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लखनऊ। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने एक बार फिर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को पटरी पर लाने के लिए कुछ नए निर्देश जारी किए हैं। निर्देशों में साफ कहा गया है कि खामी मिलने पर कड़ी कार्यवाही की जाएगी।
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक (Brajesh Pathak) योजना भवन में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से चिकित्सा शिक्षा (Medical Education) एवं स्वास्थ्य विभाग (UP Health Department) के मंडलीय व जिलास्तरीय अधिकारियों के साथ विभिन्न योजनाओं की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में पार्थ सारथी सेन शर्मा (Partha Sarathi Sen Sharma) प्रमुख सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य रविन्द्र और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM), उप्र की मिशन निदेशक अपर्णा उपाध्याय मौजूद थी।
उपमुख्यमंत्री (Deputy CM) ने निर्देश देते हुए कहा कि सरकारी अस्पतालों (government hospitals) व मेडिकल कॉलेजेज (medical colleges) की ओपीडी (OPD) में मरीजों को लम्बी-लम्बी कतारों में लगकर घंटों पर्चा बनवाने के लिए इंतजार न करना पड़े। ओपीडी में पर्चा बनवाने के लिए काउंटर (OPD Counters) बढ़ाए जाएं और जरूरत के अनुसार ज्यादा कर्मचारियों को इस काम में लगाया जाए।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि टीबी मरीजों (TB patients) को समय पर दवाएं उपलब्ध हों इसका विशेष ख्याल रखा जाए। 29 सितंबर को 18 वर्ष से अधिक उम्र के वयस्कों को कोरोना (corona vaccine) से बचाव के लिए टीके की सतर्कता डोज लगाने के लिए विशेष अभियान चलाकर अधिक से अधिक टीके लगाने का लक्ष्य रखा जाए।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Modi) के जन्मदिन पर रक्तदान शिविर (blood donation camp) को व्यापक स्तर पर आयोजित किया जाए। 18 सितंबर को निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर (free health camp) लगाया जाए और इस शिविर को मुख्यमंत्री आरोग्य मेला (CM Arogya Mela) से जोड़कर आयोजित किया जाए।
विभिन्न योजनाओं की समीक्षा करते हुए उपमुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि अस्पतालों में चिकित्सीय उपकरणों (medical equipments) को क्रियाशील रखा जाए। यदि उपकरण खराब है तो उसे तुरंत ठीक करवाया जाए। सिर्फ शासन को पत्र लिखकर खानापूरी न करें बल्कि मुख्यालय पर सक्षम अधिकारी से फोन पर वार्ता करें और उपकरण को जल्द से जल्द ठीक करवाने का प्रयास करें।
उन्होंने (Medical and Health Minister) यह भी कहा कि यदि किसी अस्पताल में निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि लम्बे समय से चिकित्सीय उपकरण खराब है और उसे ठीक करवाने के लिए सक्षम स्तर पर कोई प्रयास नहीं किया गया तो कार्यवाही की जाएगी।







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