











































डॉ. आशुतोष कुमार दुबे ,मुख्य चिकित्सा अधिकारी, गोरखपुर

गोरखपुर। ज़िले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आशुतोष कुमार दुबे मानते हैं कि कोरोना काल में वैज्ञानिकों और चिकित्सकों से इस बीमारी की भयावहता को समझने में बड़ी चूक हुई। यही कारण था कि इतनी मौतें हुईं। डा. दुबे यह भी मानते हैं कि जब चीजें समझ में आ गईं तो राज्य सरकार ने कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी और मुख्यमंत्री ने जिस तरीके से खुद ही फ्रंटलाइन पर आकर लीड किया, वह बेमिसाल है। डा. दुबे महसूस करते हैं कि भारत में कोरोना की लहर अब शायद ही कभी आए क्योंकि एक्टिव केस न के बराबर हैं और जनता भी अब जागरूक हो रही है।
healthjagaran.com के संपादक के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि जब पहली लहर आई तो दिक्कतें थीं। हमारे पास टेस्टिंग टूल्स नहीं थे। पर्याप्त बेड्स नहीं थे। वेटिलेटर्स भी बहुत कम थे। आक्सीजन की भी दिक्कतें थीं। उन दिनों मैं अमेठी में था। लेकिन, जिस तरीके से
मुख्यमंत्री ने फ्रंट पर आकर व्यवस्था को संभाला, उससे एक अलग ही मैसेज गया। पहली लहर में उतनी मौतें नहीं हुई थीं। दूसरी लहर और पहली लहर के बीच में थोड़ा गैप था। इस गैप में अनेक कार्य किये गए। बेड की व्यवस्था हुई। वेंटीलेटर्स की व्यवस्था की गई। आक्सीजन (oxygen) की व्यवस्था की गई। हर जिले में कोविड कमांड सेंटर बनाए गए। टेस्टिंग के नए उपकरण भी बाजार में आ गए थे। टीम 11 और टीम 9 का गठन हुआ। इन दोनों टीम के निर्देश पर जनपद गोरखपुर में भी कई काम किये गए। आज गोरखपुर (Gorakhpur) में 17 आक्सीजन प्लांट हैं। हमारे पास 1500 डेडिकेटेड कोविड बेड्स हैं। 800 वेंटिलेटर्स हैं। हम लोग सक्षम हैं, कोविड (covi) का मुकाबला करने के लिए पर हमें नहीं लगता कि अब कोई चौथी लहर आएगी।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि कोविड के दौर में लोगों को लगने लगा कि कोरोना का एकमात्र इलाज आक्सीजन से ही हो सकता है। गलतफहमी में थे लोग। आक्सीजन की जिनको जरूरत नहीं थी, वो ही आक्सीजन-आक्सीजन चिल्ला रहे थे। आपदा में अवसर अनेक मुनाफाखोरों ने तलाश ही लिया। पहले यह सूचना फैला दी गई कि आक्सीजन नहीं है। फिर आक्सीजन की खरीद-फरोख्त शुरू हो गई। लेकिन राज्य सरकार ने इससे कड़ाई से निपटने में सफलता प्राप्त की।
एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि लोगों ने कोविड प्रोटोकाल (covid protocol ) का अगर पालन किया होता तो आंकड़े कुछ और ही होते। लोगों ने कोविड नियमों को माना नहीं या बहुत कम माना। नियम यह था कि आपको कोरोना है तो आप कोविड कमांड सेंटर पर फोन करेंगे। सभी बातें बताएंगे। उसके अनुसार आपका इलाज चलेगा। अगर कोविड कमांड सेंटर को लगेगा कि आपकी स्थिति खराब है तो वह खुद ही आपको अस्पताल में भर्ती कराएगी। लेकिन लोग सच नहीं बताते। लोगों ने बीमारियां छुपाईं। जब वो गंभीर हो गए तो अस्पतालों में जबरदस्ती घुसने की कोशिश करने लगे। इसी से अफरा-तफरी का माहौल बन गया। उसी दौर में लोगों ने आक्सीजन की कमी का हौव्वा बना दिया। ऐसा था नहीं। क्योंकि हर मर्ज का इलाज आक्सीजन नहीं हो सकती। जिनको आक्सीजन की जरूरत नहीं थी, वे भी इसके लिए दौड़ने लगे। यहीं से हालात खराब होने लगे। यहीं से लोगों ने आपदा में अवसर खोजना शुरू कर दिया। आक्सीजन बेची जाने लगी। सरकार ने अन्य राज्यों से आक्सीजन मंगाया।
खड़ाऊं धारण करने वाले सीएमओ
सुल्तानपुर में 1963 में जन्मे और लखनऊ के किंग जार्ज मेडिकल कालेज (KGMU) से mbbs करने वाले डा. दुबे 1991 में सेवा में आए। वह दफ्तर में अधिकांश वक्त खड़ाऊं धारण करते हैं। वह बताते हैं कि खड़ाऊं एक्यूप्रेशर का काम करता है। आप स्वस्थ रहते हैं। पैरों में कोई दिक्कत नहीं होती। रक्त संचार बेहतर रहता है।







