











































प्रतीकात्मक चित्र
लखनऊ। 5 मई को अखबारों में एक खबर प्रकाशित हुई जिसमें डॉ राममनोहर लोहिया अस्पताल में ऑक्सीजन सपोर्ट पर रह रहे एक मरीज की जबरन छुट्टी करवाने का उल्लेख किया गया था। सुबह खबर छपने के बाद आरएमएल अस्पताल प्रशासन ने इस प्रकरण पर प्रतिक्रिया व्यक्त की।
गौरतलब है कि उपमुख्यमंत्री (Deputy Chief Minister) तथा चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक ना केवल अस्पतालों का दौरा करके जमीनी हकीकत परख रहे हैं बल्कि सोशल मीडिया या अखबारों (newspapers) में छपी खबरों का भी संज्ञान लेकर कार्यवाही कर रहे हैं। इससे पहले जब हेल्थ जागरण ने उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक के राममनोहर लोहिया अस्पताल के दौरे की खबर दिखाई थी उसमें भी उपमुख्यमंत्री ने कहा था कि मरीज को भगवान मान कर उसका स्वागत सत्कार करें। इसके बाद आरएमएल अस्पताल (RML Hospital) में ताले में बंद स्ट्रेचर की खबर छपी थी जिसका संज्ञान उपमुख्यमंत्री ने लेते हुए रिपोर्ट मांगी थी। इसके बाद राममनोहर लोहिया अस्पताल ने संस्थान में पत्रकारों (journalists) के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया था जिसका संज्ञान लेते हुए चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक ने तुरंत ये आदेश निरस्त करने को कहा था।
आज फिर खबर छपने पर राममनोहर लोहिया अस्पताल ने खुद कार्यवाही कर मीडिया को जानकारी दी
अस्पताल प्रशासन ने कहा कि 5 मई 2022 को दैनिक समाचार पत्रों में प्रकाशित ऑक्सीजन सपोर्ट पर मरीज की जबरन छुट्टी वाली खबर का संज्ञान लेते हुए संस्थान प्रशासन द्वारा मामले की गंभीरता एवं संवेदनशीलता को देखते हुए तत्कालिक कार्रवाई करी गई है।
न्यूरोसर्जरी विभाग (Neurosurgery Department) द्वारा रोगी की पुनः तकलीफ के दृष्टिगत उन्हें अविलंब इमरजेंसी (emergency) में भर्ती होने को कहा गया था परंतु रोगी 4 मई 2022 को दिन भर भी इमरजेंसी नहीं पहुंच पाया। इसके पश्चात मीडिया में प्रकाशित खबरों का संज्ञान लेते हुए संस्थान प्रशासन ने करुणामई रवैया के तहत सूचना प्राप्त होते ही रोगी हित में रोगी के पिता से संपर्क कर रोगी को बाराबंकी से बुलाकर न्यूरोसर्जरी विभाग में भर्ती कराया गया है। रोगी का परिवार संतुष्ट है।
तो इस प्रकार राममनोहर लोहिया अस्पताल ने रोगी हित में ये कदम उठाया है।







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