











































प्रतीकात्मक
लंबे समय से किसी एक स्थिति में बैठने या काम करने पर हाथ-पैर में झुनझुनी होना आम बात है लेकिन यहीं झुनझुनी अगर लंबे समय तक बनी रहे या बिना किसी कारण के होने लगे तो चिंता का विषय हो सकता है। वैसे तो इस तरह की झुनझुनी (tingling) के कई कारण हो सकते है लेकिन कार्पल टनल सिंड्रोम हाथ की झुनझुनी का एक आम कारण है जो शुरूआती स्टेज में ईलाज से आसानी से ठीक हो सकता हैं।
आइए जानते हैं कार्पल टनल सिंड्रोम के बारें में - Know about Carpal Tunnel Syndrome
हमारी दोनों कलाइयों में एक छोटी सुरंग सी होती है जिसे कार्पल टनल कहा जाता हैं यह टनल कुछ छोटी-छोटी हड्डियों और फ्लेक्सर रेटिनाकलम (flexor retinacalum) नामक संरचना से मिलकर बनता है। इस संरचना से कई अन्य नसों के साथ एक महत्वपूर्ण नस गुजरती है जिसे मीडियन नर्व (median nerve) कहा जाता है। यह नस हमारे अगूंठे के पास की दो उंगलियों और अनामिका उंगली (ring finger) के आधे हिस्से से संदेश मस्तिष्क तक ले जाने में मदद करती है। जब किसी कारणवश यह मीडियन नर्व इस कार्पल टनल में दबने लगती है तो इसके लक्षण आने लगते हैं जैसे हाथ में दर्द, झुनझुनी या कमजोरी (खासकर अंगूठे की)। इस सिंड्रोम की तकलीफें कुछ काम करने के बाद और रात के समय ज्यादा बढ़ जाती हैं। धीरे-धीरे तकलीफ अधिक बढ़ जाने पर हाथ से कुछ भी कर पाना या सोना मुश्किल होने लगता हैं।

कारण - Reason
1) ऐसे कार्य जिसमें कलाई का इस्तेमाल ज्यादा होता हैं। अगर थोड़ा गौर करें तो मालूम पड़ेगा कि किस काम में कलाई का अधिक उपयोग हो रहा हैं। जैसे अधिक बाइक चलाना, कम्प्यूटर पर की-बोर्ड का अधिक उपयोग, व्यावसायिक रूप से हैण्ड मेड चॉकलेट को रैपर में लपेटना आदि।
2) हाइपोथायरॉडिजम - Hypothyroidism
3) डायबिटिज - Diabetes
4) आर्थराइटिस - Arthritis
5) मोटापा - Obesity
6) गर्भावस्था - Pregnancy
7) एक्रोमिगेली - Acromegaly
इनमें से पहले तीन कारण कार्पल टनल सिंड्रोम के लिए ज्यादा जिम्मेदार होते हैं।
निदान - Diagnosis
अधिकांश मामलों में लक्षणों के- आधार पर इस बीमारी का पता लगाया जा सकता है। टिनल साइन (tinel sign) और फालेन साइन (fallen sign) अगर मरीज में पॉजिटिव हों तो डायग्नोसिस की पुष्टि हो जाती हैं। इसमें सबसे महत्वपूर्ण टेस्ट होता है- नर्व कंडक्शन स्टडी (nerve conduction study) जिससे न केवल इस सिंड्रोम के होने का पता चलता है बल्कि उसकी तीव्रता का भी पता चल जाता है।
उपचार - treatment
1) हल्के और मध्यम स्टेज के सिंड्रोम में डॉक्टर आपको पहनने के लिए हाथ और कलाई में एक स्प्लीन्ट (splint) देते हैं जिसे कम से कम रात में पहनना जरूरी है। इसके अलावा डाक्टर आपको तुरंत आराम के लिए कुछ दवाइयाँ देते हैं और कुछ व्यायाम बताते है और जिस काम की वजह से यह समस्या पैदा हुई है उससे बचने की सलाह देते हैं। अगर आपको थायराइड या डायबिटिज की समस्या है तो उसका भी सही उपचार करना बेहद जरूरी है ताकि आपको स्थायी आराम मिल सके।
2) हल्के और मध्यम दर्जे के कुछ मरीज सामान्य दवाइयों और स्प्लीन्ट से ठीक नही हो पाते हैं ऐसे मरीजों को स्टीरॉइड का इंजेक्शन दिया जा सकता है जिससे अधिकांश मरीजों को फायदा हो जाता है। यदि इसके बावजूद लाभ ना हो तो सर्जरी भी की जा सकती है।
3) अगर कार्पल टनल सिंड्रोम बहुत अधिक बढ़ गया हो तो कुछ मामलों में सीधे ही सर्जरी की आवश्यकता होती है अन्यथा अंगूठे में स्थायी कमजोरी आ सकती है।
इसलिए जब भी इस बीमारी से संबंधित लक्षण आप में दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें। यदि आप शुरूआत में ही उपचार करा लेते हैं तो सर्जरी और भयंकर तकलीफों से आप बच सकते हैं।
लेखक - डॉ. हुमन प्रसाद सिन्हा, कंसल्टेंट – न्यूरोलोजिस्ट, एनएच एमएमआइ नारायण सुपरस्पैशलिटी हॉस्पिटल, रायपुर







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