल और हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स सुरक्षा अधिनियम में आईपीसी की धारा और आपराधिक गतिविधि संहिता शामिल करने, प्रत्येक अस्पताल की सुरक्षा के मानक बढ़ाने, अस्पतालों को सुरक्षित क्षेत्र घोषित करने, दोषियों के खिलाफ फास्ट—ट्रैक अदालत में सुनवाई करवाने और उन्हें सख्त से सख्त सजा दिलाने के प्रावधान को शामिल करवाने की मॉंग करेंगे।
कार्यक्रम में डॉ रुकसाना खान, डॉ रमा श्रीवास्तव, डॉ सूर्यकांत, डॉ पी के गुप्ता, डॉ मनोज अस्थाना, डॉ जे डी रावत, डॉ उत्कर्ष त्रिपाठी, डॉ विनोद कुमार तिवारी, डॉ सीमा तिवारी, डॉ अभिषेक शुक्ल, डॉ आशुतोष कुमार श्रीवास्तव इत्यादि मौजूद रहे।







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