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जेनेवा। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और UN पार्टनर्स की जारी एक अहम रिपोर्ट के मुताबिक पूरी दुनिया में लगभग 3 में से 1 महिला (अनुमानित 84 करोड़) ने अपनी ज़िंदगी में यौन हिंसा का सामना किया है। इसमें पाया गया कि 15 साल की उम्र या उससे ज़्यादा उम्र की 26.3 करोड़ महिलाओं ने अपने पार्टनर के अलावा किसी और के साथ यौन हिंसा (sexual violence) का अनुभव किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि बदनामी और डर की वजह से ये आंकड़ें काफी कम प्रकाश में आतें हैं।
WHO के डायरेक्टर जनरल डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा इंसानियत के सबसे पुराने और सबसे बड़े अन्याय में से एक है, फिर भी इस पर सबसे कम कार्रवाई होती है। जब तक कि उसकी आधी आबादी डर में जी रही हो कोई भी समाज खुद को निष्पक्ष, सुरक्षित या स्वस्थ नहीं कह सकता। इस हिंसा को खत्म करना सिर्फ नीतियों का मामला नहीं है, यह सम्मान, समानता और मानवाधिकारों का मामला है। हर आंकड़े के पीछे एक महिला या लड़की होती है जिसकी ज़िंदगी हमेशा के लिए बदल जाती है। महिलाओं और लड़कियों को मजबूत बनाना वैकल्पिक नहीं है, यह शांति, विकास और स्वास्थ्य के लिए एक ज़रूरी शर्त है। महिलाओं के लिए एक सुरक्षित दुनिया सभी के लिए एक बेहतर दुनिया है।"
रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं के खिलाफ़ हिंसा जल्दी शुरू हो जाती है और जोखिम ज़िंदगी भर बना रहता है। उदाहरण के लिए, सिर्फ़ पिछले 12 महीनों में, 15-19 साल की 1.2 5 करोड़ किशोरियों (Adolescent girls) या 16% ने अपने करीबी पार्टनर से शारीरिक या यौन हिंसा का सामना किया है। हिंसा का शिकार होने वाली किशोरियों को अनचाहां गर्भ, यौन रोग और अवसाद का ख़तरा बना रहता है।
UN विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा को खत्म करने के लिए हिम्मत, प्रतिबद्धता और मिलकर काम करने की ज़रूरत है। लैंगिक समानता (gender equality) को आगे बढ़ाकर ही एक ज़्यादा बराबर, सुरक्षित दुनिया बना सकते हैं, जहाँ हर महिला और हर लड़की हिंसा से मुक्त ज़िंदगी जी सके।







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