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लखनऊ। मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमन्त्री तथा चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार पटरी पर लाने का प्रयास कर रहें हैं। इसके लिए औचक निरिक्षण तथा स्वास्थ्य विभाग में पदों पर भर्तीयों का काम भी तेजी से चल रहा हैं लेकिन राजधानी से सटे एक जनपद में मानकविहीन ट्रामा सेंटर संचालित हो रहा है जिसकी वहज से वहां के मरीज दम तोड़ रहें हैं और उन्हें लखनऊ रेफर किया जा रहा है।
सीतापुर (Sitapur) जनपद के खैराबाद के जमैयतपुर (Khairabad) में 19 दिसम्बर 2016 से 70 बेड का ट्रामा सेंटर (70-bed trauma center) संचालित हो रहा है लेकिन जरूरी संसाधनों का पूरी तरह अभाव है। अभी स्टाफ की तैनाती भी नहीं हो पाई है। हाल ही में एक ओपीडी (OPD) शुरू की गई मगर इमरजेंसी सेवाएं (no emergency services) नहीं हैं। हाल ही में चार डॉक्टरों की भी तैनाती की गई है।
ट्रामा सेंटर में बिजली का कनेक्शन तथा पानी की सुविधाएं तो मौजूद हैं लेकिन मशीनरी चलाने के लिए इमरजेंसी जनरेटर की कोई व्यवस्था मौजूद नहीं है। अभी तक ना ही कोई मशीनरी मौजूद है और न ही पैथोलॉजी (pathology)। सिर्फ प्राथमिक अस्पताल (primary hospital) जैसी सुविधाएं ही मिल रही हैं।
जबकि सीतापुर में ट्रामा सेंटर (trauma center in Sitapur) की नितांत आवश्यकता है। खैराबाद के ट्रामा सेंटर में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी ना होने (non-completion of health services) का खामियाजा जनपदवासियों को भुगतना पड़ रहा है। तमाम बार घायलों को समय से इलाज नहीं मिल पता है (injured do not get timely treatment) और लखनऊ रेफर (referred to Lucknow) किया जाता है। कई मरीज तो रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं (Many patients die on the way)।
50 लाख की जनसँख्या पर बने इस मानकविहीन ट्रामा सेंटर पर अभी मुख्यमन्त्री (Chief Minister) योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) और उपमुख्यमन्त्री तथा चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक (Deputy Chief Minister and Medical Health Minister Brajesh Pathak) की निगाहें नहीं पहुंची हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग (UP health department) भी पूरी तरह आँखे बंद किए बैठा है।







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