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लखनऊ। राजधानी स्थित अपोलोमेडिक्स अस्पताल में दिल की एक अद्भुत सर्जरी की गयी। जिसमें एक मरीज़ के दिल की धड़कन को पूरी तरह से रोककर, खून को 18 डिग्री सेंटीग्रेड पर ठंडा कर दिया गया। सामान्य रूप से ये लक्षण मृत शरीर के होतें है लेकिन यह क्रिया मरीज की जान बचाने के लिए किया गया।
अपोलोमेडिक्स अस्पताल के डॉ भरत दुबे की देखरेख में इस सर्जरी को सफलतापूर्वक किया गया। उन्होंने बताया कि मरीज अपोलोमेडिक्स आने के एक हफ्ते पहले कार्डियक अरेस्ट का शिकार हुआ था और उसके नजदीकी अस्पताल में उसका हृदय पम्प कर उसकी जान बचाई गई थी। जब वह हमारे पास आया तो उसकी स्थिति बेहद नाजुक थी और ऐसे केस में इस जटिल सर्जरी के अलावा कोई अन्य रास्ता नही बचा था।
डॉ भरत दुबे कार्डियो थोरैसिक और वैस्कुलर सर्जरी में ढाई दशक से अधिक का अनुभव रखतें हैं और वर्तमान में अपोलोमेडिक्स हॉस्पिटल के सीनियर सीटीवीएस सर्जन हैं।
वे बतातें हैं कि इस सर्जरी में क्षतिग्रस्त एऑर्टा को बदलना था, तो मरीज के शरीर के खून को हाइपोथर्मिक सर्कुलेटरी अरेस्ट की स्थिति में लाया गया, उसके खून का टेम्परेचर 18 डिग्री सेंटीग्रेड तक नीचे ले जाया गया, इससे रक्त प्रवाह को अस्थायी रूप से रोका गया। एऑर्टा की मरम्मत करने के बाद मरीज के रक्त को धीरे-धीरे सामान्य तापमान पर लाया गया और फिर उसके दिल की धड़कनों को चालू किया गया।

डॉ दुबे बताते हैं कि एक्यूट एओर्टिक डायसेक्शन की स्थिति खतरनाक होने के साथ दुर्लभ भी है। यह शिकायत ज्यादातर अधिक उम्र वाले लोगों में ज्यादा होती है। इस बीमारी के लक्षण बहुत ज्यादा स्पष्ट नहीं होते क्योंकि इसमें भी हृदय संबंधी अन्य बीमारियों के तरह ही लक्षण दिखाई देते हैं। यह स्थिति विभिन्न कारणों से कम उम्र के लोगों में भी पैदा हो सकती है। यदि समय रहते एओर्टिक डायसेक्शन का पता चल जाए और तुरंत ही इसका इलाज शुरू हो जाए तो स्थिति सुधर जाती है और जान जाने का खतरा कम हो जाता है।
डॉ दुबे एक्यूट एओर्टिक डायसेक्शन के बारे में विस्तार से बताते हैं कि एऑर्टा या महाधमनी, शरीर की सबसे बड़ी और मुख्य बड़ी धमनी होती है, जो पूरे शरीर में रक्त का संचार करती है। कई बार विभिन्न परिस्थितियों के कारण महाधमनी में लीकेज शुरू हो जाता है, इसे एओर्टिक डायसेक्शन के नाम से जाना जाता है। यह एक गंभीर स्थिति है जिसमें धमनी के आंतरिक परत लुमेन से रक्त का रिसाव शुरू हो जाता है और खून आर्टरीज के दीवार की आंतरिक और मध्य परतों के बीच जगह बनाकर उसमें प्रवाहित होने लगता है। इस खून के बहने से दबाव पैदा होता है जो महाधमनी की बाहरी दीवार को फाड़ सकता है, ऐसी स्थिति पैदा होने से यह जानलेवा साबित होता है।
सर्जरी की जटिल प्रक्रिया के बारे में बताते हुए डॉ भरत दुबे ने कहा कि एक्यूट एओर्टिक डायसेक्शन की सर्जरी के दौरान दिल की धड़कन को रोकना आवश्यक हो जाता है क्योंकि यह सर्जरी गतिहीन और रक्तहीन क्षेत्र पर ही की जा सकती है। इस प्रक्रिया को अपनाने के लिए काफी अनुभव, एकाग्रता और एक कुशल टीम की आवश्यकता होती है। दिल जब धड़कना बंद कर देता है शरीर और मष्तिष्क को हार्ट-लंग बायपास मशीन से रक्त की आपूर्ति की जाती है।
सर्जरी के बाद कुछ दिनों डॉक्टरों की देखरेख में रहने के बाद मरीज को हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी गई, अब वह पूरी तरह स्वस्थ है और रेगुलर फॉलोअप के लिए डॉक्टरों द्वारा दिये गए समय पर आ रहा है। "
इस जटिल सर्जरी की सफलता पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए अपोलोमेडिक्स सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, के सीईओ डॉ. मयंक सोमानी ने कहा, "अपोलोमेडिक्स सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल अपने उद्देश्य और लोगों की उम्मीदों पर लगातार खरा उतर रहा है, यह हमारी पूरी टीम के लिए बेहद गौरवपूर्ण है। हमारे यहां के सुपरस्पेशलाइज्ड डॉक्टर्स और पैरा मेडिकल स्टाफ ने इस बात को लगतार साबित किया है कि मेडिकल चुनौतियों का सामना करने में हम सर्वश्रेष्ठ हैं।
उन्होंने बताया कि एक्यूट एओर्टिक डायसेक्शन के जिस केस को डॉ भरत दुबे और उनकी टीम ने सफलतापूर्वक ठीक किया है, अमूमन उसका इलाज कराने के लिए मरीजों को दिल्ली मुंबई जैसे शहरों का रुख करना पड़ता था, जिसमें मरीज की जान बचाने के लिए आवश्यक समय जाया हो जाता था। जिस 51 वर्षीय मरीज की सर्जरी डॉ दुबे की टीम ने सफलतापूर्वक की, उसकी एऑर्टा कभी भी फट सकती थीं और मरीज की जान को खतरा हो सकता था।







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