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लखनऊ। देश में स्वास्थ्य देखभाल के बारे में निर्णय लेते समय मरीज की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कानून बनाए गए हैं फिर भी लगभग 5,200,000 चिकित्सा त्रुटियां हर साल होती हैं। इसके साथ ही स्वास्थ्य कर्मियों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए भी कानून बनाए गए हैं। नियम-कानून के बाद भी मेडिकोलीगल मामलें बढ़ते जा रहे हैं।
इसी बात को ध्यान में रखते हुए डॉ राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (RMLIMS) में लीगल ओपिनियन ऑन राइट एन्ड डिफेन्स फॉर डॉक्टर्स (Legal Opinion on Right and Defense for Doctors) नामक सीएमई (CME) का आयोजन एलटी -5, अकादमिक ब्लॉक, डॉ आरएमएलआईएमएस में किया गया। इस कंटीन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन (CME) में लोहिया अस्पताल से फॉरेंसिक मेडिसिन एंड टॉक्सिकोलॉजी विभाग, अस्पताल प्रशासन अकादमी (AHA) विभाग यूपी और ए आर ए एसोसिएट्स ने भाग लिया।
दीप प्रज्ज्वलन के बाद मेडिकोलीगल को लेकर नाटिका का मंचन किया गया। अतिथियों का स्वागत डॉ ऋचा चौधरी, प्रोफेसर और प्रमुख, फोरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग (Department of Forensic Medicine and Toxicology) द्वारा किया गया। इसके बाद निदेशिका प्रो सोनिया नित्यानंद (Prof Sonia Nityanand), डीन प्रो नुज़हत हुसैन, सीएमएस प्रो राजन भटनागर, विशिष्ट अतिथि लखनऊ पुलिस आयुक्त डी के ठाकुर (Lucknow Police Commissioner) ने मेडिकोलीगल मामलों (Medicolegal matters) को लेकर अपने व्याख्यान दिए जिसमे डॉक्टरों द्वारा लिखे जाने वाले प्रिस्क्रिप्शन (prescription) पर भी विचार-विमर्श हुआ।
अतिरिक्त महाधिवक्ता विनोद शाही (Additional Advocate General) ने लीगल फर्स्ट एड (Legal First Aid), फिजिशियन की जिम्मेदारियां (responsibilities of Physician) और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के नियमों (rules of healthcare sector) की जानकारियां दी।
अधिवक्ता रत्नेश अवस्थी ने स्वास्थ्य देखभाल में लागू कानूनों से संबंधित भारत के कानूनी ढांचे (applicable laws in healthcare) पर अपना व्याख्यान दिया। डॉ आर हर्षवर्धन ने चिकित्सा पद्धति के कानूनी पहलू (legal aspects of medical system) बताएं। उन्होंने कहा कि रोगी का उपचार करते समय अधिक से अधिक सावधानी बरतना (maximum precautions while treating the patient) अनिवार्य हो गया है।
केएस लॉ चैंबर की काव्या सिंह ने कार्यस्थल के यौन उत्पीड़न से संरक्षण (Protection from Sexual Harassment at Workplace) (PoSH) के बारे में जागरूक किया। उन्होंने क़ानून से संबंधित विभिन्न पहलुओं, यौन उत्पीड़न, नियोक्ता के दायित्व, पीड़ित के लिए उपलब्ध उपचार/सुरक्षा उपाय, जांच की प्रक्रिया के बारे में बताया।
मेट्रोपोलिस डायग्नोस्टिक्स (Metropolis Diagnostics) से डॉ नीलेश और डॉ पूजा त्रेहन ने बताया कि दैनिक अभ्यास में मेडिकोलीगल मामलों को रोककर (preventing medicolegal cases) सफलता कैसे प्राप्त की जाए। डॉ ऋचा चौधरी ने मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट (Medical Termination of Pregnancy Act) में हालिया विकास, इसके संशोधन और यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम, 2012 (POCSO) के साथ इसके संघर्ष पर विचार-विमर्श किया।
सीएमई में कानून और चिकित्सा के क्षेत्र से प्रतिनिधियों की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल की गई। अस्पताल प्रशासक (Hospital administrators), चिकित्सक (doctors), नर्स (nurses), कानून निर्माता (law makers) और इनके तहत अध्ययन करने वाले छात्र (medical students) इसमें प्रमुख रूप से भागीदार रहें।







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