











































प्रतीकात्मक चित्र
वाराणसी। मौजूदा जीवनशैली तमाम रोगों के साथ हार्ट डिजीज को बड़े पैमाने पर साथ लेकर आ रही है। मॉडर्न मेडिकल साइंस में इसका इलाज काफी महंगा और कष्टदायक है। ऐसे में बीएचयू से हृदय रोग के आयुर्वेदिक उपचार से जुडी एक राहत भरी खबर आई है। बीएचयू लगातार ऐसे प्रयोग करता रहता है जिससे भारतीय आयुर्वेद तथा चिकित्सा पद्धति का प्रचार प्रसार होता रहे।
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में मॉडर्न मेडिकल साइंस (Modern Medical Science) और आयुर्वेद (Ayurveda) संकाय एक साथ मिलकर चरक संहिता (Charak Sanhita) पर शोध करेगा जिससे कि हृदय रोग (Heart disease) में उपयोग की जाने वाली वनस्पतियों तथा औषधियों का प्रयोग फिर से किया जा सके।

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय आयुर्वेदिक औषधियों (Ayurvedic medicines) पर शोध कर उन्हें आधुनिक मेडिकल साइंस की कसौटी पर कसने की तैयारी कर रहा है। यूनिवर्सिटी के भारतीय चिकित्सा संस्थान (Indian Institute of Medicine) में मॉडर्न मेडिसिन फैकल्टी और आयुर्वेद संकाय (Ayurvedic Faculty) साथ मिलकर चरक संहिता पर शोध कर रहें हैं।
वैद्य सुशील कुमार दूबे (Vaidya Sushil Kumar Dubey), आयर्वुेद विभाग, शरीर क्रिया विज्ञान, ने बताया कि देश दुनिया में हार्ट प्रॉब्लम्स (heart problems) बढ़ती जा रही है। मॉडर्न मेडिकल साइंस में ट्रीटमेंट काफी महंगे और संसाधन भी सीमित हैं। ऐसे में प्राचीन भारतीय आयुर्वेद (ancient Indian Ayurveda) के ग्रंथों में इस संबंध में सटीक उपचारों (Ayurvedic treatment of heart disease) पर शोध कार्य किए जा रहे हैं जिससे कि वनस्पतियों के प्रयोग से सस्ते उपचार की राह सुगम हो जाए।
बीएचयू के वैद्य सुशील कुमार दूबे ने कहा कि चरक संहिता में हृदय रोग के लिए महाकषाय में विस्तृत वर्णन मिलता है। हृदय महाकषाय में हृदय रोग (Mahakashaya for heart disease) के लिए वनस्पतियों का उल्लेख किया गया है जिसको आज के समय में उपयोग किया जा सकता है। इनमे आम, आमड़ा, बड़हर, करौंदा, इमली, अम्लवेतस, बड़ी बेर, छोटी बेर, अनार और विजौरा शामिल हैं।
इस शोध के पूरे हो जाने पर भारत की आयुर्वेदिक क्षमता (India's Ayurvedic potential) का डंका फिर से एक बार पूरी दुनिया बजेगा और सही मायनों में आयुर्वेद की पहचान कर दुनिया मेडिकल टूरिज़्म (medical tourism) के लिए अपने देश का रुख करेगी। साथ ही इससे आयुर्वेद में रिसर्च तथा कैरियर की सम्भावना (research and career prospects in Ayurveda) को बहुत बल प्राप्त होगा।







एस. के. राणा January 13 2026 0 3059
एस. के. राणा January 20 2026 0 2681
हुज़ैफ़ा अबरार February 07 2026 0 2618
हुज़ैफ़ा अबरार February 05 2026 0 2513
एस. के. राणा February 01 2026 0 2149
हुज़ैफ़ा अबरार January 25 2026 0 1890
एस. के. राणा February 04 2026 0 1883
सौंदर्य
सौंदर्या राय May 06 2023 0 102019
सौंदर्या राय March 09 2023 0 106393
सौंदर्या राय March 03 2023 0 106709
admin January 04 2023 0 106725
सौंदर्या राय December 27 2022 0 97047
सौंदर्या राय December 08 2022 0 85484
आयशा खातून December 05 2022 0 140161
लेख विभाग November 15 2022 0 109253
श्वेता सिंह November 10 2022 0 158526
श्वेता सिंह November 07 2022 0 109431
लेख विभाग October 23 2022 0 94170
लेख विभाग October 24 2022 0 97649
लेख विभाग October 22 2022 0 103365
श्वेता सिंह October 15 2022 0 106263
श्वेता सिंह October 16 2022 0 100630
भारत में कोविड-19 टीकाकरण अभियान के तहत 32.36 करोड़ खुराकें लगाई जा चुकी हैं, वहीं अमेरिका ने 32.33
अधिक मात्रा में प्रोटीन लेने से मसल मास बढ़ता है और Metabolism भी बढ़ता हैं। इसलिए हर भोजन में प्रोटीन
भोपाल के भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आइसर) ने जीनोम एडिटिंग तकनीक का नया प्रयोग किया
अपोलोमेडिक्स हॉस्पिटल के गोमतीनगर में सुपरस्पेशलिटी क्लिनिक का उद्घाटन जल शक्ति व फ्लूड कण्ट्रोल मंत
मंकीपॉक्स बीमारी के फैलने के लिए बंदरों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। लोगों को यह जानने की जर
अस्पताल के जिम्मेदारों ने बताया कि जिस समय की फोटो लगाई गईं। उस वक्त रिंकू सिंह ही सिस्टर इंचार्ज थी
वैज्ञानिकों ने चूहे के स्टेम सेल से भ्रूण को विकसित किया है। शोधकर्ताओं ने इसके लिए न तो कोई निषेचित
यदि आप गर्भवती हैं और कोविड पॉजिटिव हैं या रह चुकी तो कोविड को लेकर कतई न घबराएं। कोविड जैसी संक्राम
केंद्र सरकार की तरफ से आयोजित नेत्रदान पखवाड़ा 25 अगस्त से 8 सितंबर तक आयोजित किया जा रहा है, इसी कड
हर पेरेंट्स अपने बच्चे को ऐसा खाना खिलाना चाहते हैं जिससे उनकी ग्रोथ हो, बोन हेल्थ सही हो और साथ ही

COMMENTS