











































कुछ दिनों पहले बिहार के 6 जिलों से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इन जिलों में कुछ नवप्रसुता महिलाओं के दूध के सैंपल की जांच में यूरेनियम पाया गया था। आज इसी विषय में हेल्थ जागरण मेरठ के वरिष्ठ संवाददाता आयुष राजपूत ने मेरठ की सुप्रसिद्ध स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अंजली गुप्ता से बातचीत की।
हेल्थ जागरण - मैडम, माँ के ब्रेस्ट मिल्क में यूरेनियम पाया जाने की क्या वजह हो सकती है?
डॉ अंजलि गुप्ता - जी, बिहार के 6 जिलों में मां के दूध में यूरेनियम पाया गया है। दिल्ली एम्स में 40 महिलाओं के ब्रेस्ट मिल्क (breast milk) जांच में 0 से 5.25 माइक्रोग्राम प्रति लीटर तक की मात्रा पाई गई है। अभी तक पूरे विश्व में कहीं भी ऐसा देखने को नहीं मिला इसलिए माँ के दूध में यूरेनियम के संबंध में भी किसी प्रकार के मानक भी तय नहीं किए गए लेकिन WHO ने ड्रिंकिंग वॉटर को लेकर यूरेनियम की मात्रा का मानक 30 माइक्रोग्राम प्रति लीटर तक सुरक्षित मानते हुए तय किया है। इसलिए अगर हम ड्रिंकिंग वॉटर को मानक माने तो मां के दूध में पाए जाने वाली यूरेनियम की मात्रा अभी तक अधिकतम 25 माइक्रोग्राम ही मिली है इसलिए माताएं डरे नहीं कि उनका दूध विषैला हो गया है। ना केवल बिहार की बल्कि सारे देश की महिलाओं को समझना चाहिए की मां का दूध (Mothers Milk) ही बच्चों के लिए सर्वश्रेष्ठ होता है। अतः मां का दूध जरूर पिलाएं।

जहां तक मां के दूध में यूरेनियम पाए जाने के कारण की बात है तो इसका कारण यही हो सकता है कि बिहार के इन क्षेत्रों में ग्राउंडवाटर, यूरेनियम से दूषित है और वही यूरेनियम पानी या फूडचेन (Food Chain) के माध्यम से शरीर में पहुंच रहा है। इस कारण वह महिलाओं के दूध में भी मिल रहा है।
हेल्थ जागरण - मैडम जैसा सभी जानते हैं कि यूरेनियम (uraniam) का प्रयोग एटम बम बनाने में भी होता है तो यदि आने वाले समय में इसकी मात्रा बढ़ती है तो ऐसी माताओं के शिशुओं के लिए यह दूध कितना घातक हो सकता है?
डॉ अंजलि गुप्ता - यदि किसी प्रसूता के दूध में यूरेनियम की मात्रा तय मानक स्तर से ज्यादा होगी तो यह बच्चे की किडनी (kidney) तथा न्यूरोलॉजिकल फंक्शन (neurological fuction) पर दुष्प्रभाव पडेगा। अभी यूरेनियम की मात्रा चिंताजनक स्तर पर नहीं पाई गई है लेकिन अगर हम सचेत नहीं हुई तो हालत बहुत खराब होंगे। इसके लिए अभी से तैयारी करनी होगी तथा लोगों को जागरूक होना पड़ेगा।
हेल्थ जागरण - हमारे मेरठ शहर में भी काली नदी के कारण ग्राउंड वाटर प्रदूषित हो रहा है जिसके कारण कैंसर जैसे रोगी भी बढ़ रहे हैं इसके बारे में आपका क्या कहना है?
डॉ अंजलि गुप्ता - साफ सफाई एवं प्रदूषण का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। सरकार भी सफाई एवं प्रदूषण को लेकर काफी सजग है। हर घर से कूड़ा उठाने की व्यवस्था की गई है। इसी प्रकार बायोमेडिकल वेस्ट (Bio Medical Waste) का भी उचित निपटान की व्यवस्था सरकार द्वारा की गई है लेकिन सरकार को सहयोग करना भी हम सभी के कर्तव्य है। साफ सफाई में हम सरकार को सहयोग करेंगे तो निश्चित रूप से काली नदी भी साफ हो जाएगी।
हेल्थ जागरण - डॉक्टर साहब हमसे बातचीत करने के लिए आपका बहुत धन्यवाद।







हुज़ैफ़ा अबरार July 07 2026 0 392
हुज़ैफ़ा अबरार July 07 2026 0 357
हुज़ैफ़ा अबरार July 09 2026 0 196
हुज़ैफ़ा अबरार January 25 2026 0 4746
एस. के. राणा January 20 2026 0 4641
हुज़ैफ़ा अबरार February 07 2026 0 4578
एस. के. राणा January 13 2026 0 4403
हुज़ैफ़ा अबरार February 05 2026 0 4333
एस. के. राणा February 01 2026 0 3955
एस. के. राणा February 04 2026 0 3752
सौंदर्या राय April 11 2022 0 86826
सौंदर्या राय April 08 2022 0 34714
सौंदर्या राय April 07 2022 0 37936
सौंदर्या राय April 05 2022 0 35413
लेख विभाग March 19 2022 0 35007
सौंदर्या राय March 16 2022 0 72448
नीट काउंसलिंग में शामिल होने की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए राहत की खबर है। प्रदेश में इस बार एम
चुनाव में मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिहाज से लोगों को प्रेरित करने के लिए गोरखपुर में आईएमए ने पहल की
उत्तर प्रदेश के जाने माने चिकित्सक डॉ. सूर्यकान्त को प्रतिष्ठित मैकमास्टर टेक्स्टबुक ऑफ इंटरनल मेडिस
दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और पंजाब के सीएम भगवंत मान ने लुधियाना की जनता को आज 80 नए आम आदमी क्
गंभीर कोविड रोगियों के इलाज के लिए कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स के साथ इस्तेमाल की जाने वाली गठिया की दवा बारि
गंभीर मनोवैज्ञानिक समस्या से पीड़ित महिलाओं को चिन्हित करते हुए डाक्टर उन शिशुओं की पहचान कर सकते है
पशुपालन विभाग जिला सोलन के उपनिदेशक बीबी गुप्ता ने बताया कि जिले में अलर्ट कर दिया है।
सिद्धार्थनगर और गोरखपुर प्रत्येक जिले में 5 ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर और 2 अशोक लीलैंड निर्मित वेंटिलेटर
सरकार का भी पूरा प्रयास है कि कोरोना की तीसरी लहर जैसी स्थिति उत्पन्न ही न हो, इसके लिए ज्यादा से ज्
उत्तराखंड के हल्द्वानी में कुमाऊं का सबसे बड़ा अस्पताल है। दरअसल सुशीला तिवारी अस्पताल में हर रोज करी

COMMENTS