











































प्रतीकात्मक चित्र
लखनऊ। प्रदेश सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं में बढ़ोत्तरी के निरन्तर प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार आयुष को लेकर भी उतनी ही संजीदा नज़र आती है जितना की एलोपैथ को लेकर है। राजधानी में होम्योपैथिक औषधि निर्माण की फैक्ट्री लगने वाली है और अब सरकार ने आयुर्वेद में शोध के लिए 50 हजार रुपए की छात्रवृत्ति देने का ऐलान किया है।
केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS) ने कहा था कि बीएएमएस की डिग्री लेने वाले विद्यार्थियों को शोध के लिए सहयोग करना चाहिए। इससे आयुष (AYUSH) और रोजगार दोनों को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही शोधार्थियों को 50 हजार रुपए की छात्रवृत्ति देने की बात भी कही थी।
केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (Central Council for Research in Ayurvedic Sciences) द्वारा ऐसी घोषणा होने के बाद प्रदेश सरकार ने आयुर्वेदिक कॉलेजों से प्रस्ताव मांगे हैं। आयुर्वेद निदेशक (Ayurveda Director) प्रो एसएन सिंह ने सभी प्रधानाचार्यों को विद्यार्थियों से शोध प्रस्ताव तैयार कराने का निर्देश दिया है। साथ ही शोधार्थियों के चयन की प्रक्रिया की जानकारी दी।
प्रो एसएन सिंह ने कहा कि आयुर्वेद के क्षेत्र में शोध (research in Ayurveda) के लिए 50 हजार रुपये की छात्रवृत्ति मिलेगी। पहले सत्र में देशभर के 100 विद्यार्थियों का चयन होगा। इसके लिए प्रदेश के आयुर्वेदिक कॉलेजों से प्रस्ताव मांगे गए हैं।
शोधार्थियों के चयन प्रक्रिया (selection proceedure) की जानकारी देते हुए प्रो सिंह ने कहा कि आयुर्वेद विद्यार्थियों को पोर्टल के माध्यम से शोध प्रस्ताव भेजने होंगे और प्रत्येक प्रस्ताव का मूल्यांकन किया जाएगा। विशेषज्ञों की कसौटी पर खरा उतरने वाले विद्यार्थी को ही छात्रवृत्ति मिलेगी।
ऐसे प्रयासों से आयुष को बढ़ावा मिलेगा और प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों (ancient medical practices) के पुनरुथान का मार्ग भी प्रशस्त होगा। छात्रवृत्ति मिलने से विद्यार्थियों का रुझान बढ़ेगा और स्वास्थ्य सेवाओं के साथ रोजगार में भी वृद्धि होगी।







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