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रीजेंसी हेल्थ कानपुर के डॉक्टरों ने तंबाकू से हुए एडवांस्ड ओरल कैंसर का किया इलाज़

डॉक्टरों की सलाह और कैंसर के खतरे की जानकारी मिलने के बावजूद उसने तंबाकू छोड़ने और नियमित जांच कराने पर ध्यान नहीं दिया। 46 साल की उम्र में उसे मुंह में दर्दनाक छाले खाना चबाने में दिक्कत और लगातार दर्द रहने लगा। जांच और बायोप्सी में बुक्कल म्यूकोसा का स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा पाया गया। ओरल कैंसर का यह प्रकार भारत में तंबाकू से जुड़ा सबसे प्रचलित कैंसर है।

हुज़ैफ़ा अबरार
June 02 2026 Updated: June 02 2026 00:17
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रीजेंसी हेल्थ कानपुर के डॉक्टरों ने तंबाकू से हुए एडवांस्ड ओरल कैंसर का किया इलाज़ . Vikas Talreja

कानपुर । रीजेंसी हेल्थ कानपुर ने बताया तंबाकू से होने वाले मुंह के कैंसर यानी ओरल कैंसर से पीड़ित 51 साल के एक मरीज़ की जीवन की गुणवत्ता में यहां के डॉक्टरों द्वारा काफ़ी सुधार किया है। कैंसर दुबारा होने के बाद मरीज का ऑपरेशन करना संभव नहीं था लेकिन एडवांस्ड इलाज से उसे काफ़ी राहत मिली। यह मामला तंबाकू के लंबे समय के सेवन से होने वाले गंभीर खतरों और जटिल कैंसर मामलों में नई थेरेपी की बढ़ती अहमियत को दिखाता है। मरीज करीब 14 साल तक धूम्रपान और तंबाकू चबाने का आदी था। 44 साल की उम्र में उसके मुंह में ल्यूकोप्लाकिया नाम का सफेद धब्बा दिखाई दिया। यह सफ़ेद धब्बा ओरल कैंसर की शुरुआती चेतावनी माना जाता है। डॉक्टरों की सलाह और कैंसर के खतरे की जानकारी मिलने के बावजूद उसने तंबाकू छोड़ने और नियमित जांच कराने पर ध्यान नहीं दिया। 46 साल की उम्र में उसे मुंह में दर्दनाक छाले खाना चबाने में दिक्कत और लगातार दर्द रहने लगा। जांच और बायोप्सी में बुक्कल म्यूकोसा का स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा पाया गया। ओरल कैंसर का यह प्रकार भारत में तंबाकू से जुड़ा सबसे प्रचलित कैंसर है।

मरीज़ की इससे पहले अप्रैल 2021 में मॉडिफाइड नेक डाइसेक्शन और रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी के साथ वाइड लोकल एक्सिशन हुआ था। इसके बाद एडजुवेंट रेडिएशन थेरेपी हुई। हालांकि शुरु में थोड़ा सुधार दिखा लेकिन 2022 में बीमारी फिर से हो गई। इस बार बुक्कल म्यूकोसा और सर्वाइकल लिम्फ नोड्स भी प्रभावित थे। इसलिए इसमें सर्जरी करना सुरक्षित नहीं माना गया। दुबारा कैंसर होने पर मरीज़ को मुंह में बहुत दर्द मुंह खोलने में दिक्कत ठोस खाना न खा पाना लिक्विड पीने में भी दिक्कत और पोषण में काफी कमी महसूस हुई। इन सब समस्याओं की वजह से उसकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी बुरी तरह प्रभावित हुई।

