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मैनपुरी। आज के युग में झोलाछाप डॉक्टर लगभग हर जगह पर मिल जाएंगे। गांव देहात के इलाको में इनकी संख्या ज़्यादा है। ग्रांमीण जनता में जागरुकता की कमी और पेशेवर डाक्टर तक पहुंच का अभाव उनको झोलाछापों तक पहुंचा देता है। गलत इलाज से कोई दुर्घटना हो जाने की दशा में ये काली कमाई और सफेदपोशों से मिले संरक्षण की वजह से बच निकलते हैं। ऐसे भी प्रकरण सामने आएं हैं कि जिस परिवार के साथ अनहोनी हो जाती है उसके सामने लाखों फेंककर उस परिवार का मुंह बंद कर देते हैं।
स्वास्थ्य विभाग झोलाछापों के खिलाफ कागजी अभियान से आगे नहीं बढ़ता है। इस कारण इनका धंधा बदस्तूर जारी है। हालत ये है कि इनकी सक्रियता अब जिला मुख्यालय से लेकर सभी कस्बों तक दिखाई पड़ रही है। जनपद के कसबे कुरावली, भोगांव, बेवर, कुसमरा, करहल, घिरोर, औंछा, आलीपुर खेड़ा आदि में झोलाछापों की बाढ़ आ गयी है।
क्षेत्रवासी कुरावली क्षेत्र में घटी एक दुर्घटना के बारे में जिक्र करते हुए बताते है कि क्षेत्र के गांव बरौलिया में एक महिला के पति की मृत्यु कई साल पहले हो चुकी थी, महिला के बच्चे छोटे छोटे है। महिला बीमार होने पर बरौलिया मोड स्थित एक झोलाछाप से दवा लेने लगी। कुछ दिन दवाई लेने के बाद तबियत बिगड़ती ही चली गई। तबियत बिगड़ने पर महिला ने झोलाछाप से दवाई ली उसी दिन महिला की मौत हो गई। महिला की मौत के बाद उसके घर में कोई ऐसा नही था जो इस मामले में आवाज बुलंद तरीके से उठा पाता। कुछ दिनो के बाद मामला शांत हो गया, और झोलाछाप की दूकान चलती रही।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी मैनपुरी डॉ एके पाण्डेय बतातें हैं झोलाछापों की जानकारी नही है। जल्दी ही चिन्हित करके इनके खिलाफ अभियान चलाया जाएगा। फर्जी पाए जाने पर इनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।







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