हुज़ैफ़ा अबरार August 02 2026 0 231
हुज़ैफ़ा अबरार August 02 2026 0 168
हुज़ैफ़ा अबरार August 04 2026 0 161
हुज़ैफ़ा अबरार August 04 2026 0 161
हुज़ैफ़ा अबरार August 04 2026 0 126
हुज़ैफ़ा अबरार August 01 2026 0 1176
हुज़ैफ़ा अबरार August 01 2026 0 385
हुज़ैफ़ा अबरार August 01 2026 0 245
हुज़ैफ़ा अबरार August 02 2026 0 231
हुज़ैफ़ा अबरार August 01 2026 0 203
हुज़ैफ़ा अबरार August 02 2026 0 168
हुज़ैफ़ा अबरार January 25 2026 0 4998
एस. के. राणा January 20 2026 0 4949
हुज़ैफ़ा अबरार February 07 2026 0 4851
एस. के. राणा January 13 2026 0 4627
हुज़ैफ़ा अबरार February 05 2026 0 4529
एस. के. राणा February 01 2026 0 4305
एस. के. राणा February 04 2026 0 3976
सौंदर्या राय April 11 2022 0 87043
सौंदर्या राय April 08 2022 0 34931
सौंदर्या राय April 07 2022 0 38104
सौंदर्या राय April 05 2022 0 35602
लेख विभाग March 19 2022 0 35217
सौंदर्या राय March 16 2022 0 72777
यूपी के 22 लाख कर्मचारियों और पेंशनर्स के 75 लाख परिवारों के कैशलेस इलाज का रास्ता साफ हो गया है। चि
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के निर्देश पर सिविल, बलरामपुर, लोहिया, लोकबंधु और केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर सह
कल्याण सिंह सुपर स्पेशियलिटी कैंसर संस्थान के डॉ. आयुष लोहिया ने बताया कि उत्तर प्रदेश में सबसे आम क
यूपी के कई जिलों में प्रधानमंत्री जन आरोग्य आयुष्मान भारत योजना गरीबों के लिए संजीवनी साबित हो रही
डा0 नीरा कोहली ने वर्ष 1978 में एम0बी0बी0एस0 एस एन मेडिकल कालेज, आगरा से एवं एम् डी (रेडियोडाइयग्नोस
किडनी का ख़्याल रखना और उसके काम में सुधार करने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है। शरीर को हाइड्रेट रख
दमा का प्रहार आम तौर पर 5 से 11 साल के बीच के बच्चों में भी होता है।श्वसन के दौरान, जिस हवा में हम स
हैलट में डॉ. एसके गौतम और डॉ. सौरभ अग्रवाल की ओपीडी से 25 तो उर्सला में 8 मरीजों को भर्ती किया गया।
वित्तीय वर्ष 2020-21 की पहली छमाही में पिछले वर्ष 15.63 अरब डॉलर की तुलना में 18.07 अरब डॉलर का दवा
कुमाऊं का सबसे बड़ा महिला अस्पताल हल्द्वानी है। हर रोज यहां सैकड़ों गर्भवती महिलाएं जांच और इलाज के

COMMENTS