  रीजेंसी हेल्थ कानपुर के मेडिकल ऑन्कोलॉजी सीनियर कंसलटेंट डॉ विकास तलरेजा ने कहा यह मामला बहुत ख़ास है क्योंकि कैंसर सर्जरी और रेडिएशन के बाद दुबारा हो गया था और इस बार इलाज़ के विकल्प बहुत कम बचे थे। कीमोथेरेपी, कम डोज़ वाली इम्यूनोथेरेपी और टारगेटेड थेरेपी की सावधानीपूर्वक योजना से हमने मरीज़ की जीवन की गुणवत्ता में लगातार काफ़ी सुधार और अच्छी रिकवरी सुनिश्चित की। यह परिणाम इस बात पर भी ज़ोर देता है कि ल्यूकोप्लाकिया जैसे शुरुआती चेतावनी के संकेतों को अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है, जिससे बीमारी बढ़ जाती है और इलाज कहीं ज़्यादा मुश्किल हो जाता है। अभी भी तंबाकू छोड़ना और जल्दी डायग्नोसिस करवाना इलाज़ के नतीजों को बेहतर बनाने में सबसे ज़रूरी तत्व बने हुए हैं।

रीजेंसी हेल्थ कानपुर में जांच करने के बाद PET-CT से बार-बार होने वाली मेटाबोलिक रूप से सक्रिय बीमारी की पुष्टि हुई और मरीज़ को हर हफ़्ते कीमोथेरेपी के साथ Nivolumab 40 mg का इस्तेमाल करके कम डोज़ वाली इम्यूनोथेरेपी दी जाने लगी। 12 साइकिल के बाद सितंबर 2022 में PET-CT ने काफ़ी हद तक असर दिखाया। इसके बाद Cetuximab के साथ टारगेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी जारी रखी गई। इससे बीमारी और कम हुई, और जनवरी 2023 में स्कैन में बीमारी सिर्फ़ बुक्कल म्यूकोसा तक ही दिखी।

इलाज के बाद मरीज में काफी राहत देखने को मिली। उसे अब दर्द से पूरी तरह आराम मिल चुका है वह मुंह से खा-पी सकता है उसका मुंह अब खुलने लगा है और स्वस्थ वजन भी उसका बढ़ा हुआ है। सितंबर 2023 में हुए PET-CT ने बिना किसी सक्रिय बीमारी के सबूत के साथ मेटाबॉलिक क्रियाओं को सामान्य दिखाया। जुलाई 2024 और सितंबर 2025 में फॉलो अप स्कैन सामान्य रहे हैं, जोकि बीमारी अब न होने की पुष्टि करते हैं।मरीज़ में अभी कोई लक्षण नहीं हैं और रेगुलर फ़ॉलो-अप के तहत वह अपनी रोज़मर्रा के जीवन में लौट आया है। इलाज और काउंसलिंग के बाद मरीज़ ने धूम्रपान और तंबाकू चबाना पूरी तरह छोड़ दिया और उसे कोई लत नहीं है। विश्व तंबाकू निषेध दिवस (वर्ल्ड नो टोबैको डे) से पहले यह मामला तंबाकू से होने वाले मुंह के घावों में देर से पता चलने के प्रभाव को दिखाता है, साथ ही यह भी दिखाता है कि कैसे समय पर इलाज मल्टीडिसिप्लिनरी कैंसर केयर, इम्यूनोथेरेपी और टारगेटेड थेरेपी से बार-बार होने वाले मुंह के कैंसर में भी नतीजों में काफ़ी सुधार हो सकता है।

डॉ विकास तलरेजा ने उन लोगों को सलाह दी जिन्हें लगातार मुंह के छाले सफेद धब्बे मुंह कम खुलने या चबाने में दिक्कत हो रही है ताकि वे समय पर मेडिकल जांच करवाएं। साथ ही डॉक्टरों ने इस बात पर ज़ोर दिया कि मुंह के कैंसर के खिलाफ़ शुरुआती पहचान ही सबसे मजबूत सुरक्षा है। रीजेंसी हेल्थ कानपुर मल्टीडिसिप्लिनरी विशेषज्ञ और नई ऑन्कोलॉजिकल थेरेपी तक उपलब्धता के ज़रिए पूरे कैंसर केयर को मजबूत कर रहा है। हॉस्पिटल का उद्देश्य मरीजों को लंबे समय तक आराम देना और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है।

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