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अब तक स्पाइन और क्रेनियल सर्जरी में एमआरआई या सीटी स्कैन ऑपरेशन से पहले या बाहर किए जाते थे। ओ-आर्म स्पाइन सुइट इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए सर्जरी के दौरान ही डॉक्टरों को शरीर के अंदर की स्पष्ट तस्वीरें दिखाता है। इसे अक्सर स्पाइन के लिए जीपीएस सिस्टम कहा जाता है, क्योंकि इससे डॉक्टर संकरे और संवेदनशील हिस्सों में भी सटीक स्थान की पहचान कर पाते हैं, जिससे सर्जरी की शुद्धता काफी बढ़ जाती है।
इस अवसर पर मेदांता के मेडिकल डायरेक्टर एवं यूरोलॉजी और किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी के निदेशक डॉ. राकेश कपूर ने कहा कि ओ-आर्म की शुरुआत मेदांता की उन्नत और भरोसेमंद इलाज की सोच को दर्शाती है। उन्होंने कहा, “हमारा प्रयास है कि उत्तर प्रदेश में भी दुनिया के बेहतरीन इलाज की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। ओ-आर्म स्पाइन सुइट से सर्जरी अधिक सुरक्षित और सटीक होगी, साथ ही मरीजों की रिकवरी भी तेज होगी।”
न्यूरोसर्जरी विभाग के निदेशक डॉ. कमलेश सिंह भैसोरा ने बताया कि यह तकनीक स्पाइन और मस्तिष्क की सर्जरी में बड़ा बदलाव लेकर आई है। उन्होंने कहा, “सर्जरी के दौरान ही तीन आयामी तस्वीरें मिलने से हम तुरंत सटीकता की पुष्टि कर सकते हैं। इससे चीरा छोटा रहता है, खून कम बहता है, ऑपरेशन का समय घटता है और मरीज जल्दी ठीक होता है।”
न्यूरोसर्जरी निदेशक डॉ. रवि शंकर ने कहा कि यह प्रणाली जटिल और जोखिम भरी सर्जरी में सुरक्षा को और मजबूत करती है। उनके अनुसार, “ओ-आर्म लगातार नेविगेशन की सुविधा देता है, जिससे डॉक्टरों को कठिन हिस्सों में भी पूरे भरोसे के साथ काम करने में मदद मिलती है।”
ऑर्थोपेडिक्स और स्पाइन विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. श्वेताभ वर्मा ने कहा कि यह तकनीक खासतौर पर मिनिमली इनवेसिव स्पाइन सर्जरी के लिए बेहद उपयोगी है। उन्होंने बताया, “सटीक इम्प्लांट लगाने और आसपास के टिश्यू को कम नुकसान होने से मरीजों को ऑपरेशन के बाद दर्द कम होता है और वे अक्सर दो से तीन दिन में अस्पताल से घर जा सकते हैं।”
ओ-आर्म स्पाइन सुइट उन्नत इमेजिंग को कंप्यूटर आधारित नेविगेशन से जोड़ता है, जिससे ऑपरेशन थिएटर का काम सुचारू होता है और रेडिएशन का असर भी कम पड़ता है। इस तकनीक से लखनऊ और आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को बड़ा लाभ मिलेगा और स्पाइन के उन्नत इलाज में एक नया मानक स्थापित होगा।







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