











































Mukesh Sharma
लखनऊ 04 जून। पापुलेशन सर्विसेज इंटरनेशनल इंडिया के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर मुकेश शर्मा ने चिंता जताई कि हर साल तापमान में हो रही बढ़ोत्तरी से भीषण गर्मी की मार झेल रहे लोग, आग की लपटों से झुलसते जंगल, समुद्र का बढ़ता जल स्तर, पिघलते ग्लेशियर साफ़ संकेत दे रहे हैं कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति अब भी न चेते तो बहुत देर हो जाएगी। इन संकेतों को गंभीरता से लेते हुए जल, जंगल व जमीन को बचाने के लिए बड़े पैमाने पर मुहिम चलाने की जरूरत है। पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता की अलख जगाने के लिए ही हर साल पांच जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। इस साल विश्व पर्यावरण दिवस की थीम प्रकृति से प्रेरित, जलवायु भविष्य के लिए तय की गयी है।
उन्होंने कहा पेट्रोल-डीजल मोटर गाड़ियों की बढ़ती संख्या कारखानों से निकलने वाले कचरे भी वायु और पर्यावरण को दूषित कर रहे हैं। इस समस्या से निजात पाने के लिए इलेक्ट्रानिक वाहनों को बढ़ावा देना होगा और सार्वजनिक वाहनों से यात्रा को प्राथमिकता देनी होगी ताकि कार्बन डाइआक्साइड के बड़ी मात्रा में उत्सर्जन में कमी लाने के साथ ही धूल और धुएं के प्रदूषण में कमी आ सके। पृथ्वी की शोभा बढ़ाने वाले हरे-भरे पेड़ों की जगह कंक्रीट के जंगल ले रहे हैं, बन रहीं ऊँची-ऊँची अट्टालिकाएं और कारखाने एक ओर जहाँ हमें आधुनिकता का भान करा रहे हैं यह सभी पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। ऑक्सीजन की समस्या से लोग परेशान हैं, नयी नयी बीमारियाँ पाँव पसार रही हैं। कई वन्य जीवों और पौधों की प्रजातियाँ विलुप्त होने की कगार पर हैं। इसके लिए जरूरी है कि वृक्षारोपण को प्राथमिकता देते हुए उसकी देखभाल पर पूरा जोर दिया जाए ताकि लोगों को जरूरत भर की ऑक्सीजन आसानी से मुफ्त मिल सके। आज हमारे खान पान और लाइफ स्टाइल ने हमारे शरीर को बीमारियों से घेर लिया है।
पर्यावरण संरक्षण में युवा वैज्ञानिक, स्कूल-कॉलेज के बच्चे बड़ी भूमिका निभानी होगी। यह पीढ़ी सोशल मीडिया या अन्य डिजिटल प्लेटफार्म के माध्यम से लोगों को पर्यावरण संरक्षण के बारे में जागरूक करने के साथ ही उसके लिए उठाये जाने वाले जरूरी क़दमों के लिए प्रेरित भी कर सकती है। युवा दिनचर्या में उन छोटी-छोटी आदतों को अपना सकता है, जो पर्यावरण प्रदूषण को कम करने में सहायक बन सकते हैं, जैसे- सिंगल यूज प्लास्टिक से पूरी तरह दूरी बना लेना, सार्वजनिक वाहनों या साइकिल का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करना वृक्षारोपण और उसकी देखभाल को पसंदीदा शौक बना लेना आदि। बढ़ता पर्यावरण प्रदूषण देश की अर्थव्यवस्था पर भी प्रभाव डाल रहा है। इसकी वजह से बढ़ती बीमारियों से निपटने के लिए एक बड़ी राशि खर्च करनी पड़ रही है। सीमित प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ती आबादी का भी दबाव साफ़ देखा जा सकता है। शहरीकरण के चलते कृषि योग्य भूमि कम होती जा रही है। उर्वरा शक्ति की कमी के चलते अनाज की पैदावार में भी निरंतर कमी देखी जा रही है। इन सभी परेशानियों पर सिर्फ सोचना नहीं बल्कि काम भी करना होगा तभी पर्यावरण संरक्षण संभव हो सकेगा।







हुज़ैफ़ा अबरार July 07 2026 0 399
हुज़ैफ़ा अबरार July 07 2026 0 357
हुज़ैफ़ा अबरार July 09 2026 0 196
हुज़ैफ़ा अबरार January 25 2026 0 4753
एस. के. राणा January 20 2026 0 4641
हुज़ैफ़ा अबरार February 07 2026 0 4585
एस. के. राणा January 13 2026 0 4403
हुज़ैफ़ा अबरार February 05 2026 0 4333
एस. के. राणा February 01 2026 0 3962
एस. के. राणा February 04 2026 0 3752
सौंदर्या राय April 11 2022 0 86826
सौंदर्या राय April 08 2022 0 34714
सौंदर्या राय April 07 2022 0 37936
सौंदर्या राय April 05 2022 0 35413
लेख विभाग March 19 2022 0 35007
सौंदर्या राय March 16 2022 0 72455
मिर्गी एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर यानी तंत्रिका तंत्र संबंधी रोग है। जिससे पीड़ित होने पर तंत्रिका कोश
रक्तदान मानवता की सबसे बड़ी सेवाओं में से एक है और इस प्रकार के सामूहिक प्रयास जरूरतमंद मरीजों के लि
सहारा हॉस्पिटल में सभी सुविधाएं एक छत के नीचे उपलब्ध हैं, इसलिए मरीज को ब्लड बैंक की सुविधा और डॉक्ट
आचार्य मनीष ने कहा, 'हम पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर करके आयुर्वेद को उ
आंकड़ों के अनुसार, देश में अभी तक कुल 2,23,55,440 लोग संक्रमण मुक्त हुए हैं और मरीजों के ठीक होने की
आज महिला नर्सिंग कर्मचारियों ने मिनी सचिवालय की सड़क पर विरोध प्रदर्शन किया। कर्मचारियों का कहना है
इस अस्पताल में 788 बेड होगा, जिसमें 100 इमरजेंसी बेड अलग से होंगे। यह हॉस्पिटल नर्सिंग और डेंटल कॉल
मुजफ्फरपुर के सिविल सर्जन डॉ उमेश चंद्र शर्मा ने बताया कि मामले की जांच करेंगे। ऐसे फर्जी डॉक्टर और
दोनों संस्थान रैगिंग के प्रति बहुत संवेदनशील हैं। सीसीटीवी कैमरों की मदद से कैंपस के हर गतिविधि पर
आयुर्वेद के पोस्टग्रेजुएट डॉक्टरों को 58 तरह की सर्जरी के लिए दी गयी इजाजत को वापस ले लेना चाहिए। भव

COMMENTS