











































प्रतीकात्मक चित्र
नागपुर। नागपुर के एक अस्पताल में लापरवाही और संवेदनहीनता की एक भयानक घटना घटित हुई है। अस्पताल की लापरवाही के चलते छह थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे एचआईवी और हेपेटाइटिस बी के शिकार हो गए। जिनमें एक बच्चे की ब्लड ट्रांसफ्यूजन के दौरान मौत हो गई।
घटना की मीडिया रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने महाराष्ट्र सरकार (Maharashtra government) को नोटिस जारी किया। राज्य खाद्य व औषधि प्रशासन विभाग (Food and Drug Administration Department) के सचिव को छह सप्ताह के भीतर मामले की प्रारंभिक जांच को लेकर रिपोर्ट प्रस्तुत करने और आपराधिक कार्यवाही शुरू करने का नोटिस जारी किया गया है।
स्वास्थ्य विभाग (Health Department) के सहायक निदेशक डॉ रवि धाकाटे ने बताया कि एक समिति घटना की जांच कर रही है। उन पैथोलॉजी को चिन्हित किया जा रहा है जहां से बच्चों को दूषित रक्त (infected blood) मिला था। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जांच में छह बच्चों का एचआईवी (HIV) और हेपेटाइटिस बी (Hepatitis B) से संक्रमित होना पाया गया है। जिनमें से एक की मौत हो गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।
एनएचआरसी के नोटिस में मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए उल्लेख किया गया है कि छह बच्चों का इलाज थैलेसीमिया के लिए किया जा रहा था, जिसमें खून चढ़ाने के लिए पहले न्यूक्लिक एसिड टेस्ट (nucleic acid test) के माध्यम से जांच की जानी थी। इस सुविधा के अभाव में बच्चों को दूषित रक्त चढ़ा दिया गया। ऐसे में ब्लड ट्रांसफ्यूजन (blood transfusion) की वजह से तीन बच्चे एचआईवी पॉजिटिव और तीन अन्य हेपेटाइटिस बी से संक्रमित हो गए, उनमें से एक की मौत हो गई।